Badrinath temple

बद्रीनाथ धाम दान घोटाला : सीएम धामी ने वित्तीय धोखाधड़ी को बताया अक्षम्य अपराध, आरोपी अधिकारी पर कड़ा कानूनी एक्शन

उत्तराखंड राष्ट्रीय

एजेंसी, देहरादून। Badrinath temple scam : उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध और हिंदुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र श्री बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे तथा वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक बड़े विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के निलंबित कर्मचारी और अध्यक्ष कार्यालय के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए इसे एक अक्षम्य अपराध करार दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि पवित्र धाम के धन में हेराफेरी करना गोहत्या जैसा महापाप है और इस कृत्य में शामिल किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

जांच समिति की शुरुआती रिपोर्ट के बाद निलंबन और कानूनी एक्शन

पुलिस प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मंगलवार देर रात बद्रीनाथ थाने में आरोपी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस कार्रवाई से महज कुछ घंटे पहले ही श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की 4 सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। इस शुरुआती जांच में प्रथम दृष्टया बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और पैसों के गबन की पुष्टि हुई थी, जिसके तुरंत बाद आरोपी कर्मचारी को पद से निलंबित कर दिया गया था। मंदिर समिति द्वारा पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि 2 जुलाई को सोशल मीडिया के माध्यम से इस घोटाले के आरोप सामने आए थे, जिसकी जांच करने पर शुरुआती साक्ष्यों में यह पाया गया कि मंदिर का पवित्र धन कथित रूप से उक्त कर्मचारी अपने साथ लेकर चला गया था। इसी आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 306 और धारा 316 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्चस्तरीय कमेटी गठित और 15 दिनों का अल्टीमेटम

इस संवेदनशील मामले की गंभीरता और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश के बाद शासन द्वारा गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय विशेष उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। उत्तराखंड पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार यह विशेष समिति बद्रीनाथ मंदिर में आने वाले दान-चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी तमाम कथित गड़बड़ियों की अत्यंत बारीकी और विस्तार से जांच करेगी। इस समिति को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगामी 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है ताकि सच जल्द से जल्द सामने आ सके।

मुख्यमंत्री धामी ने घोटाले को बताया माता-पिता की हत्या जैसा महापाप

हरिद्वार में मीडियाकर्मियों और पत्रकारों से औपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गुस्सा इस धार्मिक भ्रष्टाचार पर साफ तौर पर दिखाई दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मामले में पुलिस ने कानूनी रिपोर्ट दर्ज कर ली है और उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच भी युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई है। उन्होंने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए कहा कि यह गोहत्या जैसा भयानक पाप है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जिस प्रकार सनातन धर्म में अपने माता-पिता की हत्या करना सबसे बड़ा और अक्षम्य महापाप माना जाता है, ठीक उसी तरह भगवान के चरणों में अर्पित चढ़ावे की चोरी करना भी एक अक्षम्य सामाजिक और कानूनी अपराध है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि कानून बिना किसी दबाव के पूरी निष्पक्षता से अपना काम करेगा और दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जो नजीर बनेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जांच समिति से भविष्य में मंदिर प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रूप से व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष सुझाव भी मांगे हैं।

राजनीतिक गलियारों में गरमाया मुद्दा और विपक्ष ने की न्यायिक जांच की मांग

बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थान से जुड़े इस वित्तीय विवाद के सामने आने के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में भी पूरी तरह से गरमाहट आ गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य की वर्तमान सरकार को चौतरफा घेरना शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने या फिर विधानसभा की संयुक्त समिति से इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में चढ़ावे को लेकर पहले भी विवाद उठते रहे हैं और अब बद्रीनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के साथ खिलवाड़ के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे के साथ-साथ बहुमूल्य आभूषणों, सोने-चांदी और अनमोल रत्नों के रिकॉर्ड की भी गहनता से पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि देश-विदेश के करोड़ों भक्तों का भरोसा कायम रह सके।

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