मद्रास हाई कोर्ट

करूर भगदड़ पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने का फैसला रद्द : मद्रास हाई कोर्ट ने समान अवसर के अधिकार का दिया हवाला

तमिलनाडु देश/प्रदेश

एजेंसी, चेन्नई। Karur Stampede Govt Job Cancelled : तमिलनाडु में करूर भगदड़ के पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत हादसे में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता तथा सरकारी रोजगार में समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप नहीं हैं।

हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को क्यों किया रद्द

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने कहा कि किसी दुखद घटना के प्रति संवेदना व्यक्त करना अलग बात है, लेकिन संवेदनशीलता के आधार पर सरकारी नियुक्ति के स्थापित नियमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरियों में नियुक्ति के लिए समान अवसर का सिद्धांत लागू होता है और किसी विशेष घटना के आधार पर नियमों से अलग जाकर नियुक्तियां करना संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि यदि एक विशेष मामले में इस तरह की छूट को स्वीकार कर लिया गया तो भविष्य में दूसरी घटनाओं में भी पीड़ित परिवार सरकारी नौकरी की मांग कर सकते हैं। इससे सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया में समानता और निष्पक्षता का सिद्धांत प्रभावित हो सकता है।

अनुच्छेद 14 और 16 का दिया हवाला

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लेख किया। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण की बात करता है, जबकि अनुच्छेद 16 सरकारी रोजगार के मामलों में सभी पात्र नागरिकों को समान अवसर उपलब्ध कराने से संबंधित है। अदालत के अनुसार, सरकारी नौकरी देने के लिए किसी विशेष घटना के पीड़ित परिवारों के लिए अलग व्यवस्था करना समानता के इन संवैधानिक सिद्धांतों से टकरा सकता है। पीठ ने कहा कि सरकारी नियुक्तियों में नियमों का पालन करना जरूरी है और किसी भी परिस्थिति में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

करूर भगदड़ में गई थी 41 लोगों की जान

यह मामला 27 सितंबर 2025 को करूर में हुई भयावह भगदड़ से जुड़ा है। यह हादसा टीवीके के संस्थापक विजय की चुनावी रैली के दौरान हुआ था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे और अचानक भगदड़ मचने के कारण 41 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे में करीब 100 लोग घायल भी हुए थे। घटना के बाद मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक और अन्य राहत उपायों के साथ सरकारी नौकरी देने का फैसला भी सामने आया था। राज्य सरकार के इसी निर्णय को अब मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने रद्द कर दिया है।

रैली में क्षमता से ज्यादा भीड़ जुटने का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, विजय की चुनावी रैली में आयोजन स्थल की क्षमता की तुलना में काफी अधिक संख्या में लोग पहुंच गए थे। विजय की लोकप्रियता के कारण बड़ी संख्या में समर्थक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। बताया गया कि नामक्कल से करूर तक विजय के काफिले के पीछे 5,000 से अधिक लोग अपने वाहनों से पहुंचे थे। पुलिस की ओर से भीड़ और यातायात को लेकर सलाह दिए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल की ओर पहुंचते रहे।

सुबह से विजय का इंतजार कर रही थी भीड़

कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होना था, लेकिन विजय शाम करीब 7 बजे आयोजन स्थल पर पहुंचे। बड़ी संख्या में लोग सुबह करीब 9 बजे से ही उनका इंतजार कर रहे थे। लंबे समय तक गर्मी, भूख, प्यास और थकान के बीच खड़े रहने के कारण कई लोगों के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आई थी। विजय के पहुंचने के बाद समर्थकों में उन्हें करीब से देखने और उनके पास पहुंचने की होड़ बढ़ गई। कुछ लोग उन्हें देखने, छूने या करीब आने के लिए आगे बढ़ने लगे। शुरुआती स्थिति को संभालने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में भीड़ का दबाव बढ़ता चला गया।

विजय के लौटते समय बिगड़े हालात

बताया गया कि जब विजय कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बस से वापस जाने लगे तो भीड़ का एक हिस्सा उनके पीछे बढ़ने लगा। स्थिति ऐसी हो गई कि कई लोग पेड़ों, दीवारों, छतों और ट्रांसफार्मर तक पर चढ़ गए। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ स्थानों पर बिजली की आपूर्ति भी बंद करनी पड़ी। आयोजन स्थल के आसपास मौजूद जेनरेटर शेड और टीवी प्रसारण वाहन के पास अपेक्षाकृत संकरी जगह में भीड़ का दबाव बढ़ने के बाद कई लोग फंस गए। इसी दौरान भगदड़ की स्थिति गंभीर हो गई और लोगों के गिरने तथा एक-दूसरे के ऊपर दबने के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए। हादसे में 41 लोगों की जान चली गई, जबकि करीब 100 लोग घायल हुए।

नौकरी के बजाय अब राहत के दूसरे विकल्पों पर नजर

हाई कोर्ट के फैसले के बाद करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की राज्य सरकार की व्यवस्था लागू नहीं हो सकेगी। अदालत ने अपने आदेश में सरकारी नियुक्तियों में समानता और संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिक आधार माना है। करूर हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए सरकार की ओर से किए गए अन्य राहत उपायों और सहायता योजनाओं पर अब ध्यान रहेगा। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि गंभीर हादसों के पीड़ित परिवारों की मदद करते समय सरकारों को राहत और पुनर्वास के उपायों के साथ संवैधानिक तथा नियुक्ति संबंधी नियमों के बीच किस तरह संतुलन बनाना चाहिए।

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