एजेंसी, तेहरान। Iran Israel War : पश्चिम एशिया के अशांत क्षेत्रों से एक बार फिर बेहद चिंताजनक और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख देने वाला समाचार सामने आ रहा है। लेबनान की धरती पर इजराइल द्वारा किए गए भीषण सैन्य हमलों में सोलह नागरिकों की दर्दनाक मौत के बाद ईरान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने अपने आधिकारिक सरकारी टेलीविजन चैनल पर एक आपातकालीन घोषणा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) को एक बार फिर से पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद खाड़ी देशों सहित पूरी दुनिया में रणनीतिक और आर्थिक हलचल काफी तेज हो गई है। অন্যদিকে इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोटूक लहजे में कहा है कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और उनके सैन्य अभियान लगातार जारी रहेंगे।
🚨🇮🇷 Iran shuts Strait of Hormuz again
Ordered by Iran’s Central Headquarters of Khatam al-Anbiya, the closure responds to:
🔸US breaches of the ceasefire
🔸Israel’s continued operations in southern Lebanon
Iran calls it only the “first step.”
pic.twitter.com/hRGCNfkb4q— Sputnik India (@Sputnik_India) June 20, 2026
शांति समझौते के मात्र अड़तालीस घंटे बाद ही टूटा युद्ध विराम, वादों से मुकरा इजराइल
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कूटनीतिक विफलता की एक लंबी कहानी है। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच सत्रह जून की रात को ही एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस ऐतिहासिक समझौते की मुख्य शर्तों के तहत ईरान को होर्मुज जलमार्ग को व्यापार के लिए खोलना था और बदले में लेबनान पर होने वाले हमलों को रोकना तय हुआ था। इस शांति समझौते को मजबूती देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मध्यस्थता में उन्नीस जून की रात को इजराइल और लेबनान के बीच भी औपचारिक युद्ध विराम (सीजफायर) की घोषणा की गई थी। परंतु दुर्भाग्यवश, इस ऐतिहासिक शांति घोषणा के महज आठ घंटे बाद ही युद्ध विराम के नियम तार-तार हो गए और दोनों पक्षों के बीच एक बार फिर से खूनी संघर्ष प्रारंभ हो गया।
इजराइली ड्रोन और तोपों के हमले से दहल उठा नबाहितए क्षेत्र, मची भारी तबाही
अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, इजराइली रक्षा बलों ने युद्ध विराम के समझौतों को दरकिनार करते हुए लेबनान के नबाहितए इलाके को अपना निशाना बनाया। इजराइली सेना ने इस घनी आबादी वाले क्षेत्र पर मानव रहित लड़ाकू विमानों (ड्रोन) और भारी तोपों से भीषण गोलाबारी की। इस अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई में कम से कम सोलह स्थानीय लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस वीभत्स हमले के तुरंत बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि इजराइल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजा पट्टी और लेबनान के भीतर उनके सैन्य अभियानों को तब तक नहीं रोका जाएगा जब तक उनके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान की पहली औपचारिक वार्ता अनिश्चितकाल के लिए टली
लेबनान के भीतर इजराइल के निरंतर बढ़ते हमलों और आक्रामक रुख के कारण राजनयिक प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है। स्विट्जरलैंड की धरती पर अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच शुक्रवार को होने वाली पहली आधिकारिक और औपचारिक कूटनीतिक बातचीत को आपसी मतभेदों के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा है। हालांकि, इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भी अमेरिकी प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शांति की संभावनाओं को तलाशने के लिए स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि परदे के पीछे से बातचीत का दौर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
पिछले चौबीस घंटों के दौरान वैश्विक पटल पर हुए पांच सबसे बड़े घटनाक्रम
लेबनान में मानवीय संकट गहराया
लेबनान के आधिकारिक स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी के मैदानी इलाकों में इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में पिछले चौबीस घंटों के दौरान सैंतालीस लोगों ने अपनी जान गंवाई है, जबकि संतानवे लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके साथ ही मार्च महीने से लेकर अब तक इस युद्ध में मरने वाले निर्दोष नागरिकों की कुल संख्या लगभग तीन हजार नौ सौ अस्सी तक पहुंच चुकी है।
होर्मुज जलमार्ग के बंद होने से फंसे हजारों नाविक
अमेरिका और ईरान के बीच हुए संक्षिप्त समझौते के प्रभाव से अट्ठारह जून को लगभग पच्चीस बड़े व्यापारिक और मालवाहक जहाज इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरे थे, जो पिछले कई महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी संख्या थी। परंतु ईरान द्वारा इसे दोबारा बंद किए जाने के बाद अब पांच सौ से अधिक विशाल व्यापारिक जहाज और ग्यारह हजार से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय नाविक समुद्र के बीचों-बीच फंस गए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने एक हालिया बयान में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी प्रकार की मजबूरी या दबाव में आकर ईरान के साथ बातचीत की मेज पर नहीं बैठा है, बल्कि ईरान खुद अपनी आर्थिक बदहाली के कारण बातचीत के लिए आगे आया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आने वाले साठ दिनों तक ईरान को अमेरिका की तरफ से एक भी पैसे की आर्थिक राहत या छूट नहीं दी जाएगी।
क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब में संवाद
इस बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से दूरभाष पर विशेष बातचीत की। दोनों शीर्ष नेताओं ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र में शांति की बहाली के लिए सैन्य रास्तों को छोड़कर केवल कूटनीति, संवाद और आपसी बातचीत के जरिए ही अगले दौर की चर्चा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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