एजेंसी, नई दिल्ली। Lalit Modi 10.65 Crore Fine : इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के संस्थापक, पूर्व अध्यक्ष और पहले कमिश्नर ललित मोदी 16 साल के लंबे अंतराल के बाद भारत लौटने की योजना बना रहे हैं। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 16 जुलाई को 2009 के दक्षिण अफ्रीका आईपीएल आयोजन से जुड़े विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ललित मोदी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा लगाए गए जुर्माने को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इस बड़ी कानूनी जीत के बाद ललित मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत वापसी की राह अब निष्कंटक हो गई है और वे इस वर्ष के अंत अथवा अगले वर्ष की शुरुआत में स्वदेश लौट सकते हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि अक्टूबर में उनकी बेटी के बच्चे को जन्म देने के उपरांत वे भारत आने की आधिकारिक तैयारी करेंगे।
I am really looking forward to returning to India after a long long time. Stay well and stay safe 🙏🏽 https://t.co/29AaVrxF6V
— Lalit Kumar Modi (@LalitKModi) July 22, 2026
2009 दक्षिण अफ्रीका आईपीएल धन हस्तांतरण और ईडी की कार्रवाई
यह पूरा विवाद वर्ष 2009 में भारत में आयोजित होने वाले सामान्य चुनावों के दौरान सुरक्षा चिंताओं के कारण आईपीएल को दक्षिण अफ्रीका स्थानांतरित करने से जुड़ा हुआ है। उस समय भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने टूर्नामेंट के सुचारु आयोजन के लिए लगभग 243.45 करोड़ रुपये की धनराशि दक्षिण अफ्रीका स्थानांतरित की थी। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप था कि यह वित्तीय लेन-देन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पूर्व स्वीकृति के बिना किया गया था, जो फेमा नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस आधार पर ईडी ने 2011 में कारण बताओ नोटिस जारी किया और वर्ष 2018 में ललित मोदी सहित बीसीसीआई के कुछ पूर्व पदाधिकारियों पर 10.65 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना आयत कर दिया था।
अपीलीय ट्रिब्यूनल का फैसला: व्यक्तिगत जिम्मेदारी और आरबीआई मंजूरी पर रुख
अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में ईडी के मुख्य कानूनी तर्कों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई रकम ‘चालू खाता लेन-देन’ (करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन) की श्रेणी में आती है, न कि ‘पूंजीगत खाता लेन-देन’ (कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन) की श्रेणी में। अतएव इसके लिए रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं था। इसके अतिरिक्त ट्रिब्यूनल ने यह भी स्वीकार किया कि फेमा नियमों के तहत कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ललित मोदी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं थे और न ही उनके पास वे एकाधिकार वित्तीय अधिकार थे, जिनका ईडी ने अपने आरोपों में दावा किया था।
प्रसारण अधिकार विवाद और बीसीसीआई का आजीवन प्रतिबंध
यद्यपि फेमा मामले में राहत मिलने से ललित मोदी के समक्ष मौजूद एक बड़ी कानूनी रुकावट समाप्त हो गई है, परंतु उनके खिलाफ अन्य जांचें अभी भी जारी हैं:
मीडिया और ब्रॉडकास्ट राइट्स प्रकरण: वर्ष 2008 में आईपीएल प्रसारण अधिकार वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप (डब्ल्यूएसजी) को दिए गए थे, जिसने भारत में प्रसारण के अधिकार सोनी को स्थानांतरित किए। 2009 में ललित मोदी ने सोनी के साथ अनुबंध रद्द कर बिना किसी नई निविदा प्रक्रिया के पुनः डब्ल्यूएसजी के साथ करार कर लिया। ईडी का आरोप है कि इस सौदे में डब्ल्यूएसजी को 425 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया और फेमा व धन शोधन निवारण नियमों का उल्लंघन हुआ। इस मामले में एक विशेष अदालत द्वारा उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था और इसमें उन्हें अब तक कोई अंतिम राहत नहीं मिली है।
बीसीसीआई की अनुशासनात्मक कार्रवाई: 2010 में वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद बीसीसीआई ने ललित मोदी को निलंबित कर जांच शुरू की थी। तीन वर्षों तक चली विस्तृत जांच के पश्चात 2013 में बीसीसीआई की अनुशासन समिति ने उन्हें क्रिकेट प्रशासन और सभी संबंधित गतिविधियों से आजीवन के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
लंदन में निवास और व्यावसायिक पृष्ठभूमि
ललित मोदी वर्ष 2010 से यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन के बेहद पॉश और महंगे क्षेत्र बेलग्राविया-चेल्सी इलाके में निवास कर रहे हैं। उनका जन्म दिल्ली के एक प्रतिष्ठित औद्योगिक परिवार में हुआ था और उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 57 करोड़ डॉलर (लगभग 4,555 करोड़ रुपये) है। वे अपने पारिवारिक समूह ‘मोदी एंटरप्राइज’ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं, जिसकी स्थापना उनके दादा गुजर मल मोदी ने 1933 में की थी। यह व्यापारिक समूह फैशन, रसायन, स्वास्थ्य सेवा, खुदरा व्यापार, सैलून, यात्रा, मनोरंजन और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्रों में गॉडफ्रे फिलिप्स, मोदीकेयर, कलरबार और पान विलास जैसे प्रमुख ब्रांडों का संचालन करता है।
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