एजेंसी, धार। Bhojshala Temple : मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में मंगलवार को भक्ति और उत्साह का अनोखा माहौल देखने को मिला। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से हिंदू श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए निर्बाध प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद यहां पहला पूजा महोत्सव आयोजित किया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचने लगे और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा पाठ, हवन, भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन किया। कई लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की, जबकि परिसर में शंखनाद और पटाखों की आवाज से उत्सव जैसा माहौल बन गया। धार शहर की सड़कों और गलियों में भी लोगों के बीच फैसले को लेकर उत्साह देखने को मिला।
VIDEO | Dhar, Madhya Pradesh: Devotees offer prayers at Bhojshala complex amid tight security.
A day after the Madhya Pradesh High Court ruled that Bhojshala in Dhar district was a temple of Goddess Saraswati, the Archaeological Survey of India (ASI) on Saturday granted the… pic.twitter.com/edogzb6RKl
— Press Trust of India (@PTI_News) May 19, 2026
महासत्याग्रह में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि अदालत के फैसले के बाद आए पहले मंगलवार को मंदिर परिसर में महासत्याग्रह आयोजित किया गया। इस दौरान उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई जिन्होंने भोजशाला मुक्ति आंदोलन के दौरान अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और तब तक जारी रहेगा जब तक मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से वापस लाकर भोजशाला में स्थापित नहीं किया जाता। श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रतिमा की पुनर्स्थापना के बाद यह स्थान पूरी तरह से धार्मिक आस्था का केंद्र बन जाएगा।
वर्षों पुराने आंदोलन को मिली नई दिशा
अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने कहा कि धार की धर्मपरायण जनता पिछले करीब 70 वर्षों से हर मंगलवार को भोजशाला में सत्याग्रह करती आ रही है। उन्होंने इसे लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया। गुप्ता ने कहा कि अदालत के फैसले ने हिंदू पक्ष की आस्था को कानूनी मान्यता दी है, लेकिन अभी कुछ महत्वपूर्ण मांगें बाकी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने परिसर और गर्भगृह में मौजूद इस्लामिक आयतों को हटाने की भी मांग की, यह कहते हुए कि इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित होती हैं।
दोबारा खुदाई की भी उठी मांग
हिंदू पक्ष से जुड़े लोगों ने यह भी कहा कि एएसआई के सर्वे के दौरान पूरी खुदाई नहीं हो सकी थी। उनका दावा है कि परिसर के भीतर अब भी कई प्राचीन मूर्तियां और ऐतिहासिक अवशेष दबे हो सकते हैं। इसलिए दोबारा खुदाई कराकर उन मूर्तियों को बाहर निकाला जाना चाहिए। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे भोजशाला के इतिहास और धार्मिक महत्व से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। इस मांग को लेकर भी लोगों में लगातार चर्चा बनी हुई है।
श्रद्धालुओं ने जताई भावनाएं
मंदिर परिसर में पहुंचीं महिला श्रद्धालु गायत्री पुरोहित ने कहा कि वह अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि वर्षों से लोग इस दिन का इंतजार कर रहे थे और अब सभी को उस पल का इंतजार है जब मां वाग्देवी की प्रतिमा यहां स्थापित होगी। एक अन्य श्रद्धालु नवनीत जैन ने कहा कि भोजशाला मुक्ति आंदोलन सदियों पुराने संघर्ष का प्रतीक रहा है और अदालत के फैसले के बाद पूरे धार जिले में खुशी का माहौल है। लोगों को लग रहा है कि उनकी आस्था और संघर्ष को आखिरकार सम्मान मिला है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदले हालात
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने हाल ही में भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिया था। अदालत ने एएसआई के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसमें हिंदुओं को केवल मंगलवार और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई थी। यह विवाद लंबे समय से चल रहा था। हिंदू पक्ष भोजशाला को राजा भोज द्वारा निर्मित प्राचीन मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। अब मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
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