एजेंसी, काबुल। Pakistan Air Strike : पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद और आतंकवाद के मोर्चे पर घिरे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर दुस्साहसिक कदम उठाया है। पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार की देर रात अफगानिस्तान के कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए हैं। अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस भीषण सैन्य हमले में अब तक 13 बेगुनाह नागरिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। बेहद दुखद बात यह है कि इन मृतकों में 11 मासूम बच्चे, एक बेबस महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा इस अचानक हुए हमले में 14 अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। तालिबान सरकार ने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने जानबूझकर आम नागरिकों के घरों और रिहायशी बस्तियों को निशाना बनाकर बमबारी की है।
Afghanistan says Pakistani airstrikes targeting the country killed at least 13 people and wounded 14, reports AP. pic.twitter.com/a0EoQx1VtP
— Press Trust of India (@PTI_News) June 10, 2026
तालिबान ने साझा कीं घायलों की तस्वीरें, हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का लगाया आरोप
तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरा है। अफगान प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का पूरी तरह से माखौल उड़ाते हुए उसके हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) का उल्लंघन किया है। पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में घुसकर आम जनता के मकानों पर भारी बमबारी की है। तालिबान सरकार ने इस तबाही और उसमें लहूलुहान हुए मासूम बच्चों व नागरिकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा की हैं, जिससे पूरी दुनिया में पाकिस्तान की इस क्रूर कार्रवाई का सच सामने आ सके। इस हमले के बाद प्रभावित इलाकों में चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई है और मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
पाकिस्तान का बेतुका दावा, कहा- भारत समर्थित आतंकवादियों को मार गिराया
दूसरी तरफ हमेशा की तरह अपनी हरकतों पर पर्दा डालते हुए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के इन सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद ने दावा किया है कि उसकी सेना ने किसी आम नागरिक को निशाना नहीं बनाया, बल्कि खुफिया जानकारी के आधार पर सीमा पार सक्रिय आतंकियों के ठिकानों पर बिल्कुल सटीक और नियंत्रित हमला (सर्जिकल स्ट्राइक) किया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इस्लामाबाद में बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे सैन्य ऑपरेशन के दौरान 26 भारत समर्थित आतंकवादी मार गिराए गए हैं। पाकिस्तानी मंत्री ने यह भी दावा किया कि सेना ने इस कार्रवाई में आतंकवादियों के चार बड़े और मुख्य अड्डों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि जिन जगहों को निशाना बनाया गया, उनमें आतंकियों के अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर, भारी हथियारों का एक बड़ा गोदाम और दो कुख्यात आतंकी कमांडरों के मुख्य ऑपरेशन सेंटर शामिल थे।
सीमा चौकी पर हुए हमले का बदला लेने की फिराक में था पाकिस्तान
पाकिस्तानी सेना की इस बौखलाहट के पीछे एक दिन पहले हुई एक बड़ी हिंसक घटना को मुख्य वजह माना जा रहा है। दरअसल, 9 जून को पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित एक बॉर्डर चौकी पर अज्ञात हमलावरों ने अचानक धावा बोल दिया था। इस भीषण जमीनी लड़ाई में पाकिस्तान के छह सुरक्षाकर्मी मौके पर ही मारे गए थे। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई करते हुए आठ हमलावर आतंकवादियों को ढेर कर दिया था, जो सीमा चौकी पर पूरी तरह कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। इसी घटना के प्रतिशोध में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर मिसाइलें दाग दीं। पाकिस्तान लंबे समय से यह रोना रोता रहा है कि उसकी यह सैन्य कार्रवाई केवल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ है। पाकिस्तान का सीधा आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान की सुरक्षित जमीन का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के भीतर सुरक्षा बलों पर बड़े आत्मघाती हमले करते हैं।
तालिबान का पलटवार, कहा- मार्च में पाकिस्तानी हमले से मारे गए थे सैकड़ों लोग
काबुल में बैठी तालिबान सरकार पाकिस्तान के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है। तालिबान का कहना है कि वह अपनी धरती पर किसी भी ऐसे समूह या संगठन को पनाह नहीं दे रही है जो पड़ोसी देशों के लिए खतरा बने। इसके उलट तालिबान ने पाकिस्तान पर ही अफगानिस्तान की आजादी और अखंडता को बार-बार ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। तालिबान सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में पाकिस्तान की एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों के कारण अफगानिस्तान के सैकड़ों बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इससे पहले मार्च 2026 में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर एक बहुत बड़ा हवाई हमला किया था। अफगान अधिकारियों के अनुसार, उस वक्त काबुल में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुई अंधाधुंध बमबारी में 400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी, जिसे तालिबान ने मानवता के खिलाफ एक बड़ा अपराध घोषित किया था। हालांकि पाकिस्तान ने तब भी इन दावों को नकारते हुए कहा था कि उसने केवल एक गोला-बारूद के डिपो को उड़ाया था। मार्च की उस भयावह घटना के बाद से ही दोनों मुल्कों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
चार महीनों से सुलग रही है जंग की आग, अस्पताल भी हुए खाक
आपको बता दें कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह खूनी संघर्ष पिछले चार महीनों से लगातार जारी है, जिसकी शुरुआत इसी साल 22 फरवरी को हुई थी। उस समय पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में भीषण हवाई हमले (एयरस्ट्राइक) किए थे। तब पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने गर्व से दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में टीटीपी के ठिकानों पर की गई कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए हैं, जबकि पाकिस्तानी मीडिया ने यह संख्या 80 से पार बताई थी। इस हमले का करारा जवाब देते हुए अफगानिस्तान की सेना ने भी 27 फरवरी को पाकिस्तान की सीमा के भीतर भारी गोलाबारी की थी। इन हवाई हमलों के दौरान काबुल में स्थित एक 2000 बेड वाले विशाल अस्पताल में भी भीषण आग लग गई थी, जिससे चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।
जानिए क्यों एक-दूसरे के खून के प्यासे बने पाकिस्तान और टीटीपी
पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच दुश्मनी की जड़ें काफी पुरानी हैं। साल 2001 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, तब पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार ने अमेरिका का खुलकर साथ दिया था। पाकिस्तान के इस फैसले से टीटीपी बेहद नाराज हो गया क्योंकि वह अमेरिका की इस कार्रवाई को पूरी तरह इस्लाम के खिलाफ मानता था। टीटीपी का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और व्यवस्था सच्चे इस्लामिक नियमों का पालन नहीं करती, इसलिए वह पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लगातार हमले करता है। टीटीपी का अफगानिस्तान के तालिबान के साथ बहुत पुराना और गहरा वैचारिक व पारिवारिक जुड़ाव है और ये दोनों ही समूह इतिहास में एक-दूसरे का समर्थन करते आए हैं। यही वजह है कि साल 2021 में जब अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान दोबारा काबिज हुआ, तो पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा के लिए टीटीपी को निशाना बनाना शुरू कर दिया और तब से लेकर आज तक इन दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं।
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