एजेंसी, गुवाहाटी। Assam UCC Law : असम की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की इस महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य में अब विवाह, तलाक और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों के लिए एक समान कानून होगा। हालांकि, सरकार ने राज्य की जनजातीय आबादी की सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस नए कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने का फैसला किया है।
The first sitting of the #AssamCabinet of NDA 3.0 has approved the draft UCC Bill. A key promise of our Sankalpa Patra is now one step closer to being fulfilled.
Rituals and customs practised by the people of Assam will remain outside the scope of the UCC in the state. pic.twitter.com/zvB35oqQhe
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) May 13, 2026
26 मई को विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक आगामी 26 मई को नई विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों के बाद अब असम भी इस कतार में शामिल हो गया है, लेकिन असम का मॉडल यहां की क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है।
आदिवासियों की परंपराओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण
असम सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी के लागू होने से राज्य की आदिवासी आबादी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, असम के विभिन्न समुदायों द्वारा पालन किए जाने वाले पारंपरिक रीति-रिवाज, सांस्कृतिक प्रथाएं और जनजातीय परंपराएं इस कानून के प्रभाव से मुक्त रहेंगी। सरकार का उद्देश्य आधुनिक कानून को लागू करने के साथ-साथ राज्य की विविध सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी है। इस छूट के माध्यम से जनजातीय समाज की स्वायत्तता को बरकरार रखा गया है।
विवाह और उत्तराधिकार के नियमों में होगा बदलाव
समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद राज्य में उत्तराधिकार, विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप (सहजीवन) जैसे सामाजिक मामलों को विनियमित किया जाएगा। इस कानून के तहत अब इन सभी मामलों का अनिवार्य पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी और विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी। पंजीकरण की इस अनिवार्य व्यवस्था से कानूनी विवादों को सुलझाने में भी आसानी होगी।
चुनावी वादों को पूरा करने की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक के इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह राज्य के विकास और सामाजिक सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि असम सरकार ने यूसीसी को इस तरह से ढाला है जिससे समाज के सभी वर्गों के हितों का संतुलन बना रहे। विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।
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