राहुल गांधी

विपक्ष का पीएम मोदी की ‘7 अपीलों’ पर तीखा हमला : राहुल गांधी बोले – यह उपदेश नहीं, सरकार की नाकामी का सबूत है

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Rahul Gandhi News : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता से की गई ‘सात अपीलों’ पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘कम्प्रोमाइज्ड पीएम’ बताते हुए कहा कि अब देश चलाना उनके बस की बात नहीं रही। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि जनता को त्याग करने के लिए कहना प्रधानमंत्री की विफलता को दर्शाता है।

राहुल गांधी का पलटवार: ‘ये उपदेश नहीं, विफलता हैं’

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कल प्रधानमंत्री ने जनता से सोना न खरीदने, विदेश न जाने, पेट्रोल और खाद का उपयोग कम करने जैसी जो अपीलें की हैं, वे असल में सरकार की 12 साल की नाकामियों का नतीजा हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि देश को इस मोड़ पर क्यों ला दिया गया है कि अब सरकार को जनता को यह बताना पड़ रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री की वे 7 अपीलें जिन पर मचा है घमासान

बता दें कि रविवार को सिकंदराबाद की एक जनसभा में पीएम मोदी ने आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए जनता से सात विशेष आग्रह किए थे:

  1. ईंधन की बचत: पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग कम करें।

  2. कार्यशैली में बदलाव: वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) को प्राथमिकता दें।

  3. सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और कारपूलिंग का इस्तेमाल करें।

  4. खाद्य तेल: विदेशी मुद्रा बचाने और सेहत के लिए खाने के तेल का उपयोग घटाएं।

  5. प्राकृतिक खेती: रासायनिक खाद का इस्तेमाल आधा करने का लक्ष्य रखें।

  6. विदेश यात्रा: शादियों और छुट्टियों के लिए विदेश जाना कुछ समय के लिए टाल दें।

  7. सोने की खरीद: देशहित में एक साल तक सोना खरीदने और दान करने से बचें।

विपक्षी दलों ने घेरा: ‘सिर्फ चुनाव तक उठाया बोझ’

पीएम की इन अपीलों के बाद पूरा विपक्ष एकजुट होकर सरकार पर हमलावर है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति संभालने में पूरी तरह नाकाम रही है। वहीं, ‘आप’ नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव खत्म होते ही जनता पर बोझ डालना शुरू कर दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये संकट चुनावों के दौरान नहीं थे?

आर्थिक संकट की आहट?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। साकेत गोखले ने पूछा कि क्या देश भुगतान संतुलन (Balance of Payments) के संकट की ओर बढ़ रहा है? उन्होंने यह भी कहा कि जब आम जनता से त्याग की उम्मीद की जा रही है, तो सरकारी तामझाम और मंत्रियों के बड़े काफिलों पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही। विपक्षी नेताओं का मानना है कि देश की आर्थिक स्थिति दावों से कहीं अधिक गंभीर है।

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