India GDP Forecast

पश्चिम एशिया तनाव से भारत की अर्थव्यवस्था पर असर, विकास दर अनुमान घटाकर 6.2 प्रतिशत किया गया

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय व्यापार

एजेंसी, नई दिल्ली। India GDP Forecast : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कटौती कर दी है। एजेंसी ने अब देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि इससे पहले यह अनुमान 6.5 प्रतिशत रखा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता और महंगे कच्चे तेल के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। इक्रा ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसी वजह से आर्थिक गतिविधियों और उद्योगों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर विकास दर पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने बताया कि अब वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया है। इससे पहले एजेंसी ने यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल रखा था। तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी को भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और ऊर्जा लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर उद्योगों और आम लोगों दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की रफ्तार हुई धीमी

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 7 प्रतिशत तक आ सकती है। इससे पहले तीसरी तिमाही में यह दर 7.8 प्रतिशत रही थी। औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में सुस्ती को इसकी मुख्य वजह बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि विनिर्माण गतिविधियों में कमी, निर्यात में गिरावट और बढ़ती लागत के कारण उद्योगों के लाभ पर दबाव बन रहा है। वहीं सेवा क्षेत्र में भी अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि कृषि क्षेत्र में कुछ सुधार की उम्मीद जताई गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत मिल सकती है।

निर्यात कारोबार पर भी पड़ा असर

वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार और पोत परिवहन पर असर पड़ा है। इसका प्रभाव भारत के निर्यात क्षेत्र पर भी देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च तिमाही में भारत के वस्तु निर्यात में सालाना आधार पर 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले दिसंबर तिमाही में निर्यात में मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई थी, लेकिन मौजूदा हालात ने व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो भारतीय निर्यातकों को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

महंगाई और रोजगार पर भी पड़ सकता है असर

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार विकास दर में गिरावट का असर रोजगार, निवेश और उपभोक्ता मांग पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी। सरकार और आर्थिक संस्थाएं लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियां और तेल बाजार की स्थिति भारत की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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