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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ साजिश का सनसनीखेज पर्दाफाश, आशुतोष ब्रह्मचारी ने वीडियो जारी कर कुबूला अपना गुनाह

उत्तर प्रदेश देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, मथुरा। Avimukteshvaranand : सनातन धर्म के प्रमुख स्तंभ माने जाने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के खिलाफ रची गई एक बहुत बड़ी और गहरी साजिश का बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। शंकराचार्य पर बटुकों के यौन शोषण जैसा बेहद गंभीर और घिनौना आरोप लगाने वाले मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी अब अपने पुराने बयानों से पूरी तरह से पलट गए हैं। उन्होंने एक चौंकाने वाला वीडियो संदेश जारी करते हुए यह खुलेआम स्वीकार किया है कि उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ जो भी कानूनी मुकदमा दर्ज कराया था, वह पूरी तरह से फर्जी, झूठा और मनगढ़ंत था। आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि यह पूरा केस उन्होंने खुद की मर्जी से नहीं बल्कि तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य रामचंद्र दास के बेहद कड़े दबाव और बहकावे में आकर दर्ज कराया था। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरी साजिश में पुलिस और प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों के भी शामिल होने का एक बहुत ही गंभीर आरोप लगाया है, जिससे पूरे संत समाज और राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मच गया है।

गुरु की हत्या की साजिश और कूटनीतिक दबाव का बड़ा आरोप

आशुतोष ब्रह्मचारी ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें उन्होंने कई ऐसे राज खोले हैं जिसने सबको हैरत में डाल दिया है। उनका सीधा आरोप है कि उनके अपने ही गुरुभाई रामचंद्र दास ने अपने गुरु तक की हत्या करवाने का एक बेहद खतरनाक षड्यंत्र रचा था। इसी साजिश के तहत रामचंद्र दास ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की सामाजिक और धार्मिक छवि को पूरी तरह से मटियामेट करने के लिए यह फर्जी मुकदमा तैयार करवाया था। आशुतोष का कहना है कि रामचंद्र ने उन पर इस कदर मानसिक दबाव बनाया कि वह उनकी बात मानने पर मजबूर हो गए। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने साफ तौर पर कहा है कि रामचंद्र दास ने उन्हें पूरी तरह से गुमराह किया और धोखे में रखकर शंकराचार्य के खिलाफ इतना बड़ा कदम उठाने के लिए इस्तेमाल किया। इस पूरे मामले को लेकर अब आशुतोष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मथुरा को एक लिखित शिकायत पत्र भी भेजा है।

फर्जी वसीयत के जरिए आश्रम की अरबों की संपत्ति हड़पने का खेल

आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में यह भी कहा गया है कि रामचंद्र दास ने न केवल शंकराचार्य को फंसाया बल्कि एक फर्जी वसीयतनामा भी तैयार करवाया था। इसी फर्जी वसीयत के सहारे उसने देवा बाबा के बेहद प्रसिद्ध आश्रम पर अपना अवैध कब्जा जमा लिया। आशुतोष का कहना है कि इस फर्जी वसीयत को तैयार करने वाले और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ अब वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और यह पूरा मामला बहुत जल्द अदालत के सामने भी लेकर जाएंगे। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मथुरा पुलिस ने इस मामले में दबाव के आगे घुटने टेके और रामचंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की, तो वह सीधे न्यायालय की शरण लेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस सच की लड़ाई को आखिरी सांस तक लड़ेंगे। भले ही उन्होंने पहले दबाव में आकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एक गलत लड़ाई लड़ी थी, लेकिन अब वह कोर्ट में खड़े होकर यह सच बताएंगे कि किस तरह से रामचंद्र दास ने उनका मानसिक उत्पीड़न किया, उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर दिया और उनसे इतना बड़ा पाप करवाया।

चैट और सबूतों के साथ जल्द होगा कई और बड़े चेहरों का पर्दाफाश

आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि वह बहुत ही जल्द एक और बड़ा खुलासा करने वाले हैं, जिसमें वह यह बताएंगे कि आखिर क्यों और किस मकसद के तहत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के खिलाफ इतनी बड़ी और घिनौनी साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि उनके पास मोबाइल पर हुई बातचीत के सारे संदेश (चैट) पूरी तरह सुरक्षित मौजूद हैं। इस चैट के भीतर फर्जी मुकदमा दायर करने की योजना से लेकर फर्जी वसीयत बनाने तक की हर एक छोटी-बड़ी बात और साजिश का पूरा सबूत मौजूद है। आशुतोष ने खुलकर आरोप लगाया कि रामचंद्र दास की मुख्य योजना इस पूरे विवाद की आड़ में दो बेहद प्रतिष्ठित और बड़े आश्रमों की संपत्ति को पूरी तरह से अपने हाथ में लेने की थी, जिसके लिए उसने धर्म की मर्यादा को भी ताक पर रख दिया।

जानिए क्या था पूरा विवाद और पॉक्सो कोर्ट का पिछला आदेश

इस पूरे विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान हुई थी। वहां दोनों गुटों के बीच शुरू हुए आपसी मतभेद के बाद स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अचानक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आश्रम के छोटे बटुकों के यौन उत्पीड़न का बेहद संवेदनशील आरोप जड़ दिया था। इस शिकायत के बाद इस साल 8 फरवरी को प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत में एक याचिका भी दाखिल की गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने 21 फरवरी को अपनी कानूनी कार्यवाही पूरी की थी और पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उनके साथ जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का एक कड़ा आदेश सुनाया था। लेकिन अब मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता के खुद इस पूरे मामले को फर्जी और प्रायोजित बताने के बाद इस केस में एक नया और बहुत बड़ा मोड़ आ गया है।

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