एजेंसी, पेरिस। G7 Meeting France : फ्रांस में अगले महीने होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन को लेकर वैश्विक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। 15 से 17 जून के बीच आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस बार सम्मेलन की मेजबानी करेंगे और कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण दिया गया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान कृत्रिम मेधा, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध आप्रवासन जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
फ्रांस में होगी वैश्विक मुद्दों पर बड़ी चर्चा
#WATCH | Delhi: On Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump likely to have bilateral talks on the sidelines of the upcoming G7 Summit in France, former diplomat K.P. Fabian says, “It is positive that they will be meeting. There are a couple of key issues to… pic.twitter.com/OHYT7butJr
— ANI (@ANI) May 20, 2026
जी-7 सम्मेलन इस बार फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा, जो फ्रेंच एल्प्स में स्थित है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीक से जुड़े अहम विषय एजेंडे में शामिल रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और उसके सहयोगी देश कृत्रिम मेधा यानी एआई तकनीक के इस्तेमाल और उसके वैश्विक प्रभावों पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं में चीन पर निर्भरता कम करने पर भी चर्चा संभावित है।
पीएम मोदी को मैक्रों ने दिया विशेष निमंत्रण
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फरवरी में अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया था। माना जा रहा है कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक ताकत को देखते हुए इस सम्मेलन में उसकी भागीदारी बेहद अहम मानी जा रही है। भारत पहले भी कई बार जी-7 बैठकों में विशेष आमंत्रित देश के रूप में हिस्सा ले चुका है। इस बार भी भारत की मौजूदगी हिंद-प्रशांत क्षेत्र, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रंप का फोकस व्यापार और एआई पर
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सम्मेलन में व्यापार और एआई तकनीक को प्रमुख मुद्दे के तौर पर उठा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप अमेरिकी तकनीक और निवेश को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की रणनीति पर जोर देंगे। इसके अलावा ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन क्षेत्र को मजबूती देने, तथा निर्यात बढ़ाने को लेकर भी अमेरिका अपनी बात रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप नियामक बाधाओं को कम करने और निवेश को आसान बनाने पर भी जोर देंगे।
ईरान और वैश्विक सुरक्षा पर भी रहेगी नजर
जी-7 सम्मेलन में पश्चिम एशिया के हालात और ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि रिपोर्टों में कहा गया है कि इस बैठक में किसी बड़े औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद कम है, लेकिन वैश्विक सहमति बनाने की दिशा में यह सम्मेलन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच यह बैठक कई देशों की भविष्य की रणनीति तय करने में असर डाल सकती है।
भारत की भूमिका पर दुनिया की नजर
वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। जी-20 की सफल मेजबानी के बाद अब जी-7 सम्मेलन में भारत की संभावित भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां भारत को आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रही हैं। अगर प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में शामिल होते हैं तो उनकी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी हो सकती हैं। इससे व्यापार, तकनीक, रक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग का रास्ता खुल सकता है।
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