एजेंसी, नई दिल्ली। Raghav Chadha BJP : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने रविवार को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर एक औपचारिक याचिका पेश की है। इस याचिका के जरिए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए अपनी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने और उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग उठाई है। संजय सिंह का कहना है कि इन सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ना सीधे तौर पर ‘दलबदल विरोधी कानून’ का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि इस कानूनी लड़ाई के लिए पार्टी ने कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकीलों और संविधान विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया है।
STORY | AAP submits petition to Rajya Sabha chairman seeking termination of 7 MPs who quit party
Aam Aadmi Party MP Sanjay Singh on Sunday submitted a petition to Rajya Sabha Chairman C P Radhakrishnan seeking the disqualification of seven party MPs in the Upper House who… pic.twitter.com/VMKuILeKBH
— Press Trust of India (@PTI_News) April 26, 2026
राघव चड्ढा समेत इन बड़े चेहरों ने छोड़ा साथ
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। इस राजनीतिक हलचल का असर सोशल मीडिया पर भी दिखा, जहां भाजपा में शामिल होते ही राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। महज 48 घंटों के भीतर उनके करीब 19 लाख फॉलोअर्स कम हो गए हैं।
स्वाति मालीवाल के तीखे हमले और गंभीर आरोप
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं में स्वाति मालीवाल के तेवर सबसे सख्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2006 से साथ काम करने के बावजूद उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। मालीवाल ने दावा किया कि उनके साथ मारपीट हुई और मामले को रफा-दफा करने के लिए उन पर दबाव डाला गया। उन्होंने यह भी दुख जताया कि दो साल तक उन्हें संसद में अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।
क्यों टूटा सांसदों का भरोसा? जानें बगावत की मुख्य वजहें
सांसदों के सामूहिक इस्तीफे के पीछे कई व्यक्तिगत और राजनीतिक कारण सामने आ रहे हैं। राघव चड्ढा के मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के वक्त उनकी चुप्पी और विदेश प्रवास को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। वहीं, संदीप पाठक पार्टी विस्तार में अपनी अनदेखी और जिम्मेदारियां छीने जाने से आहत थे। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और उद्योगपति विक्रमजीत सिंह साहनी को पार्टी के भीतर अहम फैसलों में शामिल न किए जाने और तवज्जो न मिलने की शिकायत थी। अशोक मित्तल के ठिकानों पर जब ईडी की रेड हुई, तब पार्टी द्वारा कोई स्टैंड न लेना उनकी नाराजगी का बड़ा कारण बना। इन सभी सांसदों ने अलग-अलग वजहों से अब भाजपा के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू कर दी है।
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