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मध्यप्रदेश पुलिस को 100 एकड़ जमीन, विधानसभा में उठा था मुद्दा, अब आईजी ने किया निरीक्षण

खंडवा देश/प्रदेश प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

एजेंसी, खंडवा। प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी की गतिविधियों और सांप्रदायिक माहौल के कारण संवेदनशील माने जाने वाले खंडवा जिले में पुलिस बटालियन की स्थापना को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। विधानसभा में यह मामला उठने के बाद बुधवार को इंदौर रेंज के आइजी अनुराग ने सुरगांव नेपानी पहुंचकर पुलिस विभाग को आवंटित जमीन का निरीक्षण किया। उन्होंने जमीन के नक्शे का अवलोकन करने के साथ-साथ वहां से गुजर रहे हाईवे, कनेक्टिविटी और पानी की उपलब्धता जैसे अहम बिंदुओं पर भी चर्चा की। सुबह करीब 9 बजे आइजी अनुराग, डीआइजी सिद्धार्थ बहुगुणा और एसपी मनोज कुमार राय के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम जमीन का नक्शा लेकर आई थी, जिसके आधार पर सभी अधिकारियों ने साइट का निरीक्षण किया। लगभग आधे घंटे के निरीक्षण के बाद आइजी अपने काफिले के साथ वापस खंडवा लौट आए।

बटालियन निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन
आइजी अनुराग ने बताया कि पुलिस विभाग को काफी समय पहले यह भूमि आवंटित की गई थी। बुरहानपुर के दौरे पर जाते हुए वे यह देखने पहुंचे कि यदि भविष्य में बटालियन की आवश्यकता पड़े तो यह स्थान कितना उपयुक्त रहेगा। उन्होंने कहा कि सामान्यतः समतल जमीन पर 50 से 60 एकड़ भूमि की जरूरत होती है, जबकि यहां 100 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जो इस परियोजना के लिए पर्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खंडवा का संवेदनशील स्वरूप देखते हुए बटालियन की स्थापना का फैसला पुलिस मुख्यालय और शासन स्तर पर ही लिया जाएगा।

100 एकड़ भूमि, पास से गुज़रता हाईवे
पुलिस विभाग को मिली 100 एकड़ की यह जमीन रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसके पास से देशगांव रूची हाईवे गुजरता है। दूसरी ओर सुरगांव नेपानी रोड शहर से सीधे जुड़ा हुआ है। शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित होने के कारण यहां बटालियन के लिए पर्याप्त स्थान, बेहतर कनेक्टिविटी और पानी की उपलब्धता मौजूद है। अधिकारी मानते हैं कि इस इलाके का वातावरण बटालियन निर्माण के लिए उपयुक्त है।

विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
जिला मुख्यालय पर पुलिस बटालियन स्थापित करने की मांग विधानसभा में भी जोरदार तरीके से उठाई गई थी। विधायक कंचन तनवे ने जिले को संवेदनशील बताते हुए इस विषय पर सदन का ध्यान आकर्षित किया था। मंत्री विजय शाह और कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाया, जिसके बाद भोपाल स्तर पर चर्चा शुरू हुई। आइजी का यह दौरा उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

सिमी संगठन की गतिविधियां और स्थानीय खतरे
– 28 नवंबर 2009 को सिमी सदस्यों ने एटीएस जवान सीताराम यादव, अधिवक्ता संजय पाल और बैंक कर्मचारी रविशंकर पारे की हत्या कर दी थी।
– 1 अक्टूबर 2013 को सात सिमी आतंकी जेल से फरार हुए थे, जिनका बाद में तेलंगाना में एनकाउंटर हुआ था।
– 30 जुलाई 2014 को बीमा एजेंट सुशील पुंडगे की हत्या के बाद तनाव बढ़ा।
– 18 मई 2020 को संघ कार्यकर्ता राजेश फुलमाली की हत्या हुई, जिसके बाद शहर में सिलसिलेवार हत्याओं का दौर चला।
– शहर में सिमी का स्लीपर सेल सक्रिय बताया जाता है।
– अब तक आतंकी संगठन से जुड़े होने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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