एजेंसी, द हेग। PM Modi Netherlands Visit : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने यूरोप महाद्वीप के चार देशों के अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे के अंतर्गत नीदरलैंड की अपनी दो दिवसीय सफल यात्रा को पूरा कर लिया है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के विशेष और आदरपूर्ण निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नीदरलैंड की धरती पर पहुंचे थे। अपनी इस बेहद व्यस्त और कूटनीतिक रूप से सफल यात्रा के दौरान शनिवार को भारतीय प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ-साथ वहाँ के महाराजा किंग विलेम अलेक्जेंडर और महारानी क्वीन मैक्सिमा से भी अत्यंत सौहार्दपूर्ण माहौल में मुलाकात की। इन महत्वपूर्ण मुलाकातों के संपन्न होने के साथ ही पीएम मोदी ने अपने इस दो दिवसीय बेहद सफल आधिकारिक दौरे का समापन किया। वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नीदरलैंड का दूसरा सबसे बड़ा और ऐतिहासिक दौरा माना जा रहा है। 16 मई की अलसुबह प्रधानमंत्री मोदी ने हेग में स्थित रॉयल पैलेस हुइस टेन बॉश में राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया, जहाँ शाही दंपत्ति ने भारतीय प्रधानमंत्री के सम्मान में एक विशेष दोपहर के भोज यानी लंच की मेजबानी भी की।
My Netherlands visit has added new momentum to India-Netherlands ties. From elevating our relationship to a Strategic Partnership to expanding cooperation in water resources, semiconductors, innovation, defence, sustainability and mobility, we have charted an ambitious roadmap… pic.twitter.com/Uwnq2bYeXa
— Narendra Modi (@narendramodi) May 17, 2026
द्विपक्षीय वार्ता और रणनीतिक साझेदारी का ऐतिहासिक फैसला
इसके बाद प्रधानमंत्री रॉब जेटन और पीएम मोदी के बीच पहले सीमित स्तर की और फिर डेलिगेशन यानी प्रतिनिधिमंडल स्तर की बेहद गंभीर और व्यापक बातचीत हुई, जिसके बाद शनिवार की शाम को शानदार रात्रिभोज का आयोजन किया गया। इस विशेष बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत और नीदरलैंड के बीच सदियों पुराने और लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक व्यापारिक जुड़ाव, दोनों देशों की जनता के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और लगातार मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्तों को याद किया। दोनों शीर्ष नेताओं ने आपसी संबंधों के इस बहुआयामी ताने-बाने को भविष्य में और ज्यादा बढ़ाने तथा गहरा करने की अपनी दृढ़ इच्छा जताई। इस महत्वपूर्ण संदर्भ में दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में विभिन्न प्रकार के विकास और सहयोग कार्यक्रमों के तहत नियमित रूप से हुई बातचीत और प्रगति पर गहरी संतुष्टि और खुशी व्यक्त की। इसमें शीर्ष राजनीतिक स्तर पर लगातार हुई बातचीत, साल 2023 में भारत की सफल जी20 अध्यक्षता और फरवरी 2026 में नई दिल्ली की धरती पर आयोजित हुए एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान दोनों देशों के बीच हुए बेहद उपयोगी सहयोग को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। दोनों देशों के आपसी संबंधों में आई इस जबरदस्त रफ्तार और बढ़ते मेलजोल को स्वीकार करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक बहुत बड़ा फैसला किया और भारत-नीदरलैंड के रिश्तों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप) के सर्वोच्च स्तर तक बढ़ाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया।
उभरती तकनीकों और भविष्य के सहयोग का महत्वाकांक्षी रोडमैप
इस नए ऐतिहासिक फैसले के संदर्भ में दोनों देशों के नेताओं ने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाने का पुरजोर स्वागत किया। इस नए रोडमैप के अंतर्गत दोनों पक्ष राजनीतिक संवाद, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्पेस यानी अंतरिक्ष विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम सिस्टम जैसी अत्यंत जरूरी और भविष्य की उभरती हुई तकनीकों पर साथ काम करेंगे। इसके अलावा विज्ञान और इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी, स्वास्थ्य सेवा, सतत कृषि प्रणाली और आधुनिक खाद्य सिस्टम, वॉटर मैनेजमेंट यानी जल प्रबंधन, क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) और एनर्जी ट्रांजिशन, सतत परिवहन व्यवस्था, मैरीटाइम डेवलपमेंट (समुद्री विकास), शिक्षा, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव सहित सभी क्षेत्रों में लगातार और एक मजबूत संरचनात्मक सहयोग के जरिए काम करने पर पूरी तरह सहमत हुए हैं। दोनों पक्ष नीति नियोजन के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशने पर सहमत हुए। दोनों प्रधानमंत्रियों ने भविष्य के लिए एक साझा और प्रोग्रेसिव दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया और लोकतंत्र, बुनियादी मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति एवं सुरक्षा तथा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) चार्टर के मुख्य उद्देश्यों और सिद्धांतों के पूरी तरह अनुरूप नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को दोहराया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की दावेदारी का मजबूत समर्थन
दोनों देशों की सरकारों ने आज की बदलती हुई वैश्विक वास्तविकताओं और जरूरतों को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएससी) की सदस्यता की स्थायी और अस्थायी, दोनों ही श्रेणियों को तत्काल बढ़ाने समेत पूरी बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने और उसमें सुधार लाने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी गहरा जोर दिया। इसके लिए दोनों नेताओं ने एक तय समयसीमा के भीतर टेक्स्ट-बेस्ड बातचीत शुरू करने की पुरजोर अपील की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक पटल पर सुधारी हुई और विस्तारित की गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे के लिए अपने डच समकक्ष प्रधानमंत्री रॉब जेटन द्वारा लगातार दिए जा रहे अटूट और मजबूत समर्थन के लिए व्यक्तिगत रूप से उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच रणनीतिक साझेदारी को और ज्यादा गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता जताई और इसी साल जनवरी के महीने में आपसी लाभ वाले भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत के सफलतापूर्वक पूरे होने का खुले दिल से स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज पर एक साथ हस्ताक्षर होने का भी स्वागत किया, जो सुरक्षा और रक्षा के मोर्चे पर यूरोपीय संघ और भारत की आपसी बातचीत और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा। यह समझौता समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और डिफेंस इंडस्ट्रियल सहयोग जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में भविष्य में बेहद ठोस और सकारात्मक नतीजे देगा।
इंडो-पैसिफिक विजन और सेमीकंडक्टर तकनीक पर बड़े समझौते
हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर यूरोपीय संघ की दीर्घकालिक रणनीति को याद करते हुए नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया। उन्होंने भारत के नेतृत्व वाले इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) में नीदरलैंड के आधिकारिक रूप से शामिल होने की घोषणा की। इसके साथ ही नीदरलैंड अब जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर कैपेसिटी बिल्डिंग (क्षमता निर्माण) और रिसोर्स शेयरिंग (संसाधन साझाकरण) के स्तंभ को को-लीड यानी संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने का काम करेगा। रक्षा और सुरक्षा सहयोग के व्यापक क्षेत्र में दोनों नेताओं ने ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (आशय पत्र) पर हस्ताक्षर होने का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अहमियत पर जोर दिया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण और उससे संबंधित उभरती हुई तकनीकों पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण साझेदारी को लेकर एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए। लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए माइग्रेशन और मोबिलिटी के क्षेत्र में भी भारत सरकार और नीदरलैंड सरकार के बीच एक विशेष समझौता ज्ञापन संपन्न हुआ। इसके अतिरिक्त सेमीकंडक्टर्स के क्षेत्र में एक और बड़ी प्रगति के तहत भारत के धोलेरा में स्थापित होने वाले आधुनिक सेमीकंडक्टर फैब को पूरा सपोर्ट और सहयोग देने के लिए भारत की दिग्गज कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की एएसएमएल के बीच एक विशेष व्यापारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए भारत गणराज्य के खान मंत्रालय और नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के बीच एक उच्च स्तरीय एमओयू हुआ। जल प्रबंधन के क्षेत्र में गुजरात की बेहद महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना के संबंध में उन्नत तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भारत गणराज्य के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर और जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच एक संयुक्त आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए बड़े वादे
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए क्लीन और ग्रीन हाइड्रोजन कोऑपरेशन के चौतरफा डेवलपमेंट पर एक विशेष भारत-नीदरलैंड रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए हाल ही में हुए नए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत एक अत्याधुनिक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (संयुक्त कार्य समूह) की स्थापना की जाएगी। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र और एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं पर रणनीतिक सहयोग के लिए भारत के नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच एक महत्वपूर्ण संयुक्त आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत वेस्ट त्रिपुरा के इलाके में फूलों की आधुनिक खेती के लिए ‘इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जाएगी। इसी तरह बेंगलुरु में स्थित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एनिमल हसबैंड्री’ (सीईएएच) में डेयरी क्षेत्र के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए एक और विशिष्ट ‘इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा नीदरलैंड के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्रकृति मंत्रालय के बीच पशुपालन और डेयरी के विकास में सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भी बड़ी पहल की गई है, जिसके तहत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार तथा नीदरलैंड के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड द एनवायरनमेंट (आरआईवीएम) के बीच स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग को लेकर एक संयुक्त आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
शिक्षा, कस्टम और संस्कृति के क्षेत्र में भी बनी सहमति
दोनों देशों ने व्यापार को और सरल बनाने के लिए कस्टम यानी सीमा शुल्क से जुड़े मामलों में आपसी प्रशासनिक और व्यावहारिक सहायता के लिए भारत सरकार और नीदरलैंड सरकार के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता किया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी गुणात्मक सहयोग को बढ़ावा देने को लेकर दोनों देशों के बीच एक व्यापक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक नालंदा यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के बीच अकादमिक और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरीज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के बीच भी ऐतिहासिक दस्तावेजों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
नीदरलैंड से स्वीडन के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, पश्चिम एशिया पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी इस ऐतिहासिक और बेहद व्यस्त दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा को सफलतापूर्वक समाप्त करने के बाद रविवार को अपने अगले पड़ाव यानी स्वीडन के लिए हेग से रवाना हो गए हैं। अपनी इस नीदरलैंड यात्रा के दौरान उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, जल प्रबंधन, शिक्षा और ऊर्जा जैसे तमाम प्रमुख और रणनीतिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को एक नई गति देने के लिए कुल 17 महत्वपूर्ण और द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने शनिवार को अपने डच समकक्ष रॉब जेटेन के साथ जो आमने-सामने द्विपक्षीय वार्ता की, उसमें दोनों नेताओं ने वर्तमान में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की बेहद अशांत स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने माना कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (ग्लोबल एनर्जी सप्लाई) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क में जो बड़ा व्यवधान आया है, उसका इस पूरे क्षेत्र के साथ-साथ समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था और स्थानीय कमर्शियल गतिविधियों पर बेहद गंभीर और विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जताया आभार, डच कंपनियों को दिया भारत आने का न्योता
नीदरलैंड से रवाना होते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद भावुक और सकारात्मक पोस्ट साझा किया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि मेरी इस नीदरलैंड यात्रा ने भारत और नीदरलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को एक बिल्कुल नई और सकारात्मक गति प्रदान की है। हमारे आपसी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के सर्वोच्च स्तर तक ले जाने से लेकर जल संसाधन प्रबंधन, सेमीकंडक्टर तकनीक, नए नवाचार, रक्षा सहयोग, स्थिरता और मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाने तक, हमने दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रारूप और रोडमैप तैयार कर लिया है। उन्होंने आगे लिखा कि मैं नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन का उनके बेहद गर्मजोशी भरे और शानदार आतिथ्य सत्कार के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जो मुझे व्यक्तिगत रूप से विदाई देने के खास मकसद से खुद हवाई अड्डे तक आए। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत और नीदरलैंड के बीच की यह ऐतिहासिक मित्रता और ज्यादा अटूट व मजबूत होगी। इस मुख्य द्विपक्षीय वार्ता से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम रॉब जेटेन के साथ मिलकर ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य सेवा, कृषि व्यापार और आधुनिक प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही नीदरलैंड की कई दिग्गज और प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ एक राउंड टेबल बैठक भी की थी। इस बैठक में पीएम मोदी ने सभी बड़ी डच कंपनियों को भारत में निवेश करने और विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में छिपे असीम अवसरों का लाभ उठाने के लिए खुले दिल से आमंत्रित किया।
प्रतिष्ठित बांध का दौरा और स्वीडन यात्रा के नए कूटनीतिक लक्ष्य
रविवार को स्वीडन के लिए उड़ान भरने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डच प्रधानमंत्री जेटेन के साथ नीदरलैंड के इंजीनियरिंग के बेजोड़ नमूने और बेहद प्रतिष्ठित ‘अफस्लुइटडिज्क’ बांध का जमीनी दौरा किया। भारत और नीदरलैंड वर्तमान में जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल लचीले और मजबूत बुनियादी ढांचे (क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण में बेहद गहन और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी बीते शुक्रवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर हेग पहुंचे थे और उनका यह दौरा उनके यूरोप के चार देशों की रणनीतिक यात्रा का एक बेहद अहम हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत के द्विपक्षीय संबंधों को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करना है। अपने इस यूरोप दौरे के अगले पड़ाव के रूप में स्वीडन पहुंचे पीएम मोदी वहाँ अपने स्वीडिश समकक्ष प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और आपसी व्यापार को और अधिक बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर गंभीर वार्ता करेंगे। आपको बता दें कि भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार साल 2025 में बढ़कर रिकॉर्ड 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया था। अब दोनों देश पर्यावरण हितैषी परिवर्तन (ग्रीन ट्रांजिशन), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नई और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, लचीली और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) के निर्माण, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष विज्ञान, क्लाइमेट एक्शन और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय रिश्तों को और तेजी से बढ़ावा देने पर अपना मुख्य ध्यान केंद्रित करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए स्वीडन की ऐतिहासिक यात्रा की थी। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्री स्वीडन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ को भी विशेष रूप से संबोधित करने वाले हैं, जो समूचे यूरोप महाद्वीप के दिग्गज और शीर्ष उद्योगपतियों व व्यापारियों का एक बेहद प्रतिष्ठित और प्रमुख मंच माना जाता है।
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