एजेंसी, भोपाल। MP Health Strike : मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत करीब 32 हजार संविदा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सरकार से नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। इसी नाराजगी के चलते कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और ऑनलाइन स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
25 मई से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन
कर्मचारियों ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 25 मई से होगी। 25 से 27 मई तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 28 और 29 मई को जिलों में कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। आंदोलन के अगले चरण में सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को भी अपनी समस्याओं से अवगत कराया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को कई बार उनकी मांगों की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
2 जून से काम का बहिष्कार
संविदा कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो 2 जून से ऑनलाइन और ऑफलाइन सभी कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा काम, डाटा एंट्री, निगरानी व्यवस्था और कई प्रशासनिक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। आंदोलन के अंतिम चरण में 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की भी घोषणा की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं को संभाल रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य और सुविधाओं को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। टीकाकरण कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों की स्वास्थ्य सेवाएं और कई सरकारी योजनाओं का संचालन बाधित होने की आशंका है। इसके अलावा अस्पतालों में मरीजों की पंजीयन प्रक्रिया, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और अन्य तकनीकी कार्यों में भी दिक्कतें आ सकती हैं। कई जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
संविदा कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण प्रमुख है। इसके अलावा न्यू पेंशन योजना और स्वास्थ्य बीमा लागू करने की मांग भी की गई है। कर्मचारी हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता और समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग कर रहे हैं। साथ ही वेतन विसंगतियों को दूर करने और नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियों की सुविधा देने की भी मांग की गई है।
पहले भी मिल चुका आश्वासन
कर्मचारियों का कहना है कि इससे पहले सरकार की ओर से उनकी कई मांगों पर सहमति जताई गई थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण कर्मचारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि समय रहते बातचीत कर समाधान निकाला जाए, ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


