CM Bhagwant Mann

विवादित वीडियो और बेअदबी कानून पर टकराव के बाद अकाल तख्त ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को घोषित किया गुरु दोषी

देश/प्रदेश पंजाब

एजेंसी, अमृतसर। CM Bhagwant Mann news : पंजाब की सियासत और धार्मिक गलियारों में सोमवार को उस समय बहुत बड़ा भूचाल आ गया, जब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘पंथ विरोधी’ और ‘गुरु दोषी’ करार दे दिया। अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने विभिन्न सिख संगठनों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने के बाद इस कड़े फैसले का आधिकारिक तौर पर एलान किया। इस धार्मिक आदेश में अकाल तख्त की ओर से पूरे सिख समुदाय को मुख्यमंत्री भगवंत मान से सामाजिक और धार्मिक संबंध पूरी तरह तोड़ने के सख्त निर्देश भी जारी किए गए हैं। सीएम मान के खिलाफ यह दंडात्मक कदम उनके एक वायरल वीडियो और सरकार द्वारा लाए गए एक नए कानून के नियमों को लेकर लिया गया है, जिसने सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।

फॉरेंसिक जांच में सही पाया गया वायरल वीडियो, मुख्यमंत्री के दावे हुए खारिज

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक विवादित वीडियो है, जिसमें उन पर कथित तौर पर सिखों के पवित्र गुरु का अपमान करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का गंभीर आरोप लगा है। मुख्यमंत्री ने इस वीडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा निर्मित और पूरी तरह फर्जी (एडिटेड) करार दिया था। इस पर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने स्पष्ट किया कि सीएम को अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करने के लिए पूरे 6 महीने का लंबा समय दिया गया था, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। इसके बाद अकाल तख्त ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो अलग-अलग फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं से इस वीडियो की प्रामाणिकता की बारीकी से जांच करवाई। फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट में यह पूरी तरह साफ हो गया कि यह वीडियो न तो फर्जी है और न ही इसे एआई तकनीक से तैयार किया गया है, जिसके बाद अकाल तख्त ने यह बड़ा फैसला सुनाया।

‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार विधेयक 2026’ पर बढ़ा भारी विरोध

धार्मिक वीडियो के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब सरकार द्वारा लाए गए ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026’ के कुछ विवादित नियमों को लेकर भी चौतरफा घिरे हुए हैं। दरअसल, अकाल तख्त और विभिन्न सिख धार्मिक संगठन इस नए बेअदबी कानून में किए गए संशोधनों को पूरी तरह से गलत और त्रुटिपूर्ण ठहरा रहे हैं। विभिन्न सिख संस्थाओं की मांग है कि इस कानून के आपत्तिजनक और दोषपूर्ण नियमों को तत्काल प्रभाव से बदला जाए। अकाल तख्त ने इन विवादित नियमों को हटाने के लिए पंजाब सरकार को पहले ही 15 दिनों की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) दी थी, जो अब पूरी हो चुकी है।

पंजाब के मंत्रियों और विधायकों को अकाल तख्त में पेश होने का कड़ा हुक्म

इस संशोधन विधेयक पर मचे भारी राजनीतिक और धार्मिक घमासान के बीच अकाल तख्त ने पंजाब सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। इस कानून का समर्थन करने और इस पर हस्ताक्षर करने के कारण अकाल तख्त ने पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों और सत्ताधारी दल के विधायकों को आगामी 29 जून को अकाल तख्त के सम्मुख व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा आदेश जारी किया है। अकाल तख्त के इस अभूतपूर्व और कड़े एलान ने पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और राज्य की पूरी राजनीति को एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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