एजेंसी, नई दिल्ली। New CDS General Subramani : भारतीय सैन्य बलों के इतिहास में रविवार को एक नया अध्याय जुड़ गया जब देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने औपचारिक तौर पर अपना पदभार ग्रहण कर लिया। नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक लॉन्स में उन्हें तीनों सेनाओं की ओर से अत्यंत भव्य ‘ट्राई-सर्विसेज गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। जनरल सुब्रमणि देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बने हैं। उन्होंने इस सर्वोच्च पद पर जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जो शनिवार को अपनी शानदार सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए थे। पदभार संभालने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नए सीडीएस ने देश की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारतीय थलसेना, नौसेना, वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा से जुड़े सभी संबंधित संस्थान देश की संप्रभुता और सुरक्षा को और अधिक मजबूत तथा अभेद्य बनाने के लिए पूरी तरह से एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
Chief of Defence Staff General NS Raja Subramani reaffirmed the Defence Forces’ unwavering commitment to safeguarding India’s sovereignty and advancing national security.
On assuming charge as the CDS, General Subramani said that focus will be on accelerating military… pic.twitter.com/7pgnuDLxNZ
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) May 31, 2026
स्वदेशी हथियारों को बढ़ावा देने और नई सैन्य रणनीति पर रहेगा विशेष जोर
जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने सेना के भविष्य के रोडमैप को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारतीय सेनाओं में स्वदेशी हथियारों और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के अपडेशन, उनकी समय पर खरीद और रक्षा प्रणालियों में उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया को काफी तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बदल रहे युद्ध के तौर-तरीकों को देखते हुए भारतीय सेना की ताकत और मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए नई सोच, उन्नत तकनीक और नए रणनीतिक तरीकों को अपनाया जाना समय की मांग है। वे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में ही निर्मित सैन्य साजो-सामान को प्राथमिक स्तर पर बढ़ावा देने के पक्षधर हैं।
जनरल सुब्रमणि का पहला और सबसे बड़ा टास्क: थिएटर कमांड सिस्टम को लागू करना
नए सीडीएस जनरल सुब्रमणि के सामने सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चुनौती भारतीय सेना के भीतर ‘थिएटर कमांड मॉडल’ को जमीनी स्तर पर पूरी तरह से लागू करने की होगी। इस व्यवस्था को लेकर एक दिन पहले ही थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी बड़ा बयान दिया था। जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया था कि सेना को आधुनिक स्वरूप देने के लिए थिएटर कमांड बनाने की प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे जुड़ी एक विस्तृत और उच्च स्तरीय रिपोर्ट केंद्रीय रक्षा मंत्री को सौंपी जा चुकी है, जिसका अलग-अलग स्तरों पर गहन रिव्यू (समीक्षा) किया जा रहा है। थलसेना प्रमुख ने उम्मीद जताई थी कि अगले 2 से 3 वर्षों के भीतर यह नई रक्षा व्यवस्था जमीनी स्तर पर पूरी तरह से प्रभावी रूप से काम करती हुई दिखाई दे सकती है। इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करते समय तीनों सेनाओं के प्रमुख हितों और उनकी विशिष्ट क्षमताओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
क्या है थिएटर कमांड व्यवस्था और क्यों है इसकी जरूरत?
वर्तमान रक्षा ढांचे की बात करें तो भारत में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अलग-अलग कुल 17 कमांड सक्रिय हैं। मौजूदा व्यवस्था में किसी भी बड़े सैन्य अभियान या युद्ध की स्थिति के दौरान तीनों सेनाएं आपस में समन्वय (कोऑर्डिनेशन) स्थापित करके काम तो करती हैं, लेकिन उन सभी की कमान और नियंत्रण पूरी तरह से अलग-अलग केंद्रों से संचालित होता है। इसके विपरीत, भविष्य की ‘थिएटर कमांड व्यवस्था’ में किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या रणनीतिक मिशन के लिए तीनों सेनाओं को मिलाकर एक ही एकीकृत कमांड बनाई जाएगी, जिसका नेतृत्व केवल एक ही कमांडर के हाथ में होगा। इस मॉडल के लागू होने से सेना की तीनों यूनिट्स (जल, थल और नभ) एक ही छत के नीचे, एक ही योजना के तहत अत्यंत सटीक और त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम हो सकेंगी। इससे युद्ध की स्थिति में संसाधनों की बर्बादी रुकेगी और दुश्मन पर तुरंत घातक प्रहार किया जा सकेगा।
गढ़वाल राइफल्स से शुरू हुआ था सैन्य सफर, नेशनल वॉर मेमोरियल पर दी श्रद्धांजलि
अपने नए कार्यकाल की शुरुआत करने से पहले सीडीएस जनरल सुब्रमणि ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) जाकर देश के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जनरल सुब्रमणि के प्रारंभिक सैन्य सफर की बात करें तो उन्होंने दिसंबर 1985 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित इंफेंट्री रेजिमेंट ‘गढ़वाल राइफल्स’ के माध्यम से सेना में एक अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। उनके करीब चार दशक लंबे शानदार सैन्य करियर की शुरुआत यहीं से हुई थी, जिसके बाद उन्होंने देश की सुरक्षा में कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर स्थापित किए।
देश-विदेश के शीर्ष संस्थानों से हासिल की उच्च सैन्य शिक्षा और डिग्रियां
जनरल एनएस राजा सुब्रमणि की गिनती भारतीय सेना के सबसे पढ़े-लिखे और रणनीतिक रूप से कुशल अधिकारियों में होती है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक सैन्य शिक्षा और कड़ा प्रशिक्षण देश के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) से हासिल किया। इसके बाद वे उच्च सैन्य रणनीतियों को सीखने के लिए ब्रिटेन के ब्रैकनेल में स्थित ‘जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज’ भी गए। ब्रिटेन से भारत लौटने के बाद उनकी सैन्य प्रतिभा को देखते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण माउंटेन ब्रिगेड में ‘ब्रिगेड मेजर’ की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने देश के शीर्ष रक्षा संस्थान, नई दिल्ली के ‘नेशनल डिफेंस कॉलेज’ से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। उनके पास लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से ‘मास्टर ऑफ आर्ट्स’ की डिग्री और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज (रक्षा अध्ययन) में ‘एमफिल’ की उच्च शैक्षणिक योग्यता भी है।
40 वर्षों का लंबा सैन्य करियर और महत्वपूर्ण पदों पर रहने का अनुभव
जनरल सुब्रमणि ने लगभग 40 वर्षों तक भारतीय सेना के विभिन्न महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पदों पर रहते हुए देश की सेवा की है। वे न केवल सैन्य अभियानों के व्यावहारिक जानकार हैं, बल्कि नीतियों को तैयार करने में भी माहिर माने जाते हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) में अत्यंत महत्वपूर्ण पद ‘सैन्य सलाहकार’ के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं, जहाँ वे देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीतियों को आकार देने में शामिल रहे। इससे पहले, उन्होंने जुलाई 2024 से जुलाई 2025 के बीच भारतीय थलसेना के उप-प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के रूप में भी कार्य किया, जो उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव को दर्शाता है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बेहद संवेदनशील सांबा क्षेत्र में ‘168 इन्फैंट्री ब्रिगेड’ की कमान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। इसके अलावा, वे वेलिंगटन स्थित प्रसिद्ध ‘डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज’ में चीफ इंस्ट्रक्टर के पद पर भी तैनात रहे, जहाँ उन्होंने देश के सैकड़ों युवा सैन्य अधिकारियों को युद्ध कौशल के गुर सिखाए।
अद्वितीय सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित सैन्य पदकों से हो चुके हैं सम्मानित
जनरल सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन से जुड़े सामरिक मामलों का एक बेहद मंझा हुआ और बड़ा एक्सपर्ट माना जाता है। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर उनकी बेहतरीन रणनीतिक तैनाती और संकट के समय लिए गए सटीक फैसलों के कारण सेना में उनका विशेष सम्मान है। चार दशकों की इस बेदाग और असाधारण सैन्य सेवा के दौरान उनके अदम्य साहस, कर्तव्यपरायणता और उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता को देखते हुए भारत सरकार और राष्ट्रपति द्वारा उन्हें देश के कई सर्वोच्च और अत्यंत प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। जनरल सुब्रमणि को अब तक परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम), अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम), सेना मेडल (एसएम) और विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) जैसे उच्च पदकों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके इस विशाल अनुभव का लाभ अब देश की तीनों सेनाओं को एक नए रूप में मिलेगा।
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