एजेंसी, भोपाल। CM Mohan Yadav : मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव, जिन्हें अमूमन बेहद शांत और शालीन स्वभाव का माना जाता है, एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक के दौरान अचानक बेहद उग्र और कड़े तेवर में नजर आए। मुख्यमंत्री का यह दूसरा और सख्त अंदाज समान नागरिक संहिता को लेकर आयोजित की गई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान देखने को मिला। बैठक में कुछ जिलों द्वारा इस महत्वपूर्ण विषय पर आम जनता और विशेषज्ञों के सुझाव जुटाने की बेहद लचर और धीमी कार्यप्रणाली को देखकर मुख्यमंत्री का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने बैठक के दौरान ही दतिया जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को लेकर उन्हें सबके सामने कड़ी फटकार लगा दी। मुख्यमंत्री की इस तगड़ी लताड़ से बैठक में मौजूद दोनों वरिष्ठ अधिकारी पूरी तरह से सहम गए।
मोबाइल में व्यस्त अधिकारियों पर भड़के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री
यह पूरा वाकल्य बीते शनिवार को आयोजित की गई एक बेहद महत्वपूर्ण वर्चुअल समीक्षा बैठक के दौरान घटित हुआ। इस डिजिटल बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन भी विशेष रूप से उपस्थित थे, जबकि सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस प्रमुख वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे। बैठक में जब जिलों के प्रदर्शन और सुझावों की धीमी गति पर गंभीर चर्चा चल रही थी, ठीक उसी समय दतिया के जिलाधीश स्वप्निल वानखेड़े और पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने में मग्न दिखाई दिए। दोनों अधिकारियों का ध्यान बैठक की मुख्य चर्चा पर बिल्कुल नहीं था। इस प्रशासनिक अनुशासनहीनता को स्क्रीन पर लाइव देखकर सबसे पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन का पारा चढ़ गया और उन्होंने दोनों को कड़े शब्दों में टोकते हुए बैठक की गंभीरता को समझने की नसीहत दी।
स्क्रीन पर लाइव पकड़ी गई लापरवाही तो मुख्यमंत्री ने दिखाए कड़े तेवर
मुख्य सचिव के टोकने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मामले में बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया। मुख्यमंत्री ने दोनों अधिकारियों को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे स्क्रीन पर सब कुछ साफ-साफ देख रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां एक तरफ इंदौर, जबलपुर, सीधी और खंडवा जैसे बड़े जिलों के प्रशासनिक प्रमुख इस गंभीर मुद्दे पर लगातार अपने विचार और सुझाव साझा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ जिम्मेदार अधिकारी बैठक के दौरान मोबाइल चलाने में व्यस्त हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का उदासीन और गैर-गंभीर रवैया किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोनों अधिकारियों को तत्काल अपने काम करने के तरीके में सुधार करने और समान नागरिक संहिता के काम को पूरी गंभीरता के साथ समय पर पूरा करने की सख्त हिदायत दी।
लचर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को दी गई सीधी चेतावनी
इस बड़ी फटकार के माध्यम से मुख्यमंत्री ने राज्य के पूरे प्रशासनिक अमले को एक बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है। मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ तौर पर संकेत दे दिया कि वर्तमान सरकार के ढाई साल का कार्यकाल अब पूरा हो चुका है और अब आने वाले बचे हुए समय में जमीन पर केवल वही अधिकारी तैनात दिखाई देंगे जिनकी कार्यप्रणाली और परफॉर्मेंस बेहतरीन होगी। जो भी अधिकारी काम के प्रति लापरवाही बरतेंगे या जिनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहेगा, उन्हें फील्ड पोस्टिंग से तुरंत हटा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख के बाद से ही पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में सरकार बेहद गंभीर
मध्य प्रदेश की वर्तमान सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता को लेकर बेहद संवेदनशील है और इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारना चाहती है। मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं और इसमें किसी भी प्रकार का विलंब नहीं चाहते हैं। यदि सरकार की योजना के अनुसार तय समय सीमा के भीतर सभी जिलों से सुझाव प्राप्त हो जाते हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, तो मध्य प्रदेश पूरे देश में समान नागरिक संहिता को आधिकारिक रूप से लागू करने वाला पांचवां राज्य बन जाएगा। यही कारण है कि इस विषय में थोड़ी सी भी ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार अब बेहद सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हट रही है।
ये भी पढ़े : असम के कछार में आया 3.3 तीव्रता का तेज भूकंप, मेघालय सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में हिली धरती
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


