एजेंसी, नई दिल्ली। Deepak Gehlawat CBI Bribery Case : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने कथित रिश्वतखोरी और जांच को प्रभावित करने के आरोपों से जुड़े एक मामले में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी दीपक गहलावत को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नकली दवा निर्माण से जुड़े एक मामले में कथित रूप से राहत दिलाने और जांच के परिणामों को प्रभावित कराने के नाम पर बड़ी रकम की मांग की गई थी। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक और जांच व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
#BREAKING: Haryana-cadre IPS officer Deepak Gehlawat has been sent to one-day CBI custody by the Rouse Avenue Court in connection with an alleged ₹3 crore bribery case linked to a fake medicines racket investigation. The CBI alleges Gehlawat promised to use his influence to sway… pic.twitter.com/PQueWNYSRL
— IANS (@ians_india) July 1, 2026
जांच में राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार मामला उस समय का है जब दीपक गहलावत नागर विमानन महानिदेशालय में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने एक कारोबारी को जांच एजेंसी की कार्रवाई से राहत दिलाने और मामले में अनुकूल स्थिति बनाने का भरोसा दिया था। इसके बदले कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप सामने आया है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित संपर्क और प्रभाव का उपयोग किस स्तर तक किया गया।
नकली दवा गिरोह की जांच से जुड़ा है मामला
प्रारंभिक जांच में यह मामला नकली दवा निर्माण और उससे जुड़े नेटवर्क की जांच से संबंधित बताया गया है। जांच के दायरे में आए कारोबारी एन. राजा का नाम इस प्रकरण में सामने आया है। एजेंसी का आरोप है कि कारोबारी को जांच में राहत दिलाने और कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर प्रभावशाली संपर्कों का दावा किया गया। इसी प्रक्रिया में बड़ी राशि की मांग का आरोप दर्ज किया गया।
पहले भी हुई थीं गिरफ्तारियां
यह मामला हाल के समय में चलाए गए विशेष अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है। इससे पहले जांच एजेंसी इस प्रकरण में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से जुड़े निरीक्षक प्रदीप सिंह और कथित बिचौलिए राजकुमार को भी गिरफ्तार कर चुकी है। इन गिरफ्तारियों के बाद एजेंसी ने पूरे मामले की परतें खोलने के लिए जांच का दायरा और बढ़ा दिया था।
कई लोगों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी
जांच एजेंसी ने इस मामले में आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत, निरीक्षक प्रदीप सिंह, कथित बिचौलिए राजकुमार और कारोबारी एन. राजा समेत अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
कथित नेटवर्क और प्रभाव तंत्र की हो रही पड़ताल
जांच एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह मामला केवल रिश्वत मांगने तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था। एजेंसी उन सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है जिन पर जांच को प्रभावित करने, संपर्कों का इस्तेमाल करने या बिचौलिया व्यवस्था के माध्यम से लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या ऐसे मामलों में पहले भी इसी तरह के तौर-तरीके अपनाए गए थे।
प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच संस्थाओं पर जनविश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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