Ahmedabad Blast Case

गुजरात हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा रखी बरकरार

गुजरात देश/प्रदेश

एजेंसी, अहमदाबाद। 2008 Ahmedabad Blast Case : गुजरात उच्च न्यायालय ने साल 2008 में हुए विनाशकारी अहमदाबाद सीरियल बम विस्फोट मामले में मंगलवार को एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस दिल दहला देने वाले आतंकी मामले के 38 मुख्य दोषियों को निचली अदालत द्वारा पूर्व में दी गई फांसी (मौत की सजा) को पूरी तरह से बरकरार रखा है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मामले के 11 अन्य सह-आरोपियों को मिली उम्रकैद की पुरानी सजा पर भी अपनी मुहर लगा दी है। इस बेहद संवेदनशील और बड़े मामले के लोक अभियोजक अमित पटेल ने फैसले की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर मार्च 2025 से उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष रोजाना नियमित रूप से सुनवाई की जा रही थी। मंगलवार को दोनों पक्षों की लंबी कानूनी बहस और साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद डिवीजन बेंच ने अपना यह अंतिम फैसला सुनाकर आतंक के खिलाफ देश की जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत किया है।

सरायमीर का मुफ्ती अबू बशर था इस खौफनाक आतंकी साजिश का मुख्य सूत्रधार

गुजरात पुलिस की आतंकवाद निरोधी इकाई और देश की खुफिया एजेंसियों द्वारा की गई बेहद लंबी और वैज्ञानिक जांच में यह कड़वा सच सामने आया था कि गुजरात को दहलाने वाली इस पूरी खौफनाक आतंकी साजिश का मुख्य सूत्रधार उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के सरायमीर थाना क्षेत्र के बीनापार गांव का निवासी मुफ्ती अबू बशर था। अबू बशर ने ही प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ मिलकर इन सिलसिलेवार धमाकों की पूरी रूपरेखा तैयार की थी और स्थानीय युवाओं को इसके लिए तैयार किया था। जांच के दौरान जैसे ही इस खौफनाक साजिश में अबू बशर का नाम पुख्ता तौर पर सामने आया, देश की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुट गईं। सुरक्षा एजेंसियों ने आजमगढ़ से लेकर लखनऊ तक एक बेहद कड़ा और कूटनीतिक जाल बिछाया और अंततः गहन पड़ताल के बाद मुफ्ती अबू बशर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से धर दबोचा गया, जिसके बाद इस पूरे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हो सका।

फांसी की सजा पाने वाले 38 दोषियों में आजमगढ़ के 7 खूंखार आतंकी शामिल

इस बड़े अदालती फैसले के बाद उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ जिला एक बार फिर देश भर की सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया की सुर्खियों में आ गया है, जिसे एक समय पर देश के भीतर आतंकवाद की नर्सरी के रूप में देखा जाने लगा था। गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा जिन 38 खूंखार दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा गया है, उनमें से 7 कुख्यात आतंकी अकेले आजमगढ़ जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। अदालत द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के मुताबिक, फांसी का फंदा पाने वाले आजमगढ़ के इन आतंकियों में मुख्य साजिशकर्ता मुफ्ती अबुल बशर (निवासी बीनापारा, सरायमीर), मोहम्मद सैफ (निवासी संजरपुर, सरायमीर), आरिफ मिर्जा नसीम (निवासी संजरपुर, सरायमीर), आरिफ बदर (निवासी इसरौली, सरायमीर), सैफुल रहमान (निवासी बदरका), मोहम्मद जीशान (निवासी बाज बहादुर) सहित एक अन्य स्थानीय आतंकी का नाम शामिल है।

महज 70 मिनट के भीतर हुए 21 धमाकों से कांप उठा था पूरा गुजरात

साल 2008 में हुए इस आतंकी हमले की भयावहता आज भी देश के नागरिकों के दिलों में खौफ पैदा कर देती है। तारीख 26 जुलाई 2008 को गुजरात के सबसे बड़े और प्रमुख व्यावसायिक शहर अहमदाबाद में आतंकवादियों ने एक बेहद सोची-समझी कूटनीति के तहत महज 70 मिनट के भीतर एक के बाद एक कुल 21 अलग-अलग शक्तिशाली बम धमाके कर पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था। इन सिलसिलेवार बम विस्फोटों की तीव्रता इतनी भयानक थी कि इसमें 56 बेकसूर नागरिकों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि लगभग 200 से अधिक आम लोग इस हादसे में गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हो गए थे। इस वीभत्स और ऐतिहासिक आतंकी घटना के बाद सुरक्षा बलों ने कुल 80 आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह और मर्डर सहित विभिन्न कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

पुख्ता सबूतों के अभाव में कुछ वर्ष पूर्व बरी हो चुके हैं तीन अन्य आरोपी

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट की इस बेहद लंबी कूटनीतिक और कानूनी अदालती प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से हजारों पन्नों के डाक्यूमेंट्स और सैकड़ों चश्मदीद गवाहों के बयान कोर्ट के समक्ष पेश किए गए। हालांकि, इस मामले की लंबी सुनवाई के दौरान कुछ वर्ष पूर्व इसी केस से जुड़े तीन अन्य आरोपियों हबीब अहमद, शाकिब निसार और जाकिर शेख को अदालत ने उनके खिलाफ कोई भी पुख्ता और ठोस सबूत न मिलने के कारण संदेह का लाभ देते हुए पूरी तरह से बरी कर दिया था। मंगलवार को उच्च न्यायालय का यह अंतिम आदेश आने के बाद से ही आजमगढ़ के संजरपुर, सरायमीर और बदरका जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। सजा की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद से ही इन आरोपितों के पैतृक गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है, हालांकि अभी तक दोषियों के परिजनों की तरफ से इस कानूनी फैसले पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अंडरवर्ल्ड डॉन और आतंकवाद से पुराना रहा है आजमगढ़ का कूटनीतिक कनेक्शन

भारत की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का नाम आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड के मामलों में बार-बार और बेहद प्रमुखता से सामने आता रहा है। जिले के संजरपुर और सरायमीर जैसे विशेष ग्रामीण क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति और कुछ गुमराह युवाओं के कारण सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हमेशा से टॉप पर रहे हैं। मुंबई अंडरवर्ल्ड के कुख्यात डॉन अबू सलेम से लेकर अंतरराष्ट्रीय वांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम तक के खूंखार गुर्गों और उनके संपर्कों की कूटनीतिक और आपराधिक कहानियां इसी आजमगढ़ की धरती पर पूर्व में लिखी और कानून द्वारा मिटाई जा चुकी हैं। अहमदाबाद का यह भीषण सीरियल बम धमाका भी इसी पुरानी आपराधिक कड़ी का एक बेहद अहम और खौफनाक हिस्सा माना जाता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय का यह सख्त और ऐतिहासिक फैसला न केवल गुजरात बल्कि पूरे भारत देश के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है, जो यह साफ संदेश देता है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाले आतंकवादियों के खिलाफ देश का कानून हमेशा अत्यंत कड़ा और कठोर रुख अपनाएगा।

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