PM Modi G7

जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की कूटनीतिक धमक : ब्रिटेन और यूएई समेत कई वैश्विक नेताओं से की उच्च स्तरीय वार्ता

अंतर्राष्ट्रीय नई दिल्ली फ्रांस राष्ट्रीय

एजेंसी, दिल्ली/एवियन। PM Modi G7 Meeting : फ्रांस के एवियन शहर में चल रहे प्रतिष्ठित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त कूटनीतिक सक्रियता देखने को मिल रही है। इस अंतरराष्ट्रीय महामंच के इतर प्रधानमंत्री ने दुनिया के कई सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें की हैं। इन उच्च स्तरीय मुलाकातों में भारत ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ अलग से विशेष वार्ता की, जो वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद मायने रखती है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है, और इन बैठकों को उसी कड़ी का एक बेहद अहम हिस्सा माना जा रहा है।

जापान, दक्षिण कोरिया और मिस्र के नेताओं के साथ रणनीतिक संवाद

शिखर सम्मेलन की इस कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के कई प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं के साथ भी गहन रणनीतिक चर्चा की। उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची, केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ आमने-सामने बैठकर कई दौर की बातचीत की। इन अलग-अलग बैठकों के दौरान न केवल आपसी देशों के हितों से जुड़े मुद्दों पर बात हुई, बल्कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियों और वैश्विक महत्व के अन्य अहम विषयों पर भी विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों के साथ भारत के रिश्ते आने वाले समय में रक्षा और व्यापारिक मोर्चे पर एक नया अध्याय लिखेंगे।

भारत और ब्रिटेन के बीच विजन 2035 के तहत रिश्तों को नई ऊंचाई

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच हुई यह मुलाकात बेहद गर्मजोशी भरी रही। दोनों नेताओं ने पिछले एक वर्ष के दौरान दोनों देशों के बीच हुई उच्च स्तरीय यात्राओं और उसके बाद से आपसी संबंधों में आई जबरदस्त तेजी की बारीकी से समीक्षा की। इस बैठक के दौरान ‘विजन 2035’ के तहत तय किए गए सभी मुख्य लक्ष्यों पर हुई प्रगति का खुले दिल से स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक समझौते में मुख्य रूप से व्यापार और आर्थिक तरक्की, रक्षा और आंतरिक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय, पर्यावरण के अनुकूल हरित ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक, नए अनुसंधान और शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी जुड़ाव को बढ़ाने जैसे बड़े स्तंभ शामिल हैं। दोनों ही शीर्ष नेताओं ने इस बात पर गहरी उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते को बहुत जल्द पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों को बड़ा फायदा होगा।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर साझा सोच

इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच शिक्षा के क्षेत्र में चल रही मजबूत साझेदारी पर दोनों पक्षों ने गहरा संतोष व्यक्त किया। बैठक में विशेष रूप से इस बात की सराहना की गई कि बेंगलुरु शहर में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल द्वारा अपना नया कैंपस स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इसके साथ ही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के नए शिक्षण कैंपस खोलने को लेकर हाल ही में जो प्रगति हुई है, उसका भी दोनों नेताओं ने प्रमुखता से उल्लेख किया। शिक्षा के अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने पश्चिम एशिया के अशांत हालातों और यूक्रेन में चल रहे लंबे सैन्य संकट सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे घटनाक्रमों पर अपनी चिंताएं साझा कीं। दोनों देशों ने भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में और ज्यादा मजबूत और अटूट बनाने का अपना साझा संकल्प एक बार फिर से दोहराया।

सुरक्षित समुद्री व्यापार के लिए भारत और संयुक्त अरब अमीरात का मजबूत गठबंधन

प्रधानमंत्री मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच इस साल के भीतर हुई यह तीसरी सबसे बड़ी मुलाकात है, जो यह साफ तौर पर दर्शाती है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रणनीतिक रिश्ते कितने मजबूत, गहरे और जीवंत हो चुके हैं। दोनों वैश्विक नेताओं ने इस साल की शुरुआत में जनवरी महीने में यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा और उसके बाद मई महीने में भारतीय प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान लिए गए बड़े फैसलों की समीक्षा की। इस दौरान तकनीक के आदान-प्रदान, आपसी व्यापार की रफ्तार बढ़ाने, भारी-भरकम निवेश को धरातल पर उतारने, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में हुई सकारात्मक प्रगति की सराहना की गई। दोनों नेताओं ने वैश्विक मंच पर एक-दूसरे का साथ देने का भरोसा भी जताया।

होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही और ब्रिक्स सम्मेलन का आमंत्रण

इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी विवाद का हल केवल आपसी संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन से ही संभव है। उन्होंने सभी देशों से एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की। इसके साथ ही दोनों मित्र देशों ने इस बात पर गहरा जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से दुनिया का व्यापार बिना किसी डर, रुकावट और हमले के लगातार सुरक्षित रूप से जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह पूरी दुनिया की आर्थिक सेहत के लिए बेहद जरूरी है। बातचीत के आखिरी पड़ाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को इस साल के अंत में भारत की मेजबानी में होने वाले भव्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए एक औपचारिक और सम्मानजनक आमंत्रण भी दिया।

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