एजेंसी, नई दिल्ली। Parliament Monsoon Session 2026 : संसद के आगामी मानसून सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विधायी कार्यों को गति देने और विपक्ष के साथ तालमेल बिठाने के उद्देश्य से सरकार ने सत्र की औपचारिक शुरुआत से ठीक 1 दिन पहले एक व्यापक सर्वदलीय बैठक आमंत्रित की है। इस बैठक के आयोजन के लिए 19 जुलाई की तारीख तय की गई है, जिसमें देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल होने के लिए संदेश भेजा गया है। सरकार इस मंच का उपयोग अपने प्रस्तावित विधायी एजेंडे को सामने रखने के लिए करेगी, जबकि दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां भी उन ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों को रेखांकित करेंगी जिन पर वे सदन के भीतर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाब चाहती हैं।
विधायी एजेंडे और सदन के संचालन पर होगी गहन चर्चा
परंपरा के अनुसार आयोजित होने वाली यह सर्वदलीय बैठक 19 जुलाई को सुबह 11 बजे प्रारंभ होगी। केंद्र सरकार के पास इस बार के मानसून सत्र के दौरान पटल पर रखने के लिए कई बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले विधेयक मौजूद हैं। इन कानूनों को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में शांतिपूर्ण माहौल और विपक्षी दलों के सहयोग की अत्यंत आवश्यकता होगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संसदीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में इस बैठक का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ सरकार सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और कार्यवाही को बिना किसी बाधा के चलाने की अपील करेगी।
भारी हंगामे के आसार और बदल चुके राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2026 का यह मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत ज्यादा गर्माहट भरा और अशांत रह सकता है। हालिया दिनों में भारतीय राजनीति के भीतर कई बड़े उलटफेर और दलों में आंतरिक विभाजन देखने को मिले हैं, जिसका सीधा प्रभाव संसद के भीतर बैठने की व्यवस्था और संख्या बल पर पड़ने वाला है। विभिन्न राज्यों में राजनीतिक उठापटक के बाद कई सांसदों के पाला बदलने की खबरें सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल के राजनैतिक घटनाक्रमों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा असंतोष देखने को मिला है, जहाँ उसके 20 सांसदों के नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने की सूचना है। इन सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष से ममता बनर्जी के गुट से अलग बैठने की अनुमति भी मांगी है। इसके अतिरिक्त तृणमूल कांग्रेस के 3 राज्यसभा सांसदों ने अपनी सदस्यता त्याग कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। महाराष्ट्र की राजनीति में भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को झटका लगा है, जिसके 6 लोकसभा सदस्य अब सूबे के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे में शामिल हो चुके हैं। पूर्व में आम आदमी पार्टी के भी 7 राज्यसभा सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं गर्म रही हैं, जिससे सदन के भीतर का पूरा गणित बदल चुका है।
इन बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में मुस्तैद विपक्ष
संसद के इस सत्र में विपक्ष के पास सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए कई बड़े विषय मौजूद हैं। सबसे प्रमुख मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा प्रवेश परीक्षा यानी नीट-यूजी पेपर लीक मामले से जुड़ा हुआ है। विपक्षी पार्टियां देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में हो रही धांधली और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों पर संसद में काम रोको प्रस्ताव या विशेष चर्चा की मांग पर अड़ सकती हैं। इसके अलावा देश की सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और महंगाई जैसे विषयों पर भी विपक्षी खेमा बेहद आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दे रहा है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तय हुआ सत्र का पूरा कार्यक्रम
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पूरे सत्र की समय सीमा के संबंध में पहले ही आधिकारिक तौर पर देश को सूचित कर दिया था। उनके वक्तव्य के अनुसार, संसद का यह महत्वपूर्ण मानसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होकर 13 अगस्त 2026 तक निरंतर चलेगा। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की अनुशंसा को स्वीकार करते हुए संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, की कार्यवाही निर्धारित तिथियों पर बुलाने की अपनी संवैधानिक स्वीकृति प्रदान की है। अब सभी की नजरें 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच सदन को शांतिपूर्वक चलाने पर कोई आम सहमति बन पाती है या नहीं।
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