एजेंसी, लंदन। Keir Starmer Resigns : वैश्विक राजनीति के पटल और ब्रिटेन के सरकारी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत ही सनसनीखेज और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने सोमवार सुबह अपने पद से हटने की औपचारिक घोषणा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। जुलाई 2024 में अपनी पार्टी को ऐतिहासिक और प्रचंड बहुमत दिलाकर सत्ता की कुर्सी पर बैठने वाले स्टॉर्मर मात्र दो साल के भीतर ही चारों तरफ से राजनीतिक संकटों से घिर गए। उन्होंने देश के नाम अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वे केवल तब तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे जब तक कि लेबर पार्टी के नए नेता और देश के अगले प्रधानमंत्री का चयन नहीं हो जाता। ब्रिटिश राजनीति में इस बड़े उलटफेर ने देश की भावी दिशा को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
Britain’s Prime Minister Keir Starmer says he will resign, with a new leader to be in place by the time parliament returns in September, paving the way for Britain to have its seventh leader in 10 years. Live updates here: https://t.co/RQhRo6r4DP pic.twitter.com/kOLkkClIYm
— Reuters (@Reuters) June 22, 2026
डाउनिंग स्ट्रीट से भावुक विदाई, राजा चार्ल्स को फैसले से कराया अवगत
लंदन स्थित प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास ’10 डाउनिंग स्ट्रीट’ के बाहर खड़े होकर एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर बेहद भावुक नजर आए। अपने इस विदाई भाषण के दौरान वे कई बार अपने आंसुओं को रोकते हुए दिखे। उन्होंने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेरी अपनी ही पार्टी के भीतर अब यह गंभीर सवाल उठाया जाने लगा है कि क्या आगामी आम चुनावों में देश का नेतृत्व करने के लिए मैं सबसे सही और उपयुक्त व्यक्ति हूँ। उन्होंने आगे कहा कि मैंने अपनी पार्टी के सांसदों और मंत्रियों की इस आवाज को बहुत ही गहराई से सुना है और मैं उनके इस फैसले को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता हूँ। स्टॉर्मर ने जानकारी दी कि उन्होंने महाराजा चार्ल्स तृतीय से भी दूरभाष पर लंबी बात करके अपने इस फैसले के बारे में पूरी जानकारी साझा की है।
आखिर दो साल में क्यों अर्श से फर्श पर आ गए केअर स्टॉर्मर?
ब्रिटेन की जनता ने केवल दो साल पहले जिस लेबर पार्टी को देश की सत्ता की चाबी सौंपी थी, उसके प्रधानमंत्री को इतनी जल्दी यह कदम क्यों उठाना पड़ा, इसके पीछे कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं। सत्ता संभालने के बाद से ही केअर स्टॉर्मर की सरकार के खिलाफ देश के भीतर असंतोष पनपने लगा था। स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को मिली करारी शिकस्त और देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, नीतिगत फैसलों में बार-बार यू-टर्न लेने और अवैध प्रवासियों की गंभीर समस्या से निपटने में नाकामी के चलते जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का ग्राफ बहुत तेजी से नीचे गिर गया था। इसके साथ ही पार्टी के करीब सौ से अधिक सांसदों और कई बड़े कैबिनेट मंत्रियों ने उनके खिलाफ गुप्त बगावत शुरू कर दी थी और उनसे इस्तीफे की समय-सीमा तय करने का दबाव बना रहे थे।
धुर विरोधी एंडी बर्नहैम की जीत ने किया ताबूत में आखिरी कील का काम
प्रधानमंत्री पद की कुर्सी से स्टॉर्मर के हटने की असली पटकथा पिछले सप्ताह ही लिखी जा चुकी थी, जब एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल उपचुनाव के नतीजे सामने आए। इस चुनाव में ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व लोकप्रिय मेयर और केअर स्टॉर्मर के सबसे बड़े राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले एंडी बर्नहैम ने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की। उनकी इस शानदार जीत ने उन्हें देश की मुख्य संसद में पहुँचने का मौका दे दिया। चूंकि ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बनने के लिए संसद का सदस्य होना अनिवार्य माना जाता है, इसलिए एंडी बर्नहैम की इस चुनावी जीत ने सीधे तौर पर स्टॉर्मर के विकल्प के रूप में एक मजबूत चेहरा पार्टी के सामने पेश कर दिया। बर्नहैम के संसद में प्रवेश करते ही स्टॉर्मर के पास पद छोड़ने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था।
नए नेता के चयन के लिए कशमकश शुरू, रेस में कई बड़े नाम
स्टॉर्मर के इस अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी के भीतर नए प्रधानमंत्री के चेहरे को लेकर सरगर्मियां बहुत तेज हो गई हैं। एंडी बर्नहैम को इस समय प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे और मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी के भीतर सब कुछ इतना आसान भी नहीं है। पिछले महीने ही स्टॉर्मर के नेतृत्व की नीतियों का विरोध करते हुए अपने स्वास्थ्य मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले दिग्गज नेता वेस स्ट्रीटिंग ने भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि पार्टी के भीतर नए नेता के लिए मतदान की नौबत आती है, तो वे पूरी ताकत के साथ इस चुनावी मैदान में उतरेंगे। फिलहाल कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में स्टॉर्मर देश को संभाल रहे हैं और जुलाई महीने के भीतर ब्रिटेन को उसका नया प्रधानमंत्री मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
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