Zuckerberg

मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक पर मांगी माफी : फेसबुक से प्रधानमंत्री का वीडियो हटने पर संसदीय समिति ने दिया 3 दिन का अल्टीमेटम

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Zuckerberg Deepfake Apology : देश के प्रधानमंत्री का एक महत्वपूर्ण संदेश फेसबुक से हटाए जाने के प्रकरण पर केंद्र सरकार और मेटा के बीच विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक सामग्री, बाल यौन शोषण सामग्री और प्लेटफॉर्म संचालन से जुड़ी कमियों को लेकर अफसोस जताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है, वहीं दूसरी तरफ संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री का वीडियो हटने के मामले को अत्यंत गंभीर माना है। समिति ने कंपनी प्रमुख को इस विशेष विषय में अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करने और तीन दिनों के भीतर बिना शर्त क्षमा याचना करने का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मंच को प्राप्त कानूनी सुरक्षा यानी सेफ हार्बर छूट वापस लेने की सिफारिश की जाएगी।

तकनीकी खराबी का तर्क और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की आपत्ति

इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब प्रधानमंत्री द्वारा परीक्षा सुधारों और प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई से जुड़ा भाषण वाला संदेश फेसबुक से करीब 5 से 6 घंटे के लिए गायब हो गया था। मेटा के प्रतिनिधियों ने इस घटना को स्वचालित सामग्री प्रबंधन तंत्र की तकनीकी समस्या बताते हुए खेद प्रकट किया और वीडियो को पुनः बहाल कर दिया। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी द्वारा दी गई इस सफाई को अपर्याप्त करार दिया है। संसदीय समिति का मानना है कि यदि देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक संदेश के साथ ऐसी तकनीकी चूक हो सकती है, तो आम उपयोगकर्ताओं की सामग्री की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

डिजिटल मंचों की जवाबदेही और कानूनी सुरक्षा खोने का खतरा

भारतीय कानून के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को एक मध्यस्थ के रूप में कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है, जिससे उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कंपनी सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं होती। परंतु इस सुरक्षा अधिकार को बनाए रखने के लिए प्लेटफॉर्मों को नियमन और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होता है। संसदीय समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी इस मामले में संतोषजनक कदम नहीं उठाती, तो उसकी मध्यस्थ स्थिति समाप्त कर उस पर सीधे कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

आपत्तिजनक सामग्री, बाल यौन शोषण और डिजिटल धोखाधड़ी पर कड़ी निगरानी

समीक्षा बैठक के दौरान केवल प्रधानमंत्री के वीडियो का विषय ही नहीं उठा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर मौजूद बाल यौन शोषण सामग्री, डीपफेक विज्ञापनों और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इसके अतिरिक्त, फर्जी निवेश ऐप्स के माध्यम से भारतीय नागरिकों से हुई लगभग 48 लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामले में भी अन्य प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।

वैश्विक प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता और भावी कदम

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मेटा की वैश्विक टीम के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के साथ नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की। लगभग 45 मिनट तक चली इस वार्ता में महत्वपूर्ण सामग्री हटाने की प्रक्रिया, सत्यापित खातों की सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी तथा भारतीय कानूनों के अनुपालन पर चर्चा हुई। वर्तमान में केंद्र सरकार और संसदीय समिति स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मेटा प्रमुख संसदीय समिति के निर्देशों पर क्या अगला कदम उठाते हैं।

इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :

प्रश्न 1: मार्क जुकरबर्ग ने किन प्रमुख विषयों को लेकर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया है?

उत्तर: मार्क जुकरबर्ग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), एआई जनित डीपफेक विज्ञापनों और कंटेंट मॉडरेशन के संचालन से जुड़ी कमियों को लेकर अफसोस जताते हुए क्षमा मांगी।

प्रश्न 2: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कौन सा वीडियो फेसबुक से हटाया गया था और कंपनी ने इस पर क्या तर्क दिया?

उत्तर: परीक्षा सुधारों और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़े कानूनों से संबंधित प्रधानमंत्री के भाषण का वीडियो करीब 5 से 6 घंटे के लिए फेसबुक से हट गया था। मेटा ने इसे अपने स्वचालित सिस्टम की तकनीकी खराबी बताया था।

प्रश्न 3: संसदीय समिति ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को तीन दिनों का अल्टीमेटम क्यों दिया है?

उत्तर: संसद की सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक वीडियो को हटाए जाने को बेहद गंभीर माना और मेटा प्रमुख से इस लापरवाही पर तीन दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित क्षमा याचना करने को कहा है।

प्रश्न 4: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा क्या है?

उत्तर: सेफ हार्बर प्रावधान के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को एक मध्यस्थ माना जाता है, जिससे यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कंपनी सीधे उत्तरदायी नहीं होती। यदि यह छूट खत्म होती है तो कंपनी पर सीधे कानूनी मामले दर्ज हो सकते हैं।

प्रश्न 5: संसदीय समिति ने डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर साइबर धोखाधड़ी को लेकर क्या कड़ा रुख अपनाया है?

उत्तर: संसदीय समिति ने फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए नागरिकों से हुई लाखों रुपये की साइबर धोखाधड़ी और आपत्तिजनक विज्ञापनों पर नियंत्रण न लगा पाने के कारण टेक कंपनियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की सिफारिश की है।

ये भी पढ़े : मेटा को भारत सरकार का कड़ा संदेश : चाइल्ड अब्यूज कंटेंट पर ढिलाई और पीएम मोदी के वीडियो पर गलत एक्शन को लेकर ग्लोबल टीम तलब

ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें

Leave a Reply