Ayodhya Ram Mandir

अयोध्या राम मंदिर कैश रूम स्कैंडल : छिपे कैमरों के हिडन विजन ने किया गबन का पर्दाफाश, एसआईटी के हाथ लगे अकाट्य डिजिटल सबूत

उत्तर प्रदेश देश/प्रदेश

एजेंसी, अयोध्या। Ayodhya Ram Mandir Cash Theft : अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित वित्तीय हेराफेरी और गबन के मामले में हर दिन चौंकाने वाले और नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे संवेदनशील मामले की गहराई से जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी को अब तक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। इस पूरे राज से पर्दा उठाने में कैश काउंटिंग रूम के भीतर गुप्त रूप से लगाए गए बेहद छोटे और छिपे हुए कैमरों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के उच्च अधिकारियों को मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे की राशि की गिनती के दौरान नकदी में बड़ी हेराफेरी होने का गहरा संदेह हुआ, तब उन्होंने बेहद सतर्कता से काम लिया। ट्रस्ट ने बिना किसी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को भनक लगे, पूरे कैश काउंटिंग रूम के अंदर अतिरिक्त निगरानी के लिए खुफिया कैमरे स्थापित करवा दिए।

सामान्य सुरक्षा कैमरों के ब्लाइंड स्पॉट का आरोपी उठाते थे फायदा

जांच के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि उस रूम में पहले से ही सामान्य सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में मौजूद थे। लेकिन वहां तैनात और नकदी की गिनती करने वाले कुछ शातिर कर्मचारियों ने उन कैमरों की कमियों को पहचान लिया था। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों के उन कोनों और क्षेत्रों (ब्लाइंड स्पॉट) की पहचान कर ली थी, जहां कैमरों की नजर सीधे नहीं पहुंच पाती थी। आरोपी कर्मचारी जानबूझकर उन्हीं जगहों का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों के लिए करते थे ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से पूरी तरह बच सकें।

रिकॉर्डिंग के दृश्य को बाधित करने के लिए अपनाते थे अनोखी तरकीब

एसआईटी की जांच प्रक्रिया में कई ऐसे चौंकाने वाले वीडियो फुटेज मिले हैं, जो आरोपियों की चालाकी को पूरी तरह उजागर करते हैं। वीडियो साक्ष्यों से पता चलता है कि कैश काउंटिंग टीम के कुछ चिन्हित सदस्य योजना के तहत काम करते थे। वे नोटों के बड़े-बड़े बंडलों को संभालते और गिनते समय जानबूझकर सामान्य सीसीटीवी कैमरों के ठीक सामने जाकर खड़े हो जाते थे। ऐसा करने से कैमरों का मुख्य दृश्य पूरी तरह बाधित हो जाता था और कैमरे के पीछे छिपी उनकी हरकतें रिकॉर्ड नहीं हो पाती थीं। लेकिन आरोपी इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि उनके ठीक पीछे और आसपास लगे गुप्त कैमरे उनकी हर एक गतिविधि की लगातार और स्पष्ट रिकॉर्डिंग कर रहे थे, जिसने आखिरकार उनके काले कारनामों को पूरी तरह कैद कर लिया।

एसआईटी के लिए सबसे मजबूत डिजिटल साक्ष्य साबित हुई खुफिया फुटेज

पुलिस और जांच अधिकारियों के अनुसार, इन छिपे हुए कैमरों से प्राप्त हुई वीडियो फुटेज वर्तमान में एसआईटी के लिए सबसे अचूक और अकाट्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत बन चुकी है। इन गोपनीय रिकॉर्डिंग्स की मदद से अब तक दर्ज किए गए तमाम गवाहों के बयानों, बैंक और वित्तीय रिकॉर्ड्स तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्यों का बारीकी से मिलान किया जा रहा है। जांचकर्ताओं को अपनी पड़ताल में कई ऐसे पुख्ता मामले और सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर इस बात की पुष्टि करते हैं कि नकदी की गिनती की प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में कैश को कथित रूप से गायब कर दूसरी दिशा में भेजा जा रहा था।

नोटों के बंडलों में अतिरिक्त करेंसी मिलाकर आपस में बांटते थे रकम

पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने जांच के तौर-तरीकों का विवरण देते हुए बताया कि एसआईटी की जांच में एक और बेहद गंभीर और अनोखा तथ्य सामने आया है। कैश काउंटिंग स्टाफ के कुछ दोषी सदस्य नोटों के प्रामाणिक बंडलों को तैयार करते समय उनमें चतुराई से अतिरिक्त करेंसी नोट शामिल कर देते थे। इसके बाद, जब हिसाब का मिलान किया जाता था, तो वे बची हुई पूरी अतिरिक्त नकदी और हेरफेर की गई राशि को आपस में बराबर-बराबर बांट लेते थे। एसआईटी अब इन सभी डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और शिकंजा कसने की तैयारी में है।

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