लाहौर: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य के बाजौर की खार तहसील में रविवार को जमीयत उलेमा इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) की रैली में बम धमाका हो गया। इस आतंकी हमले में 45 लोगों की मौत हो गई। 200 से अधिक लोग घायल भी हो गए हैं। इस हमले में जेयूआई-एफ सीनियर लीडर मौलाना जिया उल्लाह जान के भी मारे जाने की चर्चा है। पुलिस के मुताबिक, ब्लास्ट रविवार शाम करीब 4.30 बजे हुआ। इस वक्त रैली में काफी लोग मौजूद थे। माना जा रहा है कि हमलावर पार्टी समर्थकों के बीच ही मौजूद था। इसे फिदायीन हमला माना जा रहा है। जेयूआई-एफ के चीफ मौलाना फजल ने घटना के बाद प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से बातचीत की और उन्हें तफ्सील से जानकारी दी। सरकार ने घटना की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। फजल ने समर्थकों से कहा कि आप लोग फौरन अस्पताल पहुंचें और घायलों को खून मुहैया कराएं।
इस रैली को जेयूआई-एफ के सीनियर लीडर हाफिज हमदुल्लाह संबोधित करने वाले थे। किसी वजह से वो यहां नहीं पहुंच सके। बाद में मीडिया से बातचीत में हाफिज ने कहा कि इस ब्लास्ट में करीब 45 कार्यकर्ता की जान चली गई है। मैं इस घटना की निंदा करता हूं। हमारे हौसले इस तरह के हमलों से कम नहीं होंगे। हाफिज ने आगे कहा कि इस तरह के हमले पहले भी होते रहे हैं। इनकी गहराई से जांच होनी चाहिए। हमें तो किसी तरह की सिक्योरिटी भी मुहैया नहीं कराई जाती। हम इस मसले को संसद में उठाएंगे।
पाकिस्तान पीलुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि यह हमला मुल्क को कमजोर करने की एक और साजिश है। सरकार आतंकियों से निपटने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जेयूआई-एफ कट्टर इस्लामी संगठन है। इसके तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अफगान तालिबान से करीबी रिश्ते हैं। लिहाजा इस बात की आशंका कम है कि इस इलाके में हमला तालिबान ने किया होगा। पाकिस्तान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत कराने में भी जमीयत चीफ मौलाना फजल-उर-रहमान का अहम रोल था।


