एजेंसी, कोलकाता। Mamata Banerjee FIR : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी की राजनैतिक और कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो के खिलाफ देश की राजधानी से दूर कोलकाता के मध्य संभाग के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध हेयर स्ट्रीट पुलिस थाने में एक नई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने साल दो हजार छब्बीस के चुनाव प्रचार के दौरान एक सार्वजनिक मंच से बेहद आपत्तिजनक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील भाषण दिया था, जिससे समाज में अशांति फैलने की आशंका थी। एक स्थानीय व्यवसायी की शिकायत को कानूनी जांच के बाद अब पूर्ण आपराधिक मुकदमे में तब्दील कर दिया गया है। पार्टी के भीतर मचे भीषण आंतरिक विद्रोह और विधायकों-सांसदों के लगातार साथ छोड़ने के बीच टीएमसी प्रमुख के लिए यह घटना एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी के खिलाफ इस साल के शुरू में एक राजनीतिक रैली के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी करने के मामले में शुक्रवार को एक प्राथमिकी दर्ज की गई।#WestBengal | #MamataBanerjee | #TMC | #FIR | #PoliticalRally |… pic.twitter.com/f73AuUVo0k
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) June 12, 2026
चुनावी धरने के मंच से धार्मिक भावनाएं भड़काने का मुख्य आरोप
कोलकाता के स्थानीय निवासी और कारोबारी तुषार कांति दास द्वारा पुलिस प्रशासन में दी गई आधिकारिक तहरीर के मुताबिक, यह पूरा विवाद नौ मार्च साल दो हजार छब्बीस को कोलकाता के प्रसिद्ध एस्प्लेनेड इलाके में मेट्रो चैनल चौकी के ठीक सामने बने एक धर्म मंच से जुड़े कार्यक्रम का है। विधानसभा चुनावों के ठीक पहले ममता बनर्जी ने इस स्थान पर एक बड़ा राजनैतिक विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस धरने के दौरान दिए गए राजनीतिक भाषण में ममता बनर्जी ने जानबूझकर ऐसी सांप्रदायिक और भड़काऊ टिप्पणियां की थीं, जो विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच नफरत की भावना पैदा कर सकती थीं। पुलिस ने इस मामले की प्राथमिक जांच करने के बाद सात जून दो हजार छब्बीस को दोपहर करीब पौने चार बजे औपचारिक रूप से केस दर्ज किया, जिसका पंजीकरण नंबर भी जारी कर दिया गया है।
नए आपराधिक कानून के तहत लगाई गईं कई गंभीर धाराएं
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के नए आपराधिक कानून के तहत ममता बनर्जी पर कई कड़े कानूनी शिकंजे कसे हैं। इस दर्ज की गई नई प्राथमिकी में मुख्य रूप से निम्नलिखित धाराओं को शामिल किया गया है:
धारा 196(1): यह विशेष कानूनी प्रावधान उन अपराधियों पर लागू किया जाता है जो देश के भीतर धर्म, जाति, मूल निवास स्थान या भाषा के आधार पर अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच नफरत, दुर्भावना या दुश्मनी की भावना को बढ़ावा देने का काम करते हैं।
धारा 351(2): यह धारा आपराधिक रूप से डराने-धमकाने के अपराध से जुड़ी हुई है, जिसके तहत किसी व्यक्ति या जनसमूह को भयभीत करने के इरादे से अपशब्दों या धमकियों का सहारा लिया जाता है।
धारा 352: इसके तहत समाज में सार्वजनिक शांति को भंग करने के उद्देश्य से किसी को जानबूझकर उकसाने या गंभीर रूप से चिढ़ाने के कृत्य को दंडनीय अपराध माना गया है।
शिकायत में यह भी साफ कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री का यह भाषण न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था को संकट में डालने वाला था, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश थी।
चुनावी हार के बाद चौतरफा संकट में घिरीं पूर्व मुख्यमंत्री
पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी के राजनैतिक करियर का यह सबसे कठिन दौर माना जा रहा है। एक तरफ जहां पुलिस उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कस रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी अपनी ही पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती जा रही है। बीते महज चार दिनों के भीतर संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा से उनकी पार्टी के चार बेहद कद्दावर सांसदों ने अपना इस्तीफा सौंपकर पार्टी से नाता तोड़ लिया है। इन बड़े नेताओं में सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और बंगाल की मशहूर अभिनेत्री-सांसद कोयल मल्लिक के नाम मुख्य रूप से शामिल हैं। इन इस्तीफों ने ममता बनर्जी की सांगठनिक पकड़ पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
लोकसभा और राज्यसभा में केवल मुट्ठी भर वफादार ही बचे
बात केवल राज्यसभा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की संसद के दोनों सदनों को मिलाकर अब तक कुल उन्नीस बड़े लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की एक संयुक्त सूची सार्वजनिक हो चुकी है, जिन्होंने ममता बनर्जी की तानाशाही नीतियों से तंग आकर आधिकारिक तौर पर बगावत का रास्ता चुन लिया है। कुल अट्ठाईस लोकसभा सांसदों में से बीस सांसदों ने देश के गृह मंत्रालय और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर सदन में अपने लिए बिल्कुल अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग रख दी है। इस भीषण राजनैतिक टूट के बाद अब देश की संसद में ममता बनर्जी के पाले में केवल आठ लोकसभा और नौ राज्यसभा सांसद ही वफादार बचे हैं, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में भी तृणमूल कांग्रेस का कद पूरी तरह से घट गया है।
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