Vaibhav Suryavanshi

भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका में मचाया तबाही का तूफान, महज 11 गेंदों में अर्धशतक जड़कर ध्वस्त किया 20 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड

क्रिकेट खेल

एजेंसी, कोलंबो। Vaibhav Suryavanshi : खेल की दुनिया में अक्सर यह कहा जाता है कि सबसे सटीक और करारा जवाब जुबान से नहीं बल्कि मैदान पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन से दिया जाता है। इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है इंडिया ए के बेहद प्रतिभावान और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने। श्रीलंका की धरती पर खेली जा रही त्रिकोणीय श्रृंखला के बेहद महत्वपूर्ण फाइनल मुकाबले में इस महज 15 साल के उभरते हुए खिलाड़ी ने विरोधी टीम के गेंदबाजों के छक्के छुड़ाते हुए एक ऐसी आक्रामक और ऐतिहासिक पारी खेली, जिसने न केवल विपक्षी खेमे को पूरी तरह खामोश कर दिया बल्कि क्रिकेट इतिहास की रिकॉर्ड बुक को भी हिलाकर रख दिया।

मैदान की बहस और तानों का बल्ले से दिया मुंहतोड़ जवाब

इस बड़े फाइनल मुकाबले से ठीक पहले वाले मैच में इंडिया ए की क्रिकेट टीम को एक बेहद रोमांचक सुपर ओवर के मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस पिछले मैच के दौरान वैभव सूर्यवंशी का बल्ला पूरी तरह शांत रहा था और वह कोई बड़ा स्कोर नहीं बना पाए थे। उनकी इस असफलता के बाद श्रीलंका ए क्रिकेट टीम के कुछ खिलाड़ियों ने युवा वैभव पर मैदान के बीच में ही तीखे तंज कसे थे। देखते ही देखते यह पूरा मामला मैदान पर गरमागरम बहस और आपस में हल्की धक्का-मुक्की तक पहुंच गया था। श्रीलंकाई खिलाड़ियों के इस खराब बर्ताव का बदला लेने के लिए वैभव ने फाइनल मैच में एक अलग ही रूप धारण किया। उन्होंने बिना एक भी शब्द बोले मैदान पर कदम रखा और पहली ही गेंद से श्रीलंकाई गेंदबाजों पर चौकों-छक्कों की बरसात करते हुए अपने बल्ले से ऐसा करारा जवाब दिया कि विरोधी टीम के खिलाड़ी मैदान पर ही बेबस नजर आने लगे।

महज 11 गेंदों में अर्धशतक ठोककर रचा नया कीर्तिमान

इस खिताबी मुकाबले में बल्लेबाजी करने उतरे वैभव सूर्यवंशी बिल्कुल अलग ही इरादे से आए थे। उन्होंने मैदान के चारों तरफ हवाई शॉट खेलते हुए सिर्फ 11 गेंदों के भीतर ही अपना तूफानी अर्धशतक पूरा कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने का एक नया और अटूट विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया। अर्धशतक पूरा करने के बाद भी वैभव का बल्ला थमा नहीं और वह लगातार गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते रहे। उन्होंने इस मुकाबले में कुल 29 गेंदों का सामना करते हुए ताबड़तोड़ 94 रनों की एक बेहद विस्फोटक पारी खेली। अपनी इस अद्भुत पारी के दौरान उन्होंने 10 गगनचुंबी चौके और 8 गजब के छक्के लगाए। उनके खेलने की रफ्तार और खतरनाक स्ट्राइक रेट ने श्रीलंकाई गेंदबाजों की मानसिक हालत पूरी तरह खराब कर दी। हालांकि वैभव अपने इस ऐतिहासिक शतक से महज 6 रन दूर रह गए और आउट हो गए, लेकिन तब तक उनकी इस जादुई पारी ने पूरे मैच का पासा पलटकर रख दिया था और भारतीय टीम की जीत की राह बेहद आसान कर दी थी।

खराब फॉर्म पर सवाल उठाने वाले आलोचकों की बोलती हुई बंद

इस श्रृंखला के पिछले चार मुकाबलों में कोई भी बड़ी पारी न खेल पाने के कारण वैभव सूर्यवंशी लगातार खेल समीक्षकों और आलोचकों के निशाने पर चल रहे थे। क्रिकेट के कई जानकार उनकी काबिलियत और टीम में उनकी जगह पर तरह-तरह के सवाल खड़े कर रहे थे। लेकिन फाइनल जैसे बड़े और दबाव वाले मैच में खेली गई इस ऐतिहासिक और तूफानी पारी ने उनके सभी आलोचकों के मुंह पर हमेशा के लिए ताला लगा दिया है। वैभव ने यह साबित कर दिया कि उनमें बड़े मैचों का दबाव झेलने और टीम को अकेले दम पर जीत दिलाने की अद्भुत क्षमता मौजूद है।

अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवा बिखेरने को तैयार यह उभरता सितारा

इस त्रिकोणीय श्रृंखला की शानदार समाप्ति के बाद अब वैभव सूर्यवंशी का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी धाक जमाना है। वह जल्द ही भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ी तिलक वर्मा की कप्तानी में आयरलैंड का दौरा करने वाली भारतीय टीम के साथ रवाना होंगे। खेल के गलियारों में ऐसी पूरी संभावना जताई जा रही है कि इस दौरे पर वैभव को अपने अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर की शुरुआत करने यानी डेब्यू करने का मौका मिल सकता है। आयरलैंड के इस दौरे के तुरंत बाद भारतीय टीम को इंग्लैंड का एक और बड़ा दौरा भी करना है, जिसके लिए वैभव का चयन लगभग पक्का माना जा रहा है। इस समय पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों और बड़े-बड़े दिग्गजों की नजरें भारत के इस नए और चमकते हुए सितारे पर टिकी हुई हैं। वैभव सूर्यवंशी ने दुनिया को दिखा दिया है कि एक असली और महान खिलाड़ी वही होता है जो मुश्किल परिस्थितियों और भारी दबाव के बीच सबसे ज्यादा निखरकर सामने आता है। श्रीलंका की सरजमीं पर खेली गई उनकी यह पारी केवल रनों का एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन सभी विरोधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो भारतीय क्रिकेट की ताकत को कम आंकने की भूल करते हैं।

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