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मानसून की आहट से मध्य प्रदेश का बदला मिजाज : कई जिलों में मूसलाधार बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि का दौर शुरू

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एजेंसी, भोपाल। MP Weather Update : मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही संपूर्ण प्रांतीय मौसम के मिजाज में एक बड़ा और व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। मानसून के कदम आगे बढ़ने की वजह से सूबे के एक बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश, कड़कड़ाती बिजली, ओलावृष्टि और तेज विनाशकारी हवाओं का दौर शुरू हो गया है। इस अचानक आए मौसमीय बदलाव के कारण पिछले कई हफ्तों से भीषण गर्मी और चिलचिलाती लू की मार झेल रहे आम नागरिकों को तापमान में आई भारी गिरावट से बेहद सुकून मिला है। हालांकि, दूसरी तरफ इस तेज आंधी-तूफान के कारण खड़ी फसलों, ग्रामीण अंचलों और शहरी बुनियादी ढांचे को बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचने की गंभीर आशंका भी काफी ज्यादा बढ़ गई है।

आईएमडी का कई जिलों के लिए मौसम की गंभीर चेतावनी और अलर्ट जारी

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के राष्ट्रीय केंद्र ने आने वाले दिनों के लिए सूबे के कई प्रमुख जिलों में बहुत भारी बारिश और तेज अंधड़ का आधिकारिक अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के मुताबिक 30 और 31 मई को मंदसौर और नीमच जिलों के कुछ खास इलाकों में मूसलाधार वर्षा के साथ भीषण आकाशीय बिजली गिरने, ओले पड़ने और लगभग 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से हवाएं चलने की बेहद प्रबल संभावना है। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर, दतिया, भिंड, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी मौसमी गतिविधियों के अत्यंत तीव्र और आक्रामक बने रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, अगले चरण में 31 मई से लेकर 3 जून के दरमियान राजगढ़, आगर मालवा, शहडोल, सीहोर, देवास, इंदौर, उज्जैन और झाबुआ सहित राज्य के कई अन्य अंचलों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं का यह सिलसिला लगातार जारी रहने की बात कही गई है।

भिंड के गोरमी में रिकॉर्ड 72 मिमी बारिश, अशोकनगर में 70 किमी की रफ्तार से चली आंधी

प्रांतीय राजधानी भोपाल में स्थित मुख्य मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 30 मई की सुबह 8:30 बजे तक समाप्त हुए पिछले 24 घंटों में भिंड जिले के गोरमी क्षेत्र में सबसे अधिक 72 मिमी की रिकॉर्ड तोड़ मानसूनी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर नजर डालें तो नरवर में 44 मिमी, नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा में 38 मिमी, बेराड़ में 31 मिमी तथा शुजालपुर और मोहनगढ़ में 29-29 मिमी तक पानी बरसा है। वहीं बालदेवगढ़ में 27 मिमी और निवाड़ी में 25 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि बाकी अन्य कस्बों में 15 से 22 मिमी के बीच मध्यम वर्षा दर्ज की गई है। इस बारिश के साथ-साथ राज्य में चक्रवाती हवाओं ने भी अपना भारी रौद्र रूप दिखाया है। आंकड़ों के मुताबिक अशोकनगर जिले में हवा की अधिकतम रफ्तार सबसे ज्यादा 70 किलोमीटर प्रति घंटा मापी गई, जबकि ऐतिहासिक शहर ग्वालियर और शिवपुरी में 67 किलोमीटर प्रति घंटा तथा सीहोर में 59 किलोमीटर प्रति घंटे की विनाशकारी गति से अंधड़ चला है।

कई संभागों में बड़े पैमाने पर ओलावृष्टि और वज्रपात की घटनाएं

मौसम विभाग की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक शिवपुरी, मुरैना, सागर और श्योपुर जैसे बड़े जिलों के कई ग्रामीण इलाकों से भारी ओलावृष्टि होने की बड़ी खबरें सामने आई हैं, जिससे खेतों में लगी फसलों को काफी क्षति पहुँची है। इसके साथ ही चंबल, ग्वालियर, सागर, उज्जैन, रीवा और शहडोल संभागों के विस्तृत भू-भागों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की कई डरावनी घटनाएं भी प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज की गई हैं। इस दौरान मालवा और निमाड़ अंचल के झाबुआ, धार, इंदौर और देवास सहित महाकौशल के कटनी और डिंडौरी जिलों में भी मानसूनी सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय और असरदार बना रहा।

पश्चिमी विक्षोभ और पाकिस्तान-राजस्थान ट्रफ लाइन से मानसूनी सिस्टम हुआ मजबूत

मौसम विशेषज्ञों के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, आगामी 4 से 5 दिनों के दौरान मानसून के अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के बाकी बचे हुए समुद्री हिस्सों में बहुत तेजी से आगे बढ़ने के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल और मददगार बनी हुई हैं। वर्तमान में उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपरी वायुमंडल में एक बेहद ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह सक्रिय है। इसके साथ ही पड़ोसी देश पाकिस्तान से शुरू होकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजर रही एक गहरी कम दबाव की द्रोणिका (ट्रफ लाइन) इस पूरे मौसमी तंत्र को और अधिक ऊर्जा प्रदान कर रही है, जिसके चलते राज्य में प्री-मानसून और मानसून की यह संयुक्त हलचल इतनी ज्यादा आक्रामक बनी हुई है।

आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन, किसानों को विशेष सलाह

मौसम के इस बदले और खतरनाक मिजाज को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने सभी नागरिकों से अत्यधिक सतर्कता और सावधानी बरतने की विशेष अपील की है। सरकारी गाइडलाइन में आम जनता को आंधी-तूफान और खराब मौसम के दौरान किसी भी प्रकार की अनावश्यक लंबी यात्राओं से पूरी तरह बचने, बिजली के खंभों या पेड़ों के नीचे शरण न लेने, घरों की ढीली वस्तुओं और टिनशेड को सुरक्षित बांधकर रखने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही अपने पालतू पशुओं और खेतों में कटी या खड़ी फसलों को ओलावृष्टि व तेज हवाओं के थपेड़ों से बचाने के उपाय करने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से किसानों से कहा है कि वे खेतों में काम करते समय मौसम पर नजर रखें और बिजली चमकने या कड़कने के दौरान किसी भी हाल में खुले मैदानों, तालाबों के किनारे या बड़े पेड़ों के नीचे बिल्कुल न जाएं।

गर्मी और लू से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद, कृषि कार्यों में आएगी तेजी

प्रांतीय मौसम विज्ञानियों का सर्वसम्मत मानना है कि मानसून के आगमन के साथ शुरू हुई यह शुरुआती दौर की व्यापक सक्रियता प्रदेश के बड़े हिस्से को भीषण लू (हीटवेव) के प्रकोप से पूरी तरह और स्थायी रूप से मुक्ति दिला देगी। तापमान के सामान्य स्तर पर बने रहने से आम जनजीवन तो पटरी पर लौटेगा ही, साथ ही यह शुरुआती मानसूनी बारिश आगामी खरीफ सीजन की कृषि गतिविधियों और खेतों की जुताई-बुवाई के कार्यों के लिए भी बेहद लाभकारी और अमृत समान साबित हो सकती है। हालांकि, मौसम विभाग की तकनीकी टीमें पल-पल बदलते इन जमीनी हालातों और बादलों की आवाजाही पर सेटेलाइट के माध्यम से लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते किसी भी आपदा की सटीक चेतावनी जारी की जा सके।

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