एजेंसी, भोपाल। MP Rajya Sabha Chunav : मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों से इस वक्त की बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा बाजी मारते हुए तीनों ही सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने और उसके बाद चुनाव आयोग द्वारा इस मामले में तुरंत कोई फैसला न लेने के कारण भारतीय जनता पार्टी के सभी प्रत्याशियों की जीत पूरी तरह से तय हो गई थी। गुरुवार को विधानसभा परिसर में नामांकन वापस लेने की तय समय सीमा दोपहर तीन बजे जैसे ही समाप्त हुई, वैसे ही निर्वाचन अधिकारी ने बिना किसी देरी के भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों को बिना किसी मुकाबले के विजयी घोषित कर दिया। दूसरी तरफ, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने चुनाव अधिकारी के इस फैसले को पूरी तरह से भेदभाव और पूर्वाग्रह से ग्रसित बताते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां अब इस पूरे मामले पर शुक्रवार को बेहद अहम सुनवाई होने जा रही है।
मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा प्रत्याशी श्री @tarunchughbjp जी, श्री @rajneesh4n जी एवं श्री @MaheshK23512121 जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
पूर्ण विश्वास है कि आप तीनों राज्यसभा में जनहितों, जनभावनाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्रभावी रूप से… pic.twitter.com/7nlYAfk1pe
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 11, 2026
बीजेपी प्रत्याशियों को मिला जीत का सर्टिफिकेट
गुरुवार को मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर के भीतर बने दफ्तर में रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने चुनावी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के तीनों नव-निर्वाचित उम्मीदवारों को जीत का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंप दिया। बीजेपी की तरफ से उच्च सदन पहुंचने वाले इन नेताओं में रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट शामिल हैं। दरअसल, कांग्रेस पार्टी की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा जांच के दौरान ही निरस्त कर दिया गया था, जिसके बाद चुनावी मैदान में केवल भारतीय जनता पार्टी के ही उम्मीदवार बचे रह गए थे। चुनावी मैदान में कोई भी विपक्षी उम्मीदवार न होने के चलते तकनीकी और कानूनी रूप से इन तीनों ही सीटों पर बीजेपी का निर्विरोध चुना जाना पहले से ही तय माना जा रहा था, जिस पर गुरुवार को आधिकारिक मुहर भी लग गई।
देश की सर्वोच्च अदालत पहुंची कांग्रेस, सुनवाई शुक्रवार तक टली
नामांकन रद्द किए जाने के इस बड़े विवाद को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर की है, जिस पर गुरुवार को अदालत के भीतर तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस पार्टी की तरफ से देश के दिग्गज और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के सामने दलील देते हुए इस मामले की तुरंत सुनवाई करने की गुहार लगाई थी। उनका तर्क था कि नामांकन वापसी के समय को देखते हुए इस विषय पर जितनी जल्दी हो सके फैसला आना बेहद जरूरी है। हालांकि, देश के चुनाव आयोग ने अदालत को सूचित किया कि उसे अभी तक कांग्रेस की इस याचिका की आधिकारिक कॉपी नहीं मिली है, इसलिए उसे इस पर अपना पक्ष रखने के लिए थोड़े समय की आवश्यकता है। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए आगे बढ़ा दिया है।
कांग्रेस ने लगाया पक्षपात का आरोप, नेता प्रतिपक्ष ने साधा निशाना
इस पूरे चुनावी घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस बेहद आक्रामक नजर आ रही है और उसने रिटर्निंग ऑफिसर की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपनी याचिका में कांग्रेस ने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि चुनाव अधिकारी ने पूरी तरह से गैर-कानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण रवैये को अपनाते हुए मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के साथ सरासर अन्याय है। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आयोग पूरी तरह से सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहा है। सिंघार का आरोप है कि अगर चुनाव आयोग वाकई निष्पक्ष होता तो वह समय रहते इस पूरे विवाद का निपटारा कर सकता था। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जरूर न्याय मिलेगा, लेकिन साथ ही उन्होंने न्याय प्रक्रिया में हो रही इस देरी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है।
इस वजह से निरस्त हुआ पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का पर्चा
राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जब बारीकी से जांच यानी स्क्रूटनी की जा रही थी, तब बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के पर्चे पर एक बेहद गंभीर कानूनी आपत्ति दर्ज कराई थी। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में चल रहे एक लंबित आपराधिक मामले की महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाया है। निर्वाचन अधिकारी ने बीजेपी की इस आपत्ति को कानूनी रूप से सही पाया और इसी को आधार बनाते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र पूरी तरह निरस्त कर दिया, जिसने इस पूरे विवाद को जन्म दिया।
कांग्रेस का पलटवार और भविष्य के संभावित समीकरण
बीजेपी के आरोपों का पुरजोर खंडन करते हुए कांग्रेस पार्टी ने दलील दी है कि तेलंगाना की किसी भी अदालत में मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई भी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। पार्टी के वकीलों का कहना है कि अदालत की तरफ से केवल एक सामान्य कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और अभी तक अदालत ने उस पर संज्ञान लेकर कोई आरोप तय नहीं किए हैं। कांग्रेस का तर्क है कि जब तक आरोप तय नहीं हो जाते, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता और हलफनामे में उसका जिक्र करना कतई अनिवार्य नहीं था।
अब इस पूरे मामले का भविष्य पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता है। यदि शुक्रवार को देश की सर्वोच्च अदालत कांग्रेस की दलीलों से सहमत हो जाती है और नामांकन को दोबारा बहाल करने का आदेश देती है, तो यह निर्विरोध निर्वाचन रद्द हो जाएगा और राज्य में फिर से मतदान की नौबत आ जाएगी। इसके विपरीत, यदि अदालत चुनाव अधिकारी के फैसले को सही मानती है, तो बीजेपी की यह निर्विरोध जीत पूरी तरह बरकरार रहेगी। इस बीच, कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस मुद्दे को संवैधानिक स्तर पर उठाने की तैयारी में भी जुटा है।
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