एजेंसी, चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में नया युग शुरू : तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच अभिनेता से राजनेता बने सी जोसेफ विजय अब सत्ता की दहलीज तक पहुंच चुके हैं। ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ के प्रमुख विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद उनकी पार्टी राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी है। राज्यपाल ने उनके दावे को स्वीकार कर लिया है और अब विजय गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
तमिलनाडु: राज्यपाल से मिले विजय, सरकार बनाने का दावा पेश
चेन्नई में TVK प्रमुख विजय ने सरकार बनाने के लिए विधायकों का समर्थन पत्र सौंपने के उद्देश्य से राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की।#TVK #VijayThalapathy #TamilNadu #Chennai #Governor #RajendraArlekar #h3news pic.twitter.com/AuIAnQEB4T— H3 NEWS (@H3News44703) May 6, 2026
चेन्नई में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। शहर के जवाहरलाल नेहरू बहुउद्देशीय इंडोर स्टेडियम को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ विजय के समर्थकों और फिल्म प्रशंसकों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है। पहली बार चुनाव लड़कर सत्ता के इतने करीब पहुंचने वाले विजय को लेकर पूरे तमिलनाडु में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
विधायक दल ने सर्वसम्मति से चुना नेता
सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ विधायक दल की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विजय को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने अपने सहयोगी दलों के समर्थन पत्रों के साथ राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की।
इस मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने विजय का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और फूलों का गुलदस्ता भेंट किया गया। बैठक लगभग तीस मिनट तक चली, जिसमें सरकार गठन और शपथ ग्रहण समारोह से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
कांग्रेस ने दिया विजय को समर्थन
तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला जब कांग्रेस ने द्रमुक से नाता तोड़कर विजय की पार्टी का समर्थन करने का फैसला किया। चुनाव से पहले कांग्रेस और द्रमुक साथ थे, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।
कांग्रेस नेतृत्व ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद विजय को समर्थन देने का निर्णय लिया। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विजय से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपा। बताया जा रहा है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने और एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने के उद्देश्य से यह गठबंधन तैयार किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह फैसला तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले समय के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
बहुमत के आंकड़े से अभी भी दूर
हालांकि विजय की पार्टी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, लेकिन अभी भी पूर्ण बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से कुछ पीछे है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। विजय की पार्टी ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन दो सीटों से स्वयं विजय के निर्वाचित होने के कारण तकनीकी रूप से पार्टी के पास 107 विधायक माने जा रहे हैं।
कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बाद यह संख्या 112 तक पहुंच गई है, लेकिन सरकार को स्थिर बहुमत देने के लिए अभी छह और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। इसी कारण राजनीतिक चर्चाएं और जोड़तोड़ तेज हो गई हैं।
युवा और महिला मतदाताओं ने बदला समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की सफलता के पीछे युवाओं और महिला मतदाताओं का सबसे बड़ा योगदान रहा। चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने रोजगार, शिक्षा, भ्रष्टाचार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।
उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ी और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं ने भी उन्हें भरपूर समर्थन दिया। इसके अलावा महिला मतदाताओं के बीच भी विजय की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। यही कारण रहा कि उन्होंने तमिलनाडु की छह दशक पुरानी द्रविड़ राजनीति को कड़ी चुनौती देते हुए बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया।
द्रविड़ राजनीति के पुराने समीकरण टूटे
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस चुनाव ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी। विजय की पार्टी ने पहली बार चुनाव मैदान में उतरकर पारंपरिक राजनीतिक दलों की जड़ें हिला दीं।
द्रमुक, जो लगातार दूसरी बार सत्ता में आने का सपना देख रही थी, उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं अन्नाद्रमुक और उसके सहयोगी दल भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिणाम तमिलनाडु की राजनीति में नए युग की शुरुआत का संकेत है।
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं बड़े नेता
सूत्रों के अनुसार विजय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई राष्ट्रीय नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के समारोह में शामिल होने की संभावना है।
इसके अलावा विभिन्न राज्यों के विपक्षी नेताओं और फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियों के भी समारोह में शामिल होने की चर्चा है। चेन्नई में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी चल रही है।
विजय के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
हालांकि विजय सत्ता के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। सबसे बड़ी चुनौती स्थिर बहुमत सुनिश्चित करने की होगी। इसके अलावा जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी उनके लिए बड़ी परीक्षा साबित होगा।
चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने का वादा किया था। अब जनता को उम्मीद है कि वह इन वादों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़
विजय की यह सफलता केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है। एक फिल्म अभिनेता से राजनीतिक नेता बने विजय ने बेहद कम समय में जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और अब वह राज्य की सत्ता संभालने जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि विजय अपनी सरकार को स्थिर रखने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में सफल रहते हैं, तो वह आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।


