एजेंसी, नई दिल्ली। Fuel Price Hike : देश के आम नागरिकों के बजट पर एक बार फिर से महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। सोमवार को पेट्रोल और कमर्शियल वाहनों के साथ-साथ आम गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दामों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा वृद्धि के बाद देश के प्रमुख महानगरों सहित सभी राज्यों में आम जनता की जेब पर बोझ और ज्यादा बढ़ गया है। पिछले दो हफ्तों से भी कम समय के भीतर आम उपभोक्ताओं को लगने वाला यह चौथा बड़ा झटका है। सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पेट्रोलियम वितरण कंपनियों ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती हुई कीमतों का सीधा असर अब घरेलू बाजार के उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है।
🚨🇮🇳 India kept fuel price hikes far below global levels despite crude surging above $100 per barrel: Indian Petroleum Ministry
India cut fuel taxes by billions of dollars and absorbed major losses to protect consumers during the global energy shock. pic.twitter.com/Qos3fzMgnR
— Sputnik India (@Sputnik_India) May 25, 2026
ईंधन के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से बढ़ी चिंता
लंबे समय तक कीमतों में स्थिरता का रुख बने रहने के बाद बीते 15 मई से तेल के दामों में जो संशोधन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, उसके तहत अब तक ईंधन के दामों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि के कारण देश की अर्थव्यवस्था के भीतर मुद्रास्फीति का दबाव और ज्यादा गहराने की आशंका पैदा हो गई है। इसके साथ ही माल ढुलाई और परिवहन लागत में भी बड़ी बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है, जिससे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। उद्योग से जुड़े विभिन्न सूत्रों के मुताबिक इस नए मूल्य संशोधन के लागू होने के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की दर 99.51 रुपये से सीधे बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमत भी 92.49 रुपये से उछलकर 95.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू चुकी है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार के हालात और महानगरों के नए दाम
पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में आ रही इस निरंतर तेजी की मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रिफाइनिंग मार्जिन में होने वाली लगातार कमी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना है। इन तमाम कारणों की वजह से कच्चे तेल की आयात लागत में बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है। इससे पहले सरकार के नियंत्रण वाली तेल कंपनियों ने 15 मई को पेट्रोल और डीजल की दरों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद 19 मई को फिर से 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इसके तुरंत बाद 23 मई को पेट्रोल के दाम 87 पैसे और डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। इस नई वृद्धि के लागू होने के बाद आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर आ गया है। इसके अलावा कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.51 रुपये व डीजल 99.82 रुपये और चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये व डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।
राज्यवार कर व्यवस्था और तेल कंपनियों का नियंत्रण
भारत के अलग-अलग राज्यों में तेल की कीमतों में दिखने वाला यह अंतर मुख्य रूप से वहां की राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले कर ढांचे यानी वैट और टैक्स की वजह से होता है। देश के भीतर पेट्रोलियम क्षेत्र की बड़ी सार्वजनिक कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मिलकर भारत के तकरीबन 90 फीसदी ईंधन बाजार के संचालन पर अपना सीधा नियंत्रण रखती हैं। बाजार के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार फरवरी महीने के आखिरी दिनों से लेकर अब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा का उछाल देखा जा चुका है। वैश्विक स्तर पर कीमतों के इस तरह बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया के देशों में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य वाले समुद्री मार्ग से होने वाली तेल की आपूर्ति में रुकावट आने की बड़ी आशंका है। इस वैश्विक संघर्ष के शुरुआती ढाई महीनों के दौरान भारतीय तेल कंपनियों ने अपनी बढ़ती लागत के बावजूद घरेलू बाजार में खुदरा कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा था।
निजी तेल कंपनियों के रुख और चुनावी राजनीति पर विवाद
केंद्र सरकार ने पूर्व में तेल की कीमतों को स्थिर रखने के इस कदम को आम उपभोक्ताओं को महंगाई के असर से बचाने का एक बड़ा प्रयास बताया था। वहीं दूसरी तरफ देश के विपक्षी दलों ने तत्कालीन सरकार पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही तेल कंपनियों ने जानबूझकर कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले को टाल रखा था। राजनीतिक विश्लेषक इस बात की ओर भी इशारा कर रहे हैं कि देश में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला 15 मई से ठीक उसी समय शुरू हुआ, जब देश के पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनावी नतीजे सामने आ गए। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा ईंधन के दाम बढ़ाए जाने के तुरंत बाद ही निजी क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों जैसे नायरा एनर्जी ने भी इसी अनुपात में अपनी दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इससे पहले निजी क्षेत्र की कंपनियों ने मार्च और अप्रैल के महीनों में भी अपनी कीमतों में बड़ा इजाफा किया था, लेकिन वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी पीएलसी के संयुक्त उपक्रम ने खुद को सार्वजनिक कंपनियों की दरों के बराबर बनाए रखा है। इस बढ़ोतरी के साथ ही देश में तेल की कीमतें मई 2022 के बाद के अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
राहुल गांधी का सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला
ईंधन के दामों में लगातार हो रहे इस बड़े इजाफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी पूरी तरह से गरमाहट आ गई है। लोकसभा में मुख्य विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई इस हालिया बढ़ोतरी को लेकर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार पर यह बड़ा आरोप लगाया कि जैसे ही राज्यों के चुनाव समाप्त हुए, वैसे ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर पेट्रोल और डीजल के दामों का भारी बोझ डाल दिया गया। अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर किए गए एक पोस्ट में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर कड़ा तंज कसते हुए उन्हें एक नया नाम दिया और आरोप लगाया कि जनता के भीतर पनपने वाले सीधे आक्रोश को दबाने के लिए सरकार जानबूझकर किश्तों में धीरे-धीरे ईंधन के दाम बढ़ा रही है।
किश्तों में जेब काटने और आर्थिक तूफान का दावा
कांग्रेस नेता ने सरकार की नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि आम जनता की जेब पर यह हमला बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है ताकि लोगों को इसका एकदम से एहसास न हो। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह देश के भीतर एक बड़े आर्थिक तूफान के आने की चेतावनी पिछले कई महीनों से लगातार दे रहे थे, लेकिन देश का शीर्ष नेतृत्व हमेशा की तरह केवल चुनावी रैलियों और प्रचार अभियानों में पूरी तरह व्यस्त था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जैसे ही चुनाव की प्रक्रिया संपन्न हुई, वैसे ही सरकार ने ईंधन के दामों को कुल मिलाकर करीब 8 रुपये तक महंगा करके अपना असली रंग दिखा दिया है।
चुनावी वादों और जनता की आर्थिक स्थिति पर सवाल
विपक्ष के नेता ने प्रधानमंत्री पर चुनावी रैलियों के दौरान बड़े-बड़े वादे करने और चुनाव खत्म होते ही देश के नागरिकों की आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए आशंका जताई कि तेल की कीमतों में होने वाली यह वृद्धि अभी रुकने वाली नहीं है और आने वाले दिनों में यह बोझ जनता पर और ज्यादा बढ़ने वाला है। राहुल गांधी के अनुसार सरकार का मुख्य काम केवल चुनाव के समय बड़े दावे करना और बाकी बचे समय में आम जनता की कमाई पर टैक्स और महंगाई के जरिए चोट पहुंचाना रह गया है। सरकार पर यह तीखा राजनीतिक हमला ठीक उसी समय आया है जब वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
ये भी पढ़े : प्रधानमंत्री की अपील को देश हित में आत्मसात किया एमपी के सीएम ने
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


