ग्रामीण विकास मोहन सरकार की प्राथमिकता बहनों के साथ किसानों और युवाओं की चिंता

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ग्रामीण विकास मोहन सरकार की प्राथमिकता बहनों के साथ किसानों और युवाओं की चिंता

मध्यप्रदेश के इतिहास में महिला सशक्तीकरण और क्षेत्रीय विकास के स्वर्णिम अध्याय की एक नई और ओजस्वी इबारत लिखी जा रही है, जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता का मिलन होता है, तो सुशासन का एक नया स्वरूप उभरकर सामने आता है। देश की गौरवशाली परंपरा में मातृशक्ति ने सदैव हर कालखंड में अपनी वीरता, त्याग और समर्पण से राष्ट्र के मान-सम्मान को अक्षुण्ण रखा है। बुंदेलखंड की वीरप्रसूता भूमि से उठने वाली राष्ट्रभक्ति की गूंज और वीरांगनाओं का गौरवशाली अतीत आज भी समाज को प्रेरणा देता है। इसी पावन पृष्ठभूमि में राज्य की विकास यात्रा को गति देते हुए वर्तमान नेतृत्व ने न केवल महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्वावलंबन को सुनिश्चित किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम बढ़ाए हैं। किसी भी कल्याणकारी राज्य की असली सफलता इस बात में निहित होती है कि वह अपने समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं और वंचितों को कितनी संबलता प्रदान करता है। सागर जिले में आयोजित भव्य और गरिमामयी कार्यक्रम इसी सोच को धरातल पर उतारने का एक अत्यंत प्रशंसनीय प्रयास है, जहां विकास कार्यों की झड़ी लगाकर प्रदेश को समृद्धि के एक नए पथ पर अग्रसर किया गया है।

​किसी भी समाज की प्रगति का पैमाना वहां की महिलाओं की आत्मनिर्भरता और उनके सम्मान से मापा जाता है। लाड़ली बहना योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाने, उनके स्वाभिमान को जगाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक पवित्र संकल्प बन चुकी है। इस दूरदर्शी योजना की संताइसवीं किस्त के रूप में सवा करोड़ से अधिक बहनों के खातों में करोड़ों रुपये की विशाल राशि का सीधा हस्तांतरण यह दर्शाता है कि लोक-कल्याण के प्रति सरकार पूरी तरह कटिबद्ध है। समयबद्ध तरीके से, बिना किसी रुकावट के और त्योहारों के आगमन से पहले ही माताओं-बहनों तक उनका अधिकार पहुंचाना एक कुशल और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का अनुपम उदाहरण है। रक्षाबंधन का पावन पर्व भले ही वर्ष में एक बार आता हो, परंतु प्रत्येक माह की निश्चित तिथि से पूर्व बहनों के खातों में सहायता राशि का पहुंचना इस बात की पुष्टि करता है कि राज्य सरकार एक भाई के दायित्व को निरंतर और पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है। यह वित्तीय संबल न केवल महिलाओं को घरेलू स्तर पर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।
​महिला सशक्तीकरण का यह मॉडल केवल वित्तीय सहायता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार शिक्षा और खेल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी का वितरण करना एक ऐसा क्रांतिकारी कदम है, जो युवा पीढ़ी के सपनों को पंख प्रदान करता है। यह प्रोत्साहन न केवल छात्राओं के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि सुदूर क्षेत्रों में रहने वाली बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की राह को भी सुगम और सुरक्षित बनाता है। इसके साथ ही, योग दिवस की पूर्वसंध्या पर लाड़ली बहना खेल सप्ताह का शुभारंभ करना इस बात का सूचक है कि सरकार महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी उतनी ही सजग है। जब समाज की बेटियां और महिलाएं खेल के मैदान से लेकर शिक्षा के मंच तक हर जगह अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगी, तभी एक स्वस्थ, जागरूक और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।
​इस महाभियान की एक और सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें महिला उत्थान के साथ-साथ क्षेत्रीय और बुनियादी विकास का एक बेहतरीन संतुलन बिठाया गया है। सागर और देवरी क्षेत्र के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश का कोई भी कोना प्रगति की दौड़ में पीछे नहीं छूटेगा। शिक्षा के क्षेत्र में सांदीपनि विद्यालय की स्थापना और उच्चतर विद्यालयों का उन्नयन ग्रामीण अंचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर प्रदान करेगा, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। वहीं दूसरी ओर, स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़े सौ बिस्तरों वाले अस्पताल की स्थापना का निर्णय सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह कदम जनमानस को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने की मजबूरी से मुक्ति दिलाएगा और उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाएगा।
​कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, किसानों की खुशहाली और सिंचाई की व्यवस्था को चाक-चौबंद करना किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दिशा में केसली ब्लॉक में बनने वाला विशाल जलाशय और आगामी ढाई वर्षों में प्रदेश के कुल सिंचाई रकबे को एक सौ लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य राज्य की कृषि नीति की दूरदर्शिता को रेखांकित करता है। पानी की हर बूंद का सही उपयोग सुनिश्चित कर खेतों तक हरियाली पहुंचाना न केवल खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाएगा, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने के मार्ग को भी प्रशस्त करेगा। इसके साथ ही, कृषि उपज मंडियों का नामकरण रानी अवंती बाई लोधी जैसी महान वीरांगना के नाम पर करना हमारी ऐतिहासिक विरासत और महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरक तरीका है। लहसुन और प्याज जैसी नकदी फसलों के लिए विशेष मंडियों की स्थापना से स्थानीय किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा और बिचौलियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी।
​पंचायतों को नगर पंचायतों में परिवर्तित करने और ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों जैसे देवखंडेरा मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणाएं यह सिद्ध करती हैं कि विकास की यह बयार समग्र और सर्वव्यापी है। शहरीकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप देकर ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाएं बढ़ाना और साथ ही अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेज कर रखना, आधुनिकता और परंपरा के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में चल रही विकास की यह अविरल धारा और अंत्योदय की भावना से ओतप्रोत योजनाएं समाज के हर वर्ग में एक नया विश्वास जगा रही हैं। सुशासन का यह अनुकरणीय प्रतिमान न केवल राज्य को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है, बल्कि देश के सामने एक आदर्श स्थापित कर रहा है, जहां विकास की रोशनी हर घर-आंगन को आलोकित कर रही है।

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