एजेंसी, चांदीपुर। India cruise missile : भारत ने अपनी रणनीतिक मारक क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करते हुए पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से निर्मित लंबी दूरी की जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से संपन्न किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने उन्नत तकनीक का प्रदर्शन करते हुए अपने सभी निर्धारित मिशन मानकों और लक्ष्यों को शत-प्रतिशत सटीकता के साथ हासिल किया। इस मिसाइल को विशेष रूप से जमीन पर मौजूद अत्यंत दूर के सैन्य ठिकानों पर अचूक निशाना साधने के लिए अभिकल्पित (डिजाइन) किया गया है, जो 1000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुश्मन के अड्डों को पूरी तरह ध्वस्त करने में सक्षम है।
Long Range Land Attack Cruise Missile (LRLACM) was successfully flight tested from Dr APJ Abdul Kalam Island off the coast of Odisha on 15th June 2026.https://t.co/wVYJauGjNQ pic.twitter.com/nutCCfzWEd
— DRDO (@DRDO_India) June 15, 2026
रास्ता बदलने में माहिर और रडार को चकमा देने की अद्भुत तकनीक
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल जेट इंजन की शक्ति से संचालित होती है और पारंपरिक मिसाइलों के विपरीत आसमान में बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की अनूठी क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उड़ान के दौरान हवा में ही अपना रास्ता बदलने में पूरी तरह माहिर है, जिसके कारण दुश्मन के हवाई सुरक्षा रडार और मिसाइल रोधी प्रणालियों के लिए इसे पकड़ पाना लगभग असंभव हो जाता है। रडार को चकमा देकर अपने लक्ष्य पर सीधे और सटीक हमला करने की इस खूबी के कारण इसे भारतीय सेना के लिए एक गेम-चेंजर हथियार माना जा रहा है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की पूर्णतः स्वदेशी तकनीक
इस मिसाइल परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका पूरी तरह से भारतीय होना है। इसके निर्माण में उपयोग किए गए सभी प्रमुख उप-प्रणालियों (सब-सिस्टम) को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय औद्योगिक साझेदारों ने मिलकर तैयार किया है। कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (एडीई) को इस अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य परियोजना की मुख्य नोडल प्रयोगशाला बनाया गया है। इस सफल परीक्षण के ऐतिहासिक क्षण पर डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
क्या है डीप स्ट्राइक क्षमता और इसका रणनीतिक महत्व
सैन्य विज्ञान की भाषा में ‘डीप स्ट्राइक’ का सीधा अर्थ दुश्मन की सीमा के काफी भीतर गहराई में मौजूद उसके सबसे सुरक्षित और संवेदनशील सैन्य ठिकानों को दूर से ही निशाना बनाने की क्षमता है। इसके अंतर्गत दुश्मन के मुख्य हवाई पट्टियों (एयरबेस), मिसाइल प्रक्षेपण केंद्रों, रडार स्टेशनों, सैन्य मुख्यालयों और कमान नियंत्रण केंद्रों पर बिना सीमा पार किए सटीक हमला किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि भारतीय सेना अपनी सीमा के भीतर सुरक्षित रहते हुए दुश्मन के इलाके में 800 किलोमीटर दूर बने किसी सैन्य ठिकाने को पूरी तरह नष्ट कर देती है, तो उसे वास्तविक डीप स्ट्राइक क्षमता कहा जाता है। इस सफल परीक्षण के बाद भारत की सेनाओं को आधुनिक युद्धक्षेत्र में एक नई और घातक आक्रामक शक्ति मिल गई है।
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