US attack on Iran

अमरीकी एयर स्ट्राइक से दहला ईरान : खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच पश्चिम एशिया में महायुद्ध का खतरा

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका ईरान

एजेंसी, दुबई। US attack on Iran : पश्चिम एशिया के अशांत क्षेत्र में एक बार फिर से बेहद विनाशकारी और व्यापक सैन्य टकराव की आशंका काफी ज्यादा गहरा गई है। अमरीकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में तीन बड़े वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों का कड़ा बदला लेते हुए बुधवार को तड़के ईरान की धरती पर बेहद भीषण और विनाशकारी जवाबी हवाई हमले किए हैं। इस बड़े सैन्य एक्शन के साथ ही अमरीका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमरीकी डॉलर के जरिए कच्चे तेल का व्यापार करने की अनुमति देने वाले विशेष लाइसेंस को भी तत्काल प्रभाव से पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अमरीका की इस चौतरफा सैन्य और आर्थिक चोट के तुरंत बाद ईरान ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दी हैं, जिसके बाद इन दोनों देशों ने बुधवार सुबह अपनी एडवांस हवाई रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह सक्रिय कर देश भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

अमरीकी सेना का ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला और भारी तबाही

अमरीकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, अमरीकी वायुसेना और नौसेना के बलों ने 7 जुलाई को ईरान के खिलाफ रणनीतिक और आक्रामक हमलों का एक नया और बेहद भीषण दौर पूरा किया है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में व्यापारिक पोतों पर हुए हमलों की ईरान से भारी कीमत वसूलने के लिए अमरीकी लड़ाकू विमानों ने सटीक दूरी से मार करने वाले आधुनिक हथियारों के जरिए ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया। इस भीषण बमबारी में अमरीकी बलों ने ईरान की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों, रडार स्टेशनों, तटीय निगरानी तंत्रों सहित जमीन से हवा और जहाज-रोधी मिसाइल दागने वाले ठिकानों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया है। इसके अलावा अमरीकी हमलों में ईरानी अर्द्धसैनिक बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 60 से अधिक उन छोटी नौकाओं को भी समुद्र में ही नष्ट कर दिया गया, जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में गुजरने वाले विदेशी जहाजों को परेशान करने और उन पर कब्जा करने में मुख्य भूमिका निभाती थीं।

आर्थिक मोर्चे पर अमरीका की बड़ी चोट और ईरान का गुप्त तेल व्यापार

एक शीर्ष अमरीकी सैन्य अधिकारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को किया गया यह सैन्य एक्शन आज से 10 दिन पहले किए गए हमलों की तुलना में करीब 4 से 5 गुना अधिक शक्तिशाली और विनाशकारी था। खुद ईरान के सरकारी मीडिया और समाचार एजेंसियों ने भी अपने देश के प्रमुख तटीय शहरों बंदर अब्बास, केशम और सिरिक में हुए बेहद भीषण धमाकों और भारी नुकसान की आधिकारिक पुष्टि की है। सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमरीका ने पूर्व में हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान को खुले वैश्विक बाजार में कच्चा तेल बेचने के लिए दी गई विशेष कानूनी ढील और लाइसेंस को भी तुरंत रद्द कर दिया है। इस लाइसेंस के मिल जाने से ईरान को कई वर्षों के कड़े प्रतिबंधों के बाद पहली बार वैध रूप से अपना तेल बेचने की अनुमति मिली थी। वाशिंगटन को लंबे समय से यह खुफिया इनपुट मिल रहा था कि ईरान इस लाइसेंस की आड़ में चोरी-छिपे चीन को बेहद कम दामों पर प्रतिबंधित तेल की बड़ी खेप सप्लाई कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में इन तीन बड़े वाणिज्यिक पोतों को बनाया गया था निशाना

यूएस सेंट्रल कमांड ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में उन कारणों का खुलासा किया है जिसकी वजह से अमरीका को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से शांतिपूर्वक गुजर रहे तीन बड़े वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाया था। इनमें सबसे पहला पोत मार्शल आइलैंड्स के झंडे के साथ यात्रा कर रहा कतरी जहाज था, जो ओमान के समुद्री मार्ग से गुजर रहा था और ईरानी हमले के बाद इसमें भीषण आग लग गई थी। इसके अलावा दूसरा जहाज सऊदी अरब के झंडे वाला एक विशाल तेल टैंकर था और तीसरा लाइबेरिया के झंडे वाला एक अन्य वाणिज्यिक पोत था। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, कतरी जहाज के अलावा बाकी दोनों जहाजों को भी इस हमले में आंशिक रूप से काफी नुकसान पहुंचा है, लेकिन राहत की बात यह रही कि इनमें किसी भी नाविक की जान नहीं गई और वे सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य मार्ग पर आगे बढ़ गए।

सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच उमड़ा भारी जनआक्रोश

पश्चिम एशिया में युद्ध की यह नई चिंगारी ऐसे संवेदनशील समय में भड़की है जब ईरान के भीतर उनके सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम और शोक सभाएं चल रही हैं। अयातुल्ला खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआती शुरुआत में अमरीका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों में मारे गए थे। वैश्विक कूटनीतिज्ञों को यह उम्मीद थी कि शोक की इस लंबी अवधि के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव कुछ कम रहेगा, लेकिन तेहरान की सड़कों पर अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी लाखों की भीड़ ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की खुलेआम हत्या करने का आह्वान किया। हालांकि, बुधवार को जब अमरीकी विमान ईरान पर बम बरसा रहे थे, उस वक्त राष्ट्रपति ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किये के दौरे पर मौजूद थे।

शांति समझौता पूरी तरह खटाई में पड़ा और ईरान ने दी गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी

इस ताजा और भीषण सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध को रोकने के लिए हुए पूर्व अंतरिम समझौते के पूरी तरह से टूटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के ठीक बाद दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह से खोलने और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा लगाम लगाने के लिए अंतिम दौर की द्विपक्षीय वार्ता शुरू होने वाली थी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमरीकी हवाई हमलों की घोर निंदा करते हुए इसे पूर्व में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के पैराग्राफ 1 और पैराग्राफ 2 का बेहद गंभीर उल्लंघन करार दिया है। ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने अमरीकी कार्रवाई को एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी कृत्य बताते हुए वाशिंगटन को इसका बेहद निर्णायक और कठोर जवाब देने की खुली चेतावनी दी है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि अमरीका की धौंस, दादागिरी और आर्थिक उगाही का दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है और इस तरह के हमलों से कोई नतीजा नहीं निकलेगा क्योंकि ईरानी कौम किसी के आगे झुकती नहीं है।

खाड़ी देशों बहरीन और कुवैत में गूंजे सायरन और सेनाएं हाई अलर्ट पर

अमरीका द्वारा किए गए हवाई हमलों के तुरंत बाद बौखलाए ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत उन पड़ोसी खाड़ी देशों को अपनी मिसाइलों का निशाना बनाया है जहां अमरीकी सेना के बड़े सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। बहरीन, जो कि अमरीकी नौसेना के बेहद शक्तिशाली और रणनीतिक पांचवें बेड़े का मुख्य मुख्यालय माना जाता है, वहां बुधवार को तड़के संभावित मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले हवाई सायरन लगातार गूंजते रहे जिससे नागरिकों में दहशत फैल गई। दूसरी ओर कुवैत की सेना ने भी सुबह एक आपातकालीन आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनकी अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां और पैट्रियट मिसाइलें आसमान से आते हुए संभावित ईरानी खतरों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट करने के काम में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।

होर्मुज जलमार्ग के मालिकाना हक और नियंत्रण को लेकर पुराना विवाद

होर्मुज जलडमरूमध्य का यह पूरा इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया का एक बहुत बड़ा कच्चा तेल और गैस का व्यापार इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। पूर्व में हुए अंतरिम समझौते के तहत दोनों देश इस बात पर सहमत हुए थे कि अगले 60 दिनों तक तमाम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या टैक्स के यहां से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा। हालांकि, तेहरान प्रशासन इस पूरे समुद्री मार्ग पर सिर्फ अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है और भविष्य में यहां से गुजरने वाले सभी विदेशी जहाजों से भारी शुल्क वसूलने की जिद पर अड़ा हुआ है, जिसका अमरीका और खाड़ी के तमाम समृद्ध अरब देश लंबे समय से कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस ताजा और भीषण सैन्य कार्रवाई ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को एक बार फिर से बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।

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