एजेंसी, नई दिल्ली। Rahul Gandhi News : देश की राजनीति में इस समय विदेश नीति और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के मुख्य नेता राहुल गांधी ने हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दुखद मृत्यु के मामले को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वर्तमान केंद्र सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन की तरफ से आए बयानों पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने वर्तमान सरकार की विदेश नीति को कमजोर बताते हुए आरोप लगाया है कि देश का नेतृत्व अपने नागरिकों के सम्मान और उनकी सुरक्षा की रक्षा करने में पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है और इसे देश के स्वाभिमान के साथ एक बड़ा समझौता करार दिया है।
अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद – न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है।
उनके शब्द पढ़िए: “अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।” कोई उल्लंघन “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 14, 2026
अमेरिकी प्रशासन के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया
इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्षी नेता ने रविवार को सामाजिक माध्यम एक्स पर अपनी बात साझा की। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि इस हिंसक अमेरिकी हमले में हमारे देश के तीन निर्दोष नाविकों की जान चली गई, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी प्रशासन के भीतर किसी भी प्रकार का पछतावा या दुख देखने को नहीं मिल रहा है। अमेरिका ने इस बड़ी लापरवाही और घटना के लिए अब तक भारत से किसी भी तरह की औपचारिक माफी नहीं मांगी है। इसके विपरीत, वहां के प्रशासन की ओर से लगातार ऐसे बयान और दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं जो एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय भाषा और देश के सम्मान का मुद्दा
राहुल गांधी ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को रेखांकित करते हुए देश की जनता के सामने कई गंभीर प्रश्न रखे हैं। उन्होंने अमेरिकी बयानों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका यह कह रहा है कि सभी को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत और पूरी तरह से पालन करना होगा और किसी भी प्रकार का उल्लंघन या अनदेखी किसी भी कीमत पर सहन नहीं की जाएगी। विपक्षी नेता का मानना है कि दुनिया का कोई भी स्वाभिमानी और स्वतंत्र देश इस तरह की धौंस जमाने वाली और आदेश देने वाली भाषा को कभी भी स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की भाषा देश की संप्रभुता को चुनौती देती है, परंतु इसके बाद भी हमारे देश के प्रधानमंत्री पूरी तरह से मौन बैठे हैं और इस पर कोई कड़ा प्रतिवाद दर्ज नहीं करा रहे हैं।
केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली और विपक्ष के गंभीर आरोप
अपने वक्तव्य को और अधिक धार देते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व का यह रवैया ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे किसी के दबाव में काम कर रहे हों और चुपचाप आदेशों का पालन कर रहे हों। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जो सरकार देश के नागरिकों की जान की कीमत नहीं समझ सकती और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकती, वह देश को सही दिशा में नहीं ले जा सकती। विपक्ष के नेता के अनुसार, जो शक्तियां देश का अपमान करने का प्रयास कर रही हैं, वर्तमान नेतृत्व उन्हीं के प्रभाव में दबा हुआ दिखाई दे रहा है और यही कारण है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी भारत सरकार की तरफ से अमेरिका को कोई कड़ा संदेश नहीं भेजा गया है। इस पूरे मामले ने अब देश के भीतर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।
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