एजेंसी, नई दिल्ली। CJP AISA Press Conference : राजधानी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा द्वारा आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के भाषण शुरू करने से ठीक पहले कुछ लोगों ने अचानक नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में बुलाई गई इस प्रेस वार्ता में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। दीपके ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने के लिए हुकूमत ने देश में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने तक को अपराध की श्रेणी में डाल दिया है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में सीजेपी द्वारा प्रस्तावित तिरंगा प्रदर्शन पर रोक लगाने वाली याचिका पर कोई भी अंतरिम निषेधाज्ञा देने से साफ इनकार कर दिया है।
VIDEO | Delhi: Chaos erupts during a press conference addressed by AISA president Neha Bora and CJP founder Abhijeet Dipke at the Press Club of India. https://t.co/DEViKWO6Q8
— Press Trust of India (@PTI_News) October 15, 2026
प्रेस क्लब में तीखी नारेबाजी और नेताओं की दो टूक
प्रेस क्लब के खचाखच भरे सभागार में हंगामे के बीच नेताओं ने अपना रुख कड़ा रखा। आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लेने, लाठीचार्ज करने और डराने-धमकाने से यह राष्ट्रव्यापी जनांदोलन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल, व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि देश के संविधान और आम गरीब नागरिकों के लोकतांत्रिक वजूद को बचाने की लड़ाई है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को कानून का उल्लंघन बताकर उनके कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया, जबकि अंग्रेजों के शासनकाल में तिरंगा लहराना अपराध माना जाता था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार एक चुनाव आयुक्त को बचाने के लिए पूरी राजधानी को छावनी में तब्दील कर रही है।
प्रशांत भूषण का तीखा वार और 23 अक्टूबर से बड़े आंदोलन का ऐलान
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार की प्रशासनिक बर्बरता और तानाशाही इसी तरह जारी रही तो जनता को सत्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने दौर में कई बड़े जनआंदोलनों के जरिए ही सत्ता परिवर्तन किया था, इसलिए विरोध प्रदर्शन करना कोई अपराध नहीं है। भूषण ने एसआईआर प्रक्रिया में भारी विसंगतियों का आरोप लगाते हुए कहा कि नाम जोड़ने और काटने का पूरा नियंत्रण मनमाने तरीके से केंद्रीय आईटी सेल के हाथ में दे दिया गया है। उन्होंने घोषणा की कि 23 अक्टूबर 2026 से विभिन्न नागरिक संगठनों के साथ मिलकर पीपुल्स अगेंस्ट एसआईआर नाम से एक व्यापक जन अभियान शुरू किया जाएगा ताकि मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम काटे जाने की धांधली को उजागर किया जा सके।
प्रकाश राज का हमला और आदिवासियों के नाम कटने का दावा
अभिनेता प्रकाश राज ने प्रेस वार्ता में कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग बचपन में मगरमच्छ से नहीं डरने के दावे करते थे, वे आज एक युवा संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी से खौफजदा नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के उडुपी में हजारों सीधे-सादे आदिवासी नागरिकों को कागजों पर मृत घोषित करके उनके नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिए गए हैं। प्रकाश राज ने कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर से आंदोलन को छूमंतर करने की साजिश रची है, लेकिन अब देश के 200 से अधिक जनसंगठन लामबंद हो चुके हैं और वे देश के हर जिले, कस्बे और गांव को ही नया जंतर-मंतर बना देंगे।
हाईकोर्ट ने नहीं लगाई रोक और व्यापारियों ने जताई नुकसान की चिंता
कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 16 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित सीजेपी के ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ के खिलाफ स्थानीय व्यापारियों और चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि फेस्टिव सीजन और वीकेंड पर प्रदर्शन होने से व्यापार बुरी तरह ठप हो जाएगा। सीटीआई के अनुसार 10 अक्टूबर 2026 को हुए पिछले प्रदर्शन से करीब 2,000 करोड़ रुपये का कारोबारी नुकसान हुआ था। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए दिल्ली पुलिस के उस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया जिसमें कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया गया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 तय की है।
जंतर-मंतर पर पाबंदी और 33 साल पुराने धरने के केंद्र पर लगा ताला
इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया था। पिछले 33 वर्षों से ऐतिहासिक धरनों, अन्ना आंदोलन और बड़े सामाजिक संघर्षों का गवाह रहे इस स्थल पर प्रदर्शन प्रतिबंधित किए जाने के बाद अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नया धरना स्थल अधिसूचित किया गया है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने विपक्षी नेताओं पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन की आड़ में देश के भीतर अशांति फैलाने और विदेशी पैटर्न पर हिंसक माहौल तैयार करने की साजिश रची जा रही है। राजनीतिक बयानबाजियों और कानूनी खींचतान के बीच राजधानी में शुक्रवार को होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने कनॉट प्लेस और लुटियंस दिल्ली के आसपास त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात कर दिया है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: दिल्ली प्रेस क्लब (Delhi Press Club news) में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा क्यों हुआ?
उत्तर 1: CJP और AISA द्वारा एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बुलाई गई Joint press conference में कुछ अज्ञात लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे भारी हंगामा हो गया।
प्रश्न 2: प्रशांत भूषण ने सरकार पर क्या आरोप (Prashant Bhushan statement) लगाए हैं?
उत्तर 2: वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक विरोध पर पुलिस की बर्बरता (Police brutality protests) जारी रही, तो युवाओं को सरकार बदलनी होगी।
प्रश्न 3: सीजेपी के विरोध प्रदर्शन (CJP protest Delhi) का मुख्य मुद्दा क्या है?
उत्तर 3: यह विरोध मतदाता सूची से नाम काटे जाने (Voter deletion controversy) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।
प्रश्न 4: दिल्ली हाईकोर्ट ने कनॉट प्लेस प्रदर्शन (Connaught Place protest HC order) पर क्या आदेश दिया?
उत्तर 4: दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यापारियों की मांग को खारिज करते हुए 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में सीजेपी के तिरंगा मार्च (Tiranga march protest) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
प्रश्न 5: व्यापारियों (Delhi traders association) को इस प्रदर्शन से क्या चिंता है?
उत्तर 5: चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री का दावा है कि पिछले प्रदर्शन के कारण वीकेंड पर Delhi business impact बहुत ज्यादा था और करीब ₹2,000 करोड़ का नुकसान हुआ था।
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