एजेंसी, इंदौर। CM Mohan Yadav Justice Speech : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुशासन और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका की मंशा के अनुरूप अपने सभी संसाधनों का उपयोग कर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, त्वरित और सस्ता न्याय प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के अनेक वरिष्ठ न्यायाधीश उपस्थित रहे।
आज इंदौर में देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत जी, माननीय केंद्रीय विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) व संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री @arjunrammeghwal जी एवं मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया जी के साथ NALSA के सहयोग से आयोजित… pic.twitter.com/lljhPW3g4U
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) August 8, 2026
भारतीय न्याय परंपरा पंच परमेश्वर और मध्यस्थता के सिद्धांतों पर आधारित
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति में न्याय की अवधारणा पंच परमेश्वर की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रही है, जहां सामाजिक विवादों का निपटारा आपसी समझाइश और समझौतों के माध्यम से सहजता से किया जाता था। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण द्वारा कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध टालने के लिए दिए गए शांति संदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि संवाद ही विवादों का सर्वोत्तम समाधान है। आधुनिक समय में न्यायालयों में लंबित मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए मध्यस्थता यानी प्री-लिटिगेशन मीडिएशन एक अत्यंत कारगर और व्यावहारिक माध्यम सिद्ध हो रहा है।
औपनिवेशिक कालीन अनावश्यक कानूनों की समाप्ति और तकनीकी नवाचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में औपनिवेशिक दौर के अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त कर कानूनी प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल और नागरिक-हितैषी बनाया गया है। ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रहण और ई-जीरो एफआईआर जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आम नागरिकों के लिए अदालती कार्यवाही तक पहुंच को सुगम बनाया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने हाल ही में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की है, जिन्होंने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। इसके साथ ही अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का संदेश: ‘संवाद और संवेदनशीलता ही न्याय का आधार’
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना केवल एक वैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक पवित्र संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने इंदौर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का स्मरण करते हुए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के न्यायिक आदर्शों की सराहना की। सीजेआई ने कहा कि न्याय प्रक्रिया केवल अदालती भवनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके लिए पैरा लीगल वॉलेंटियर्स और विधिक संस्थाओं को स्वयं पीड़ित व्यक्ति तक पहुंचना होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पीड़ितों की बात को पूरी मानवीय संवेदना, गरिमा और उनकी अपनी स्थानीय भाषा में सुनना ही वास्तविक न्याय की पहली सीढ़ी है।
ब्रेल लिपि में मार्गदर्शिका और दिव्यांगजनों के लिए विशेष योजनाओं का हुआ शुभारंभ
इस भव्य सम्मेलन के दौरान विधिक सेवाओं के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों और डिजिटल प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ किया गया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसा की नई शिक्षा योजना तथा नालसा के आधिकारिक थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज (भारतीय सांकेतिक भाषा) में लॉन्च किया। दृष्टिबाधित नागरिकों की सहायता के लिए ब्रेल लिपि में तैयार की गई विशेष कानूनी मार्गदर्शिका ‘न्याय के स्वर’ तथा ‘विवाद से सहमति’ नामक मध्यस्थता प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके अतिरिक्त बच्चों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए ‘जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ का भी विधिवत शुभारंभ किया गया।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: इंदौर में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस की मुख्य थीम क्या थी?
उत्तर: इस कॉन्फ्रेंस की थीम ‘इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस: एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचना’ थी।
प्रश्न 2: सीएम डॉ. मोहन यादव ने भारतीय न्याय परंपरा के किन ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख किया?
उत्तर: उन्होंने पंच परमेश्वर परंपरा, भगवान श्रीकृष्ण के शांति संदेश के साथ-साथ सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के निष्पक्ष न्याय के ऐतिहासिक आदर्शों का जिक्र किया।
प्रश्न 3: मध्य प्रदेश सरकार ने त्वरित न्याय व्यवस्था के लिए किन शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की हैं?
उत्तर: पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की गई हैं।
प्रश्न 4: कॉन्फ्रेंस के दौरान दृष्टिबाधित और दिव्यांग नागरिकों के लिए कौन सी नई पहलें शुरू की गईं?
उत्तर: दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में ‘न्याय के स्वर’ मार्गदर्शिका जारी की गई और नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) में लॉन्च किया गया।
प्रश्न 5: मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार न्याय प्रक्रिया में ‘समावेश’ और ‘गरिमा’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: सीजेआई के अनुसार समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा को उसी की भाषा में सुनना, उसके साथ मानवीय सम्मान से बर्ताव करना और उसे बिना किसी भेदभाव के न्याय दिलाना ही गरिमा व समावेश है।
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