एजेंसी, भोपाल। MP Budget Decisions : मध्यप्रदेश की उन्नति और ग्रामीण विकास को एक नई रफ्तार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय भवन के भीतर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रदेश सरकार ने जनकल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुल मिलाकर लगभग पांच हजार नौ सौ साठ करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट और ऐतिहासिक विकास कार्यों को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों के अंतर्गत राज्य की गरीब बेटियों की शादी के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को अगले पांच वर्षों के लिए निरंतर जारी रखने और राज्य के सैकड़ों सरकारी माध्यमिक व हाई स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधार कर उन्हें उच्च स्तर पर अपग्रेड करने का एक बहुत ही शानदार और दूरगामी फैसला लिया गया है। इस सांगठनिक और प्रशासनिक बैठक के बाद से ही पूरे प्रदेश के भीतर विकास की एक नई बयार बहने की उम्मीद जताई जा रही है।
आज कैबिनेट बैठक में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत अन्नदाताओं को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण के मामले में बड़ी राहत प्रदान की गई।
साथ ही राज्य के सर्वांगीण विकास एवं जनहितैषी कार्यों को गति देने के लिए ₹5,960 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां भी प्रदान की गईं।#CabinetMP pic.twitter.com/B1GnhPAS2Y
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 23, 2026
गरीब और बेसहारा बेटियों की शादी के लिए सत्रह सौ करोड़ से अधिक के भारी बजट को मिली प्रशासनिक मंजूरी
मोहन कैबिनेट ने राज्य की महिलाओं और कमजोर वर्ग के सामाजिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को आगामी एक अप्रैल दो हजार छब्बीस से लेकर अगले पांच सालों तक लगातार सुचारू रूप से संचालित करने के लिए एक हजार सात सौ चालीस करोड़ सत्तावन लाख रुपए की एक बहुत बड़ी और रिकॉर्ड राशि को अपनी वित्तीय मंजूरी प्रदान की है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के भीतर यह अत्यंत लोकप्रिय और कल्याणकारी योजना एक अप्रैल दो हजार छह से लगातार लागू है, जिसका पूरा क्रियान्वयन राज्य सरकार के माध्यम से सीधे किया जाता है। इस बेहतरीन योजना के तहत गरीब, जरूरतमंद, बेसहारा और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य बेटियों, विधवा महिलाओं और परित्यक्ताओं के सामूहिक विवाह के सुंदर आयोजनों के लिए प्रति कन्या के मान से पचपन हजार रुपए की बड़ी आर्थिक मदद सीधे प्रदान की जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्तीय वर्ष दो हजार इक्कीस-बाईस से लेकर दो हजार पच्चीस-छब्बीस तक इस योजना के माध्यम से राज्य की एक लाख बहत्तर हजार नौ सौ पांच गरीब बेटियों की शादियां सफलतापूर्वक संपन्न कराई जा चुकी हैं, जिस पर शासन की तरफ से नौ सौ नवासी करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि बांटी गई है। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ग्रामीण इलाकों में शादियों की वैधानिक और कानूनी आयु को पूरी तरह से सुनिश्चित कर महिलाओं को सशक्त बनाती है।
अगले तीन सालों में छह सौ पैंतीस करोड़ की लागत से बदलेगी सरकारी स्कूलों की सूरत, ड्रॉप आउट दर को रोकने का बड़ा लक्ष्य
शिक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कैबिनेट ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुंच और पढ़ाई की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शासकीय माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल में और पुराने हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूलों में अपग्रेड करने की योजना को अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। तय की गई आधिकारिक समय सीमा के अनुसार, वर्तमान शैक्षणिक सत्र दो हजार छब्बीस-सत्ताईस के भीतर पहले चरण में पचहत्तर माध्यमिक स्कूलों और सौ हाई स्कूलों का उन्नयन किया जाएगा। इसके बाद आगामी दो वर्षों यानी दो हजार सत्ताईस-अठाईस और दो हजार अठाईस-उनतीस के दौरान भी इसी रफ्तार से प्रतिवर्ष पचहत्तर माध्यमिक और सौ हाई स्कूलों को उच्च स्तर पर प्रमोट किया जाएगा। सरकार ने इस पूरी योजना के लिए कुल छह सौ पैंतीस करोड़ चौबीस लाख रुपए की बड़ी धनराशि को अपनी मंजूरी दी है। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के बड़े विजन के तहत साल दो हजार उनतीस तक राज्य के भीतर शत-प्रतिशत यानी सौ फीसदी सकल नामांकन दर प्राप्त करने का एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।
गति शक्ति पोर्टल और यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर जिला स्तर पर की जाएगी नए स्कूलों की मैपिंग
सरकारी आंकड़ों और तय मापदंडों के आधार पर जिला स्तर से की गई प्राथमिक मैपिंग के अनुसार, राज्य में वर्तमान में तीन सौ पंद्रह नए हाई स्कूल और दो सौ चौदह नए हायर सेकेंडरी स्कूल खोले जाने की अत्यंत सख्त आवश्यकता है। सरकार ने अपनी नीति में यह स्पष्ट किया है कि राज्य के मुख्य सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट यानी प्रभाव क्षेत्र के भीतर आने वाले किसी भी अन्य विद्यालय का उन्नयन कतई नहीं किया जाएगा। सांदीपनि विद्यालय के क्षेत्र में आने वाले सभी विद्यार्थियों का प्रवेश मुख्य सांदीपनि स्कूल में होने पर उस छोटे विद्यालय के समस्त स्टाफ और संसाधनों को युक्तियुक्तकरण नीति के तहत अन्य आवश्यकता वाले पिछड़े स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। ये सभी उन्नत होने वाले विद्यालय अपने वर्तमान सरकारी भवनों में ही संचालित किए जाएंगे और भविष्य में बजट की उपलब्धता के अनुसार वहां अतिरिक्त कंक्रीट के कक्ष मंजूर किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का सटीक आंकलन करने के लिए सरकार गति शक्ति पोर्टल, क्षेत्रीय जनसंख्या और यू-डाइस के डिजिटल आंकड़ों का सहारा लेगी।
दूरी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को वापस स्कूल लाने के लिए बनाया गया मुख्य मास्टर प्लान
राज्य शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश राज्य में हाई स्कूल स्तर पर सकल नामांकन दर यानी जीईआर वर्तमान में पचहत्तर प्रतिशत है, जबकि हायर सेकेंडरी स्तर पर यह आंकड़ा गिरकर महज पचपन प्रतिशत ही रह जाता है। इसी प्रकार कक्षा आठवीं से नौवीं में जाने वाले बच्चों की दर सतहत्तर प्रतिशत और कक्षा दसवीं से ग्यारहवीं में जाने वाली कक्षांतरण दर अड़सठ प्रतिशत ही है। इसका सबसे बड़ा और मुख्य कारण यह है कि ग्रामीण अंचलों में उच्च विद्यालयों की दूरी अपने घरों से काफी अधिक होती है, जिसके चलते विशेषकर छात्राएं या तो प्रवेश ही नहीं लेती हैं या फिर दूरी के कारण वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाती हैं, जिससे राज्य में ड्रॉप आउट की दर लगातार बढ़ती जा रही है। इसी गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए विद्यार्थियों के घर की पहुंच के भीतर ही उच्च विद्यालयों को उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन दर और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करना ही इस नए सरकारी निर्णय का मुख्य मूल लक्ष्य रखा गया है।
अन्नदाताओं के लिए बड़ी राहत: अब रबी और खरीफ के अलग-अलग झंझट से मुक्ति, मिलेगी वार्षिक एकल ऋण सीमा
किसानों और खेती-किसानी को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए कैबिनेट ने वर्ष दो हजार छब्बीस-सत्ताईस के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को मिलने वाले अल्पावधि फसल ऋण की शर्तों में एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। नई शर्तों के अनुसार, अब किसानों के लिए खरीफ और रबी के सीजन के हिसाब से अलग-अलग देय तिथि यानी ड्यू डेट रखने की पुरानी और जटिल व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब किसानों को एक वर्ष के लिए ‘वार्षिक एकल ऋण सीमा’ की बड़ी सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसके भीतर नकद और वस्तु ऋण की एक उप-सीमा भी तय रहेगी। इस योजना के अंतर्गत देय तिथि की गणना किसानों द्वारा अपनी स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से पहली बार पैसे निकालने यानी प्रथम ऋण आहरण की तारीख से पूरे बारह महीने के लिए निर्धारित की जाएगी। इसके साथ ही अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले हमारे मेहनती किसानों को सवा एक प्रतिशत का सामान्य ब्याज अनुदान और समय पर कर्ज चुकाने वाले ईमानदार किसानों को राज्य शासन द्वारा चार प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन ब्याज अनुदान भी मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसानों पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
साल दो हजार बारह-तेरह से निरंतर चल रही है शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देने की यह लोकप्रिय योजना
मध्यप्रदेश के भीतर जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों से जुड़ी बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिए जाने की यह महत्वाकांक्षी योजना साल दो हजार बारह-तेरह से लगातार बिना किसी रुकावट के लागू है। इस सरकारी योजना के तहत खरीफ और रबी सीजन की निर्धारित ड्यू डेट तक अपने कर्ज की ईमानदारी से अदायगी करने वाले किसानों से तीन लाख रुपए तक के अल्पावधि लोन पर बैंक द्वारा कोई भी ब्याज नहीं वसूला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में राज्य शासन द्वारा हर साल एक बेस रेट के साथ-साथ ड्यू डेट का निर्धारण किया जाता है, और उस तय बेस रेट में से केंद्र की भारत सरकार से मिलने वाली ब्याज सहायता को माइनस यानी कम करते हुए बाकी की बची हुई पूरी राशि राज्य सरकार खुद अपने खजाने से ब्याज अनुदान के रूप में बैंकों को चुकाती है, जिसके कारण प्रदेश के भोले-भाले किसानों को बिना किसी अतिरिक्त ब्याज के शून्य प्रतिशत पर खेती के लिए आसानी से पैसा मिल जाता है।
शुजालपुर में खुलेगा नया सर्वसुविधायुक्त शासकीय विधि महाविद्यालय, सत्र दो हजार छब्बीस-सत्ताईस से शुरू होगी पढ़ाई
मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में की गई एक मुख्य घोषणा का अक्षरशः अनुपालन करते हुए कैबिनेट ने आगामी सत्र दो हजार छब्बीस-सत्ताईस से शाजापुर जिले के शुजालपुर शहर में एक नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय यानी सरकारी लॉ कॉलेज प्रारंभ करने के प्रस्ताव को अपनी अंतिम प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस नए कॉलेज को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शैक्षणिक वर्ग के नौ महत्वपूर्ण पद और अशैक्षणिक यानी प्रशासनिक वर्ग के आठ पद, इस प्रकार कुल सत्रह नए पदों के सृजन और इसके लिए आवश्यक व्यय राशि दो करोड़ उनतालीस लाख बानवे हजार रुपए के बजट को भी पूरी तरह से स्वीकृत कर दिया गया है। इसके साथ ही आगे की त्वरित कानूनी कार्यवाही करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को पूरी तरह से अधिकृत किया गया है। वर्तमान समय में शुजालपुर के जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भीतर ही एलएलबी तीन वर्षीय लॉ कोर्स एक छोटे संकाय के रूप में चलाया जा रहा था, परंतु बार काउंसिल ऑफ इंडिया के साल दो हजार आठ के ‘लीगल एजुकेशन रूल्स’ के कड़े मानकों के अनुसार मान्यता बनाए रखने के लिए विधि पाठ्यक्रमों को किसी सामान्य कॉलेज के संकाय के स्थान पर एक पूरी तरह से पृथक और स्वतंत्र शासकीय विधि महाविद्यालय के रूप में संचालित किया जाना बेहद अनिवार्य है, और इसी विधिक नियम को पूरा करने के लिए शुजालपुर में इस नए पृथक लॉ कॉलेज की स्थापना की जा रही है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न आपूर्ति के लिए पैंतीस सौ करोड़ से अधिक की भारी राशि मंजूर
गरीबों के हक और राशन व्यवस्था को और ज्यादा पारदर्शी व मजबूत बनाने के लिए कैबिनेट ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और परियोजनाओं के परीक्षण के अंतर्गत एक बहुत बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। सरकार ने पांच सौ करोड़ रुपए से अधिक की बड़ी लागत वाली लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अनाज के परिवहन और राशन दुकानदारों के कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए सोलहवें केंद्रीय वित्त आयोग की पूरी अवधि यानी एक अप्रैल दो हजार छब्बीस से लेकर इकतीस मार्च दो हजार इकतीस तक इसके निरंतर और सफल संचालन के लिए कुल तीन हजार पांच सौ अस्सी करोड़ सात लाख रुपए के विशाल बजट को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कैबिनेट ने देश के प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान यानी पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों में किए जा रहे विद्युतीकरण और बिजली पहुंचाने के कार्यों के लिए भारत सरकार द्वारा दिए गए केंद्रांश पर देय एसजीएसटी की पूरी राशि को राज्य सरकार की तरफ से बिजली वितरण कंपनियों को अंश पूंजी यानी इक्विटी के रूप में उपलब्ध करवाए जाने का एक बेहद ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, ताकि प्रदेश का कोई भी आदिवासी इलाका अंधेरे में न रहे।
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