एजेंसी, नई दिल्ली। MSME Amendment Bill 2026 Lok Sabha : संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा ने विपक्षी दलों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 2026 को बिना किसी विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। यह विधेयक उच्च सदन यानी राज्यसभा से पहले ही पारित हो चुका था, जिसके बाद अब इस पर संसद की अंतिम मुहर लग गई है। पीठासीन अधिकारी द्वारा दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही प्रारंभ की गई, विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरुद्ध हुई पुलिस कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस भारी शोर-शराबे के बीच ही केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने हेतु पटल पर रखा, जिसे बिना किसी बहस के सदन ने पारित कर दिया।
The Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026, passed by the Lok Sabha today, subsequent to its passing by the Rajya Sabha on 3rd August, 2026.
The Micro, Small and Medium Enterprises Development Act (MSMED Act) was notified in 2006 and has… pic.twitter.com/QJmNOsS6rk
— Ministry of MSME (@minmsme) August 7, 2026
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण और भुगतान नियमों में बड़े बदलाव
पारित किए गए नए कानून के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण के लिए अब संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश के साथ-साथ कारोबार यानी कुल बिक्री को भी मुख्य आधार बनाया जाएगा, जिसकी सीमा केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करके निर्धारित करेगी। इसके अतिरिक्त सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक होगी, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें विशेष डिजिटल मंच अधिसूचित करेंगी। नए प्रावधानों के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए इन उद्यमों से की गई सेवाओं और वस्तुओं की खरीद का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक बिल भुनाई प्रणाली के माध्यम से करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकारें भी अपने विभिन्न उपक्रमों और प्राधिकरणों के लिए यह व्यवस्था लागू कर सकती हैं।
विवाद निपटारा प्रक्रिया और चूक पर सख्त जुर्माना
विवादों के त्वरित और समयबद्ध समाधान के लिए विधेयक में मध्यस्थता प्रक्रिया को अधिकतम 90 दिनों के भीतर पूरा करने का नियम बनाया गया है। यदि मध्यस्थता विफल होती है तो 30 दिनों के भीतर मामला पंचाट को सौंपा जाएगा, जहाँ दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के अंदर अंतिम फैसला सुनाना होगा। न्यायालय में अपील की स्थिति में यदि मामला 6 महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो पंचाट राशि का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आपूर्तिकर्ता को देने का आदेश दिया जा सकता है। नए नियमों में पहली बार गलत जानकारी देने पर चेतावनी और बाद में जुर्माने का प्रावधान है। वार्षिक खातों में बकाया राशि की जानकारी न देने पर चरणबद्ध जुर्माना लगेगा, जिसमें प्रति 3 वर्ष में न्यूनतम 10 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि होगी।
गृहमंत्री के वक्तव्य को लेकर राज्यसभा में तीखी नोकझोंक
दूसरी ओर, राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति और उनके वक्तव्य की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर 20 जुलाई को हुए पुलिस बल प्रयोग के मुद्दे पर गृहमंत्री को सदन में जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभापति द्वारा संदेश पहुँचाए जाने के बाद भी गृहमंत्री का न आना सदन का अनादर है। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि संसदीय नियमों के तहत संबंधित विभाग का मंत्री ही जवाब देता है और विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किस मंत्री को सदन में आकर बोलना है।
हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित
संसदीय कार्य मंत्री के इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्ष का विरोध और अधिक उग्र हो गया, जिससे सदन में तीव्र नारेबाजी शुरू हो गई। पीठासीन अधिकारी ने पहले कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए रोका, लेकिन दोबारा बैठक शुरू होने पर भी गतिरोध समाप्त नहीं हो सका। स्थिति सामान्य न होते देख सभापति ने उच्च सदन की कार्यवाही को सोमवार, 10 अगस्त, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। संसद सत्र के दौरान राजनीतिक गतिरोध के कारण कई अन्य विधायी कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी पर अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जानकारी दी कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नियमों का उल्लंघन करने पर 31 मई तक 2,359 अस्पतालों को सूची से हटा दिया गया है और 1,200 से अधिक अस्पतालों को निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त धोखाधड़ी के मामलों में 29 प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं और 328.49 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी वसूला गया है। सरकार इस योजना में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शून्य सहनशीलता की नीति पर काम कर रही है।
स्वचलित तकनीक से फर्जी दावों की पहचान और करोड़ों की बचत
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की धोखाधड़ी रोधी इकाई संदिग्ध दावों को पकड़ने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर आधारित स्वचालित प्रणाली का उपयोग कर रही है। यह तकनीक दावा प्रस्तुत होने के 24 घंटे के भीतर अनधिकृत बिलिंग, फर्जी प्रविष्टियों और मरीज की गलत पहचान जैसे असामान्य पैटर्न को पहचान लेती है। भुगतान से पूर्व गहन जांच व्यवस्था के कारण 31 जुलाई 2026 तक 676.14 करोड़ रुपये की अवैध निकासी को रोका गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 3.75 करोड़ नए आयुष्मान कार्ड बनाए गए और 2.74 करोड़ मामलों में अस्पताल में भर्ती को स्वीकृति दी गई।
देश भर में 95.99 करोड़ आभा डिजिटल स्वास्थ्य खाते तैयार
स्वास्थ्य क्षेत्र के डिजिटल ढांचे का विवरण देते हुए सरकार ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक पूरे देश में 95.99 करोड़ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते यानी आभा बनाए जा चुके हैं। इनमें से अकेले गुजरात राज्य में 5.25 करोड़ खाते खोले गए हैं। यह 14 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या है जो नागरिकों को अपने चिकित्सीय रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से प्रबंधित करने की डिजिटल सुविधा देती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आभा खातों का विवरण संसदीय क्षेत्रवार दर्ज नहीं किया जाता है और केंद्र द्वारा राज्यों को वित्तीय सहायता उनकी मांग एवं उपयोग प्रमाण पत्रों के आधार पर जारी की जाती है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को क्या मुख्य लाभ मिलेगा?
उत्तर: इस विधेयक से एमएसएमई के वर्गीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, भुगतान में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी और व्यापारिक विवादों के निपटारे के लिए 90 दिनों की समयबद्ध मध्यस्थता प्रणाली लागू होगी।
प्रश्न 2: टी-रीडीएस (TReDS) व्यवस्था क्या है और इसे किसके लिए अनिवार्य किया गया है?
उत्तर: टी-रीडीएस एक डिजिटल भुगतान मंच है। नए कानून के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं का भुगतान इस प्रणाली के माध्यम से करना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रश्न 3: आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने क्या बड़ी कार्रवाई की है?
उत्तर: योजना में अनियमितताएं और फर्जीवाड़े के आरोप में 2,359 अस्पतालों को पैनल से पूरी तरह बाहर (ब्लैकलिस्ट) कर दिया गया है तथा 1,200 से अधिक अस्पतालों को निलंबित कर दिया गया है।
प्रश्न 4: आयुष्मान भारत में संदिग्ध और फर्जी दावों की पहचान के लिए किस तकनीक का सहारा लिया जा रहा है?
उत्तर: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और मशीन लर्निंग आधारित स्वचालित प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जो दावा जमा होने के 24 घंटे के भीतर गड़बड़ी को पकड़ लेती है।
प्रश्न 5: ‘आभा’ (ABHA) खाता क्या है और अब तक देश में ऐसे कितने खाते बनाए जा चुके हैं?
उत्तर: आभा (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) एक 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है जो नागरिकों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखती है। देश भर में अब तक 95.99 करोड़ से अधिक आभा खाते बनाए जा चुके हैं।
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