एजेंसी, दिल्ली। Gadkari Toll Free News : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को आयोजित ‘लॉजिस्टिक्स शक्ति समिट एंड अवॉर्ड्स 2026’ के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दिसंबर तक देश के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना किसी बाधा के टोल वसूली की आधुनिक व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी। गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि देश की आर्थिक प्रगति के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और माल ढुलाई की लागत को कम करना अनिवार्य है।
Addressing 2nd Edition of Logistics Shakti Summit & Awards 2026 https://t.co/d8x9BGGS3i
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) April 24, 2026
बाधा-मुक्त यात्रा के लिए नई तकनीक
नई योजना के अंतर्गत अब वाहन चालकों को टोल संग्रहण केंद्रों पर अपनी गाड़ी रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी प्रक्रिया उन्नत तकनीक पर आधारित होगी, जिसमें हाई-स्पीड कैमरों और सेंसर का उपयोग किया जाएगा। ये उपकरण चलते वाहन की नंबर प्लेट और उसमें लगे इलेक्ट्रॉनिक टैग की पहचान कर लेंगे, जिससे टोल की राशि सीधे खाते से कट जाएगी। इस स्वचालित व्यवस्था से ईंधन और समय दोनों की बचत होगी।
नियमों के उल्लंघन पर डिजिटल कार्रवाई
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो चालक इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें डिजिटल माध्यम से नोटिस भेजे जाएंगे। यदि टोल का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, तो संबंधित वाहन का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड (फास्टैग) बंद किया जा सकता है और वाहन के विरुद्ध अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने के लिए परिवहन पर होने वाले खर्च को कम करना बेहद जरूरी है।
परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी
गडकरी ने एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि नए एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के निर्माण के कारण देश में परिवहन लागत पहले के 16 प्रतिशत से कम होकर अब लगभग 10 प्रतिशत पर आ गई है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप में यह खर्च 12 प्रतिशत के आसपास है, जबकि चीन में यह 8 से 10 प्रतिशत के बीच रहता है। भारत का लक्ष्य इसे और कम कर एक अंक (सिंगल डिजिट) तक लाना है।
वैकल्पिक ईंधन पर विशेष बल
पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थितियों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत अपनी तेल संबंधी आवश्यकताओं का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है। प्रतिवर्ष जीवाश्म ईंधन के आयात पर देश को लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। गडकरी ने इस निर्भरता को कम करने के लिए जैव ईंधन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता जताई।
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