Bandi Sanjay Son Arrested

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे भगीरथ पॉक्सो मामले में गिरफ्तार, कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेजा

तेलंगाना देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, हैदराबाद। Bandi Sanjay Son Arrested : केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के परिवार से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे भगीरथ को पुलिस ने पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) कानून के तहत दर्ज एक मामले में शनिवार की रात को गिरफ्तार कर लिया है। भर्ती की इस बड़ी कार्रवाई के बाद आरोपी भगीरथ को स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है। पुलिस के एक अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया है कि आरोपी को कानून के दायरे में लेते हुए बंदी बना लिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।

पुलिस टीमों की मुस्तैदी और कड़ी नाकाबंदी से हाथ आया आरोपी

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मध्यरात्रि के बाद साइबराबाद के पुलिस आयुक्त कार्यालय की तरफ से एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की गई है। इस सरकारी बयान में पुलिस कमिश्नर ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी भगीरथ को पकड़ने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक स्तर पर जाल बिछाया था। उसे तलाशने के लिए करीमनगर, देश की राजधानी दिल्ली और देश के कई अन्य संभावित ठिकानों पर पुलिस की अलग-अलग विशेष टीमें भेजी गई थीं। इन खोजी टीमों ने आरोपी के बेहद करीबी परिचितों, रिश्तेदारों के घरों और उन तमाम गुप्त ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जहाँ उसके छिपने या आने-जाने की थोड़ी भी आशंका थी। इसी बीच पुलिस तंत्र को एक बेहद ठोस और विश्वसनीय गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि भगीरथ इस समय हैदराबाद में स्थित पुलिस अकादमी के आसपास के इलाके में मौजूद है। इस महत्वपूर्ण इनपुट के मिलते ही पुलिस की टीमों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ नाकेबंदी कर दी गई।

विशेष अभियान दल को मिली बड़ी कामयाबी

साइबराबाद पुलिस की विशेष अभियान टीम यानी एसओटी को शनिवार की रात को इस मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी। विशेष टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए नरसिंगी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंचिरेवुला इलाके से भगीरथ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। पुलिस ने तुरंत उसे अपनी हिरासत में लिया और सुरक्षा कारणों से उसे पेटबशिष्टबाद पुलिस थाने ले जाया गया। इसके बाद मामले की जांच कर रहे मुख्य जांच अधिकारी ने निष्पक्ष नागरिकों यानी पंच गवाहों की उपस्थिति में आरोपी भगीरथ से बेहद गहन पूछताछ शुरू की।

जुर्म कबूल करने के बाद कोर्ट में पेशी और जेल यात्रा

पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लंबी पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। आरोपी के कबूलनामे के बाद जांच अधिकारी ने कानूनी तौर पर उसकी गिरफ्तारी दर्ज की। गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी भगीरथ का अनिवार्य रूप से मेडिकल टेस्ट यानी चिकित्सा परीक्षण कराया गया। इसके तुरंत बाद उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश जारी कर दिया। आपको बता दें कि इससे ठीक पहले दिन में साइबराबाद पुलिस ने भगीरथ के देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए उसके खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया था और पुलिस की विशेष टीमें पूरे देश में उसकी धरपकड़ के लिए अभियान चला रही थीं।

पीड़िता और मां के बयान अदालत में दर्ज

इस पूरे आपराधिक मामले की जांच को पुख्ता बनाने के लिए शनिवार को सत्रह वर्षीय कथित पीड़ित नाबालिग लड़की और उसकी सगी मां के बयान कानूनी तौर पर मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए। इस मामले में पीड़ित लड़की की मां ही मुख्य शिकायतकर्ता हैं जिन्होंने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी। कानूनी जानकारों के अनुसार, मजिस्ट्रेट के समक्ष यह बयान इसलिए दर्ज कराए गए हैं ताकि मामले का पूरी तरह से विश्वसनीय दस्तावेजीकरण हो सके। कोर्ट के सामने दर्ज बयान की वजह से मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोई भी व्यक्ति अपने कहे हुए शब्दों या बयानों से मुकर नहीं सकता है और इससे केस को मजबूती मिलती है।

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने कानून का सम्मान करने की बात कही

दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं अपने बेटे को पुलिस प्रशासन के सामने उपस्थित होने और पूरी जांच प्रक्रिया में हर संभव सहयोग देने के निर्देश दिए थे। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि सत्यमेव जयते। देश के कानून और देश की न्यायपालिका के प्रति पूरी निष्ठा और सम्मान व्यक्त करते हुए, आज मेरा बेटा बंडी भगीरथ हमारे कानूनी सलाहकारों और वकीलों के माध्यम से जांच का सामना करने के लिए तेलंगाना राज्य की पुलिस के सामने खुद उपस्थित हुआ है।

उच्च न्यायालय से झटका लगने के बाद हुई कार्रवाई

यह पूरी कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का घटनाक्रम तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा मामले में भगीरथ को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत या सुरक्षा देने से साफ इनकार किए जाने के ठीक एक दिन बाद देखने को मिला है। केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने अपने एक अन्य बयान में दावा किया कि पिछले हफ्ते जैसे ही पुलिस थाने में शिकायत दर्ज होने की बात उनके संज्ञान में आई थी, उन्होंने तुरंत अपने बेटे को पुलिस का सहयोग करने के लिए कह दिया था। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि उनके बेटे भगीरथ ने उनसे बार-बार यही कहा है कि उसने कोई भी गलत काम या अपराध नहीं किया है। भगीरथ ने अपनी बेगुनाही को साबित करने वाले कई अहम सबूत अपने वकीलों के सामने भी प्रस्तुत किए थे।

वकीलों के भरोसे में रहने के कारण हुई देरी

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय के मुताबिक, उनके कानूनी सलाहकारों और वकीलों का यह दृढ़ विश्वास था कि यह पूरा मामला पूरी तरह निराधार है और अदालत से इसे खारिज कर दिया जाएगा, साथ ही भगीरथ को आसानी से अग्रिम जमानत मिल जाएगी। इसी कानूनी भरोसे और दांव-पेच के चक्कर में पुलिस के सामने आने में थोड़ी देरी हुई। इस बीच इस पूरे मामले ने बेहद गंभीर राजनीतिक रूप भी अख्तियार कर लिया है। तेलंगाना रक्षा सेना यानी टीआरएस की प्रमुख के. कविता ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक बेहद सख्त पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से गृह राज्य मंत्री संजय कुमार को तुरंत पदमुक्त किया जाए ताकि उनके रसूखदार बेटे के खिलाफ दर्ज पॉक्सो जैसे संगीन मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच संभव हो सके। भगीरथ को अदालत से उस वक्त सबसे बड़ा झटका लगा जब तेलंगाना उच्च न्यायालय ने शुक्रवार की रात को उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली अंतरिम सुरक्षा की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट का कड़ा रुख

आरोपी भगीरथ की तरफ से अदालत में दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका पर बहुत लंबी सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान माननीय अदालत ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि वह मामले के इस शुरुआती चरण में आरोपी को किसी भी तरह की अंतरिम राहत या छूट देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। हालांकि भगीरथ के निजी वकील ने अदालत से बार-बार यह गुहार लगाई थी कि जब तक इस याचिका पर अंतिम आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक के लिए पुलिस को गिरफ्तारी करने से रोकने के निर्देश दिए जाएं यानी अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो के तहत गंभीर मुकदमा

उल्लेखनीय है कि पुलिस प्रशासन ने भगीरथ के खिलाफ बीते आठ मई को नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता और बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े सख्त पॉक्सो कानून की कई गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। यह पूरी शिकायत एक सत्रह साल की नाबालिग लड़की की मां ने दर्ज कराई थी। मां ने अपनी शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि भगीरथ के उनकी नाबालिग बेटी के साथ संबंध थे और उसने उनकी बेटी का शारीरिक व मानसिक रूप से यौन उत्पीड़न किया है। बाद में जब पुलिस ने पीड़ित लड़की का विस्तृत बयान दर्ज किया, तो उसमें सामने आए तथ्यों के आधार पर इस केस में पॉक्सो कानून की और भी ज्यादा कड़ी और गैर-जमानती धाराएं जोड़ दी गईं।

आरोपी भगीरथ ने भी दर्ज कराई थी जवाबी शिकायत

इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू यह भी है कि खुद मुख्य आरोपी भगीरथ ने भी पुलिस में एक जवाबी शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में भगीरथ ने आरोप लगाया था कि सामान्य जान-पहचान होने के बाद वह लड़की उसे अपने पारिवारिक उत्सवों, कार्यक्रमों और सामाजिक समारोहों में बार-बार आमंत्रित करने लगी थी। भगीरथ की इसी शिकायत को आधार बनाकर पुलिस ने एक अलग प्राथमिकी भी दर्ज की थी। अपनी उस शिकायत में भगीरथ ने तर्क दिया था कि लड़की के पूरे परिवार को बेहद सीधा और भरोसेमंद इंसान मानकर वह अपने कुछ खास दोस्तों के साथ उनके साथ कुछ प्रसिद्ध धार्मिक और तीर्थ स्थलों की यात्रा पर भी गया था।

पाँच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप

भगीरथ ने अपनी शिकायत में आगे बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए कहा कि उस धार्मिक यात्रा के बाद लड़की और उसके माता-पिता अचानक उन पर शादी करने का बेहद अनुचित दबाव बनाने लगे। जब भगीरथ ने उनके इस शादी के प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया, तो लड़की के माता-पिता अपनी असली नीयत पर उतर आए और उन्होंने कथित तौर पर भारी-भरकम पैसों की मांग शुरू कर दी। उन्होंने खुलेआम धमकी दी कि अगर उन्हें मोटी रकम नहीं दी गई तो वे भगीरथ के खिलाफ यौन उत्पीड़न की झूठी और मनगढ़ंत शिकायतें दर्ज करवाकर उसका करियर बर्बाद कर देंगे। भगीरथ का दावा है कि बदनामी और कानूनी पचड़े के डर से उसने शुरुआत में लड़की के पिता को पचास हजार रुपये दे भी दिए थे, लेकिन उस लालची परिवार की भूख यहीं शांत नहीं हुई। बाद में उस परिवार ने सीधे पाँच करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम की मांग कर दी। भगीरथ ने पुलिस को यह भी बताया कि उस परिवार ने धमकी दी थी कि अगर उनकी पाँच करोड़ रुपये की मांग पूरी नहीं की गई, तो लड़की की मां आत्महत्या कर लेगी और इसका पूरा इल्जाम भगीरथ पर लगा देगी। फिलहाल पुलिस इन दोनों ही पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है।

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