एजेंसी, ढाका। Bangladesh President Resigns : पड़ोसी देश बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से लगभग 2 वर्ष पूर्व ही अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। 76 वर्षीय शहाबुद्दीन ने अपने इस अचानक उठाए गए कदम के पीछे निरंतर बनी हुई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया है। बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब शहाबुद्दीन से उनके इस निर्णय के विषय में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पिछले कुछ समय से अनेक शारीरिक व्याधियों से जूझ रहे थे, जिसके कारण पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था।
🚨 Breaking: Bangladesh President Shahabuddin has resigned under pressure from the BNP government.
He could not complete his 5-year tenure (became President in 2024). pic.twitter.com/GAaTIGaY1T— Voice Of BD Hindus 🇧🇩 (@HinduUnityBD) July 24, 2026
संसद अध्यक्ष को सौंपा गया त्यागपत्र और संवैधानिक प्रक्रिया का प्रारंभ
बांग्लादेश के आधिकारिक राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के प्रवक्ता द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मोहम्मद शहाबुद्दीन का अधिकृत प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद भवन के लिए प्रस्थान कर चुका है। यह औपचारिक त्यागपत्र बांग्लादेश की संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सुपुर्द किया जाएगा। बांग्लादेश के संवैधानिक प्रावधानों के तहत जब तक देश में नए राष्ट्रपति का विधिवत चुनाव संपन्न नहीं हो जाता, तब तक संसद अध्यक्ष ही कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में देश के सर्वोच्च पद का दायित्व संभालेंगे। हालाँकि, राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक संसद अध्यक्ष औपचारिक रूप से त्यागपत्र स्वीकार नहीं कर लेते, तब तक इस विषय पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया जाएगा।
अप्रैल 2023 में संभाली थी कमान और ऐतिहासिक आंदोलनों के गवाह रहे शहाबुद्दीन
पूर्व में निचली अदालत के न्यायाधीश रह चुके और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में सक्रिय योगदान देने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में 5 वर्ष के निर्धारित कार्यकाल के लिए बांग्लादेश के राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की थी। उन्हें तत्कालीन संसद द्वारा इस सर्वोच्च संवैधानिक दायित्व के लिए चुना गया था। शहाबुद्दीन उन गिने-चुने प्रमुख पदाधिकारियों में से एक थे जो जुलाई और अगस्त 2024 के दौरान बांग्लादेश में हुए व्यापक छात्र आंदोलनों और भीषण राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद अपने पद पर आसीन रहे। उल्लेखनीय है कि उन ऐतिहासिक हिंसक प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार का तख्तापलट हो गया था, जिसके बाद शेख हसीना 5 अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। अब राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के इस अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की राष्ट्रीय राजनीति में सत्ता संतुलन को लेकर एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
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