एजेंसी, नई दिल्ली। Agnipath Scheme 75 Percent Permanent : केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में देश के युवाओं के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘अग्निपथ योजना’ में आने वाले समय में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंगों—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—ने सरकार के समक्ष अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति (रिटेंशन) की सीमा को मौजूदा प्रतिशत से काफी अधिक बढ़ाने का एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, 4 वर्ष की अल्पकालिक सेवा पूरी करने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही सेना में स्थायी रूप से रिटेन किया जाता है, जबकि शेष जवानों को सेवामुक्त कर दिया जाता है। अब तीनों सेनाओं की मांग पर रक्षा मंत्रालय इस सीमा को बढ़ाने के प्रस्ताव पर बहुत ही गंभीरता से विचार-विमर्श कर रहा है। यदि इस नए प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो देश सेवा में जुटे हजारों अग्निवीरों को परमानेंट नौकरी का बेहतरीन अवसर मिलेगा और भारतीय सेना को भी लंबे समय के लिए पूरी तरह ट्रेंड और अनुभवी जांबाज मिल सकेंगे।
जानिए क्या है वर्तमान अग्निपथ योजना और इसके नियम
देश की रक्षा प्रणालियों को आधुनिक और युवा बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने जून 2022 में इस योजना का आगाज किया था। इसके तहत 17.5 वर्ष से लेकर 21 वर्ष तक की आयु के योग्य युवाओं को थलसेना, नौसेना और वायुसेना में केवल 4 वर्ष की अवधि के लिए भर्ती किया जाता है, जिन्हें ‘अग्निवीर’ का नाम दिया गया है। वर्तमान में लागू व्यवस्था के मुताबिक, जब कोई बैच अपनी 4 साल की सेवा पूरी कर लेता है, तो उनमें से महज 25 प्रतिशत उत्कृष्ट जवानों को उनकी मेरिट, मेडिकल फिटनेस और सैन्य आवश्यकताओं के कड़े पैमानों के आधार पर परमानेंट कर दिया जाता है। ये चयनित जवान आगे कम से कम 15 वर्ष तक सेना में अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं, जहां उन्हें मासिक वेतन के तौर पर करीब 40 हजार से 60 हजार रुपये तक की राशि दी जाती है। वहीं दूसरी तरफ, बाकी बचे 75 प्रतिशत जवानों को विदाई के समय लगभग 11.71 लाख रुपये का ‘सेवा निधि पैकेज’ देकर कार्यमुक्त कर दिया जाता है। इस पूरी योजना का मुख्य विजन सेना की औसत आयु को कम करना, बजट में पेंशन के बढ़ते खर्च को नियंत्रित करना और आधुनिक हथियारों व उन्नत तकनीक पर निवेश बढ़ाना था।
सेनाओं की नई मांग और प्रस्तावित रिटेंशन का पूरा गणित
मौजूदा गाइडलाइंस के मुताबिक किसी भी बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत जवानों को ही रेगुलर सर्विस में रखने का प्रावधान है, लेकिन अब तीनों सेनाओं ने अपनी-अपनी ऑपरेशनल जरूरतों और तकनीकी आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद सरकार को इस तय सीमा में भारी बढ़ोतरी करने का सुझाव दिया है। इस नए कूटनीतिक प्रस्ताव के तहत भारतीय नौसेना ने सबसे अधिक यानी करीब 75% तक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की वकालत की है। वहीं दूसरी तरफ, भारतीय थलसेना और भारतीय वायुसेना ने भी अपने यहाँ रिटेंशन की इस सीमा को बढ़ाकर 50% तक करने का मजबूत प्रस्ताव रखा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा खाका अभी विचार-अधीन है और रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के स्तर पर इस पर गहन समीक्षा की जा रही है, जिसके बाद ही कैबिनेट की अंतिम मुहर लगेगी।
आखिर क्यों उठी परमानेंट जवानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत
सशस्त्र बलों द्वारा इस सीमा को बढ़ाने के पीछे कई बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहला कारण यह है कि सेना के कई अत्यधिक तकनीकी और संवेदनशील पदों पर किसी भी नए जवान को पूरी तरह एक्सपर्ट बनने में कम से कम 3 से 4 वर्ष का समय लग जाता है, विशेषकर नौसेना की तकनीकी शाखाओं में ट्रेनिंग का शेड्यूल काफी लंबा होता है। ऐसे में ठीक उसी समय जब जवान पूरी तरह प्रशिक्षित हो जाता है, उसका 4 साल का कार्यकाल खत्म हो जाता है, जिससे सेना को उसके प्रशिक्षण पर खर्च किए गए संसाधनों का पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसके अलावा, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से तीनों सेनाओं में आधुनिक तकनीकों, साइबर प्रणालियों और अत्यधिक एडवांस हथियारों का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है, जिनके संचालन के लिए लंबी अवधि के अनुभवी सैनिकों की जरूरत महसूस हो रही है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान फील्ड में तैनात अग्निवीरों का प्रदर्शन बेहद शानदार और सकारात्मक रहा था, जिससे यह साबित हुआ कि लंबे समय तक मोर्चे पर रहने वाले जवान विपरीत हालातों में अधिक प्रभावी होते हैं। साथ ही, वर्तमान में सेना के भीतर लगभग 1.8 लाख जवानों की बड़ी कमी चल रही है, जिसे अगले 2 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है, ऐसे में अनुभवी अग्निवीरों को रोकना इस कमी को पूरा करने का सबसे सटीक उपाय है।
प्रस्ताव खारिज होने की स्थिति में सेना का बैकअप प्लान
यदि किसी कारणवश सरकार इस रिटेंशन सीमा को बढ़ाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी नहीं देती है, तो भी सैन्य कमांडरों ने देश की सुरक्षा से समझौता न करने के लिए एक वैकल्पिक रणनीति तैयार कर रखी है। इस बैकअप प्लान के तहत सेना अपनी कुछ बेहद विशेष और महत्वपूर्ण इकाइयों में अधिक अनुभवी और रिटेन किए गए जवानों को तैनात करने की योजना पर काम करेगी। उदाहरण के तौर पर ‘भैरव बटालियन’ जैसी घातक और विशिष्ट ऑपरेशन्स को अंजाम देने वाली यूनिटों में नए रंगरूटों के बजाय केवल परमानेंट किए गए अनुभवी अग्निवीरों को ही रखा जाएगा, जबकि सामान्य इन्फैंट्री यूनिट्स में नए लड़कों की भर्ती प्रक्रिया चलती रहेगी। इस तरह कुल रिटेंशन का आंकड़ा भले ही 25 प्रतिशत बना रहे, लेकिन देश की सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण अग्रिम चौकियों पर हमेशा तजुर्बेकार सैनिक तैनात रहेंगे।
शहीद और दिव्यांग जवानों के परिवारों के लिए भी हो सकते हैं बड़े ऐलान
इस महायोजना की समीक्षा के दौरान सरकार केवल नौकरी की अवधि बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रही है, बल्कि अग्निवीरों के कल्याण से जुड़े दो अन्य बेहद संवेदनशील और बड़े प्रस्तावों पर भी मंथन किया जा रहा है। इसमें पहला अहम प्रस्ताव यह है कि यदि कोई अग्निवीर देश की रक्षा करते हुए ड्यूटी के दौरान वीरगति को प्राप्त होता है, तो उसके परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए आजीवन वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। इसके साथ ही, दूसरा प्रस्ताव यह है कि सेवा के दौरान यदि कोई जवान किसी दुर्घटना या युद्ध में दिव्यांग हो जाता है, तो उसे जीवनभर के लिए पूरी तरह मुफ्त सैन्य चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य अग्निपथ योजना को लेकर समाज और युवाओं के मन में उठने वाली चिंताओं को पूरी तरह दूर करना है।
देश की रक्षा व्यवस्था और नई भर्तियों पर क्या पड़ेगा इसका प्रभाव
अगर रक्षा मंत्रालय द्वारा इस संशोधित प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार कर लिया जाता है, तो इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय सेना को हर संकट से निपटने के लिए बेहद परिपक्व और अनुभवी फौज मिलेगी और युवाओं को लंबे समय तक देश सेवा का सुरक्षित करियर मिल सकेगा। हालांकि, इसके सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि ज्यादा जवानों को परमानेंट करने से सरकार पर भविष्य में पेंशन और भत्तों का वित्तीय बोझ एक बार फिर बढ़ सकता है, जिससे बचने के लिए ही मूल योजना लाई गई थी। इसके अलावा, फिक्स्ड पदों पर पुराने जवानों के बने रहने से हर साल होने वाली नई भर्तियों की संख्या पर भी आंशिक असर पड़ सकता है, लेकिन इन सबके बीच भारतीय सेना पहले से ही अगले वर्ष के भीतर लगभग 90 हजार नई भर्तियां करने की अपनी मेगा योजना पर पूरी ताकत से काम कर रही है।
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