एजेंसी, नई दिल्ली। SC March Notice to Rahul : सुप्रीम कोर्ट परिसर तक विपक्षी दलों द्वारा निकाले गए विवादास्पद मार्च और परिसर के भीतर जमावड़े को लेकर शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और 14 विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
[BREAKING] Supreme Court issues notice to Congress, Rahul Gandhi on plea against march to Court, X post against CJI
report by @DebayonRoy
https://t.co/oLgbJmin07
— Bar and Bench (@barandbench) October 15, 2026
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन 14 विपक्षी दलों के नेताओं को नोटिस भेजा गया है, उनकी सूची इस प्रकार है:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
समाजवादी पार्टी (SP)
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC)
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)
आम आदमी पार्टी (AAP)
राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार (NCP-SP)
शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे (SS-UBT)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M)
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC)
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)
विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK)
मामले की गंभीर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि न्यायपालिका किसी भी राजनीतिक दबाव या धमकियों के आगे झुकने वाली नहीं है। सीजेआई ने खुली अदालत में कहा कि किसी भी संस्था अथवा व्यक्ति द्वारा अदालत पर दबाव बनाने की कोशिशें पूरी तरह निरर्थक हैं क्योंकि न्यायपालिका केवल संविधान और कानून के अनुसार कार्य करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि अदालत की चारदीवारी के बाहर क्या बोला जा रहा है और भीतर क्या दलीलें दी जा रही हैं।
किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे हम, याचिकाकर्ताओं के आचरण पर मांगा स्पष्टीकरण
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपीठ किसी काल्पनिक संसार में नहीं जी रही है और उसे सामाजिक तथा राजनीतिक घटनाक्रमों की पूरी और सटीक जानकारी है। सीजेआई ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कड़ा संदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं में शामिल एक प्रमुख नेता के सार्वजनिक आचरण पर अदालत सवाल पूछेगी और उस पक्ष को इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अदालत के समक्ष अपनी सफाई पेश करनी होगी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ दायर विपक्षी दलों की मूल याचिका पर केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को भी नोटिस जारी कर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट परिसर में प्रदर्शन रोकने और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की याचिका
विपक्षी नेताओं के 12 अक्टूबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट मार्च के खिलाफ 4 वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर अदालती परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों और धरनों को स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने के लिए कठोर दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट के भीतर और प्रवेश द्वारों पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को तुरंत सुरक्षित कराया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रवेश के दौरान मची आपाधापी में एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की गई। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बागची ने सभी कानूनी व सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया कि उस दिन के सभी डिजिटल और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं ताकि कोई भी पक्ष इन्हें आधिकारिक जांच के लिए रिकॉर्ड पर जमा कर सके। इसके अतिरिक्त किसी प्रदर्शन का आह्वान करने वाले आयोजकों पर उसके परिणामों की कानूनी जिम्मेदारी तय करने के मुद्दे पर भी अदालत ने नोटिस जारी किया है।
केरल कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट पर अवमानना का मुद्दा
अदालती कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने केरल कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी को अदालत की आपराधिक अवमानना करार देते हुए कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठाई। हालांकि यह पोस्ट सोशल मीडिया से हटाई जा चुकी है, लेकिन वकीलों ने तर्क दिया कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से यह अभियान चलाया गया। उल्लेखनीय है कि 11 अक्टूबर 2026 को विपक्षी दलों के सांसदों ने सीजेआई से मिलकर ज्ञापन सौंपने के लिए औपचारिक समय मांगा था। मुख्य न्यायाधीश द्वारा इस प्रकार ज्ञापन लेने से मना करने के बाद विपक्षी नेताओं ने 12 अक्टूबर की शाम बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च निकाला था और उसके बाद परिसर के अंदर पहुंच गए थे।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और एसआईआर पर गहराया विवाद
विपक्ष द्वारा निर्वाचन आयोग को लगातार निशाने पर लिए जाने के पीछे आयोग के आंतरिक मतभेद भी एक प्रमुख आधार बने हैं। एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र की खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए सामने आया है कि पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े कई प्रशासनिक आदेशों पर कम से कम 14 बार अपनी गंभीर असहमति और लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची से नाम जोड़ने, हटाने और डेटाबेस के सॉफ्टवेयर एक्सेस को लेकर प्रक्रियाओं में भारी अनियमितताओं का अंदेशा जताया था। इसके अलावा फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़े सवाल जोड़ने और आंतरिक कार्यों के बंटवारे के आदेश को वैधानिक नियमों के विपरीत बताते हुए कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखकर चिंता जाहिर की गई थी, जिसे विपक्ष अपने आरोपों का मुख्य आधार बना रहा है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi Supreme Court notice) और अन्य नेताओं को नोटिस क्यों भेजा?
उत्तर 1: 12 अक्टूबर को अदालत परिसर में बिना अनुमति के Opposition leaders march निकालने और वहां भीड़ जमा करने के मामले में कोर्ट ने जवाब तलब किया है।
प्रश्न 2: मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई (CJI statement on judiciary) ने क्या सख्त टिप्पणी की?
उत्तर 2: CJI सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि न्यायपालिका (Indian Judiciary independence) को डरा-धमकाकर या राजनीतिक दबाव बनाकर कोई भी फैसले नहीं बदलवा सकता।
प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट परिसर में सुरक्षा (Supreme Court security rules) को लेकर क्या मांग की गई है?
उत्तर 3: अधिवक्ताओं ने याचिका दायर कर अदालत परिसर में राजनीतिक धरने रोकने और घटना के दिन के CCTV footage preservation के निर्देश जारी करने की मांग की है।
प्रश्न 4: विपक्ष चुनाव आयोग (Election Commission controversy) का विरोध क्यों कर रहा है?
उत्तर 4: विपक्ष का आरोप है कि निर्वाचन आयोग के भीतर काम के बंटवारे और Voter list SSR data को लेकर खुद चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद और आपत्तियां हैं।
प्रश्न 5: क्या इस मामले में केरल कांग्रेस (Contempt of court case) पर भी आरोप लगे हैं?
उत्तर 5: हाँ, अदालत की कार्यवाही के दौरान केरल कांग्रेस के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर Criminal contempt of court की कार्रवाई की मांग की गई है।
ये भी पढ़े : मेरठ का बहुचर्चित नीला ड्रम मर्डर केस : कातिल पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा, कोर्ट परिसर में लगे नारे
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें



