एजेंसी, बेंगलुरु। Karnataka CM News : कर्नाटक की प्रांतीय राजनीति में शनिवार को एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य के वर्तमान उप-मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर रणनीतिकार डीके शिवकुमार अब कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। राजधानी बेंगलुरु में शनिवार को आयोजित हुई कांग्रेस विधायक दल की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान उन्हें सर्वसम्मति से विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया है। इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि बीते 28 मई को मुख्यमंत्री पद से आधिकारिक इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने खुद डीके शिवकुमार के नाम का आधिकारिक प्रस्ताव सबके सामने रखा। इस प्रस्ताव को वहां मौजूद सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने बिना किसी विरोध के एकमत से पारित कर दिया।
Shri D.K. Shivakumar called on Hon’ble Governor Shri Thaawarchand Gehlot at Lok Bhavan today and staked claim to form the Government.
The Hon’ble Governor accepted the claim. The swearing-in ceremony will be held on 3 June 2026 at 4:05 PM at Lok Bhavan, Bengaluru. pic.twitter.com/L16qJ1dVXX
— Thaawarchand Gehlot Office (@TcGehlotOffice) May 30, 2026
रोटेशनल फॉर्मूले के तहत कमान और आगामी शपथ ग्रहण समारोह
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नए मुख्यमंत्री का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आगामी 3 जून को लोक भवन परिसर में स्थित प्रसिद्ध ‘ग्लास हाउस’ में आयोजित किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों और सूत्रों के दावों के मुताबिक, नए मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने के साथ ही राज्य की पूरी कैबिनेट को भी नए सिरे से पुनर्गठित किया जाएगा। माना जा रहा है कि मौजूदा प्रशासनिक कैबिनेट से करीब 10 पुराने मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है। राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए इस बार पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटों को भी नए मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 4 नए उप-मुख्यमंत्री भी बनाए जाने की प्रबल संभावना है।
उल्लेखनीय है कि डीके शिवकुमार को कांग्रेस आलाकमान द्वारा तय किए गए ‘सीएम रोटेशनल फॉर्मूला’ यानी बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाने की गुप्त नीति के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इस व्यवस्था के पहले चरण के तहत सिद्धारमैया 20 मई 2023 से लेकर 28 मई 2026 तक राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे। शनिवार को हुई इस निर्णायक बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल विशेष रूप से उपस्थित थे। इन दोनों शीर्ष नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इस पूरी चयन प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए विशेष पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था।
बैठक के भीतर का घटनाक्रम और सिद्धारमैया का आभार
शनिवार को बेंगलुरु में आयोजित हुई इस बैठक की शुरुआत में सभी विधायकों ने सामूहिक रूप से एक साझा प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें यह तय किया गया था कि राज्य के नए नेता के नाम का अंतिम फैसला कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप यानी आलाकमान पर छोड़ दिया जाए। इसके तुरंत बाद एक बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में सिद्धारमैया ने खुद आगे बढ़कर डीके शिवकुमार का नाम नए सीएलपी नेता के रूप में सबके सामने पेश कर दिया। राज्य के वर्तमान गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने तुरंत इस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया, जिसके बाद हॉल में मौजूद सभी विधायकों ने मेज थपथपाकर एक आवाज में इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।
नेता चुने जाने के तुरंत बाद डीके शिवकुमार ने मंच से एक विशेष धन्यवाद प्रस्ताव रखा और संकट के समय में पार्टी को संभालने और उनका नाम आगे बढ़ाने के लिए सिद्धारमैया के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और आभार प्रकट किया। इस पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब सिद्धारमैया, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला मुख्य बैठक से उठकर कुछ देर के लिए एक अलग गोपनीय कमरे में चले गए। वहां इन तीनों वरिष्ठ नेताओं के बीच राज्य के आगामी राजनीतिक भविष्य और कैबिनेट विस्तार को लेकर काफी लंबी बातचीत हुई। इस गुप्त मंत्रणा के समाप्त होने के बाद जब तीनों नेता वापस मुख्य हॉल में लौटे, तब जाकर शिवकुमार को आधिकारिक रूप से नेता घोषित करने की बची हुई प्रक्रिया पूरी की गई।
देश के सबसे अमीर राजनेताओं में शामिल और संकटमोचक की छवि
कर्नाटक की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने जा रहे डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर और रसूखदार राजनेताओं की सूची में शीर्ष स्थान रखते हैं। उनके द्वारा दाखिल किए गए हालिया चुनावी दस्तावेजों के अनुसार, उनके पास ₹1413 करोड़ से भी अधिक की चल-अचल संपत्ति है। वे मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट, खनन और होटल व्यवसाय के कारोबार से जुड़े हुए हैं। उनके जीवन का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इतनी अकूत धन-संपत्ति का मालिक होने के बावजूद उनके आधिकारिक चुनावी घोषणापत्र में आज भी केवल एक पुरानी टोयोटा क्वालिस गाड़ी ही दर्ज है। इसके साथ ही उन पर विभिन्न बैंकों और संस्थाओं का करीब 263 करोड़ रुपये का कर्ज भी बकाया है।
वर्ष 1962 में बेंगलुरु के समीप स्थित कनकपुरा क्षेत्र में जन्मे डीके शिवकुमार राज्य के बेहद प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और वे वर्तमान में कनकपुरा विधानसभा सीट से ही विधायक हैं। पूरे देश की कांग्रेस में उनकी पहचान एक ऐसे बेहद मजबूत ‘संकटमोचक’ नेता के रूप में है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी के विधायकों को बिखरने या टूटने से बचाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। पार्टी के किसी भी बड़े राजनीतिक ऑपरेशन, देशव्यापी चुनाव प्रबंधन, आक्रामक प्रचार अभियान या किसी भी प्रकार की गुप्त रणनीतियों के लिए जिस विशाल वित्तीय और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट यानी संसाधन प्रबंधन की जरूरत होती है, उसे वे पर्दे के पीछे रहकर बहुत ही खामोशी और चतुराई से संभाल लेते हैं।
कानूनी पेचीदगियां और तिहाड़ जेल का सफर
डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर जितना शानदार रहा है, उतना ही वे कानूनी विवादों से भी घिरे रहे हैं। वर्तमान में उन पर अलग-अलग थानों में 19 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी उनके खिलाफ वित्तीय हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) के दो अलग-अलग बड़े मामलों में काफी समय से जांच कर रहा है। वर्ष 2017 में आयकर विभाग द्वारा उनके ठिकानों पर की गई एक बहुत बड़ी छापेमारी के दौरान उनके रिहायशी परिसर से लगभग 8.5 करोड़ रुपये की
नकदी बरामद हुई थी। इसी मामले को आधार बनाकर वर्ष 2019 में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, जिसके कारण उन्हें करीब 50 दिनों तक दिल्ली की तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बिताना पड़ा था। इसके अलावा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई भी उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक बेहद गंभीर मामले की गहराई से जांच कर रही है।
ज्योतिषी की बड़ी भविष्यवाणी और दीर्घकालिक शासन का दावा
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद उनके बेहद करीबी और पारिवारिक ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने उनकी राजनीतिक किस्मत को लेकर एक बहुत बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने दावा किया है कि शिवकुमार सिर्फ कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि बहुत लंबे समय तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे और राज्य की राजनीति पर राज करेंगे।
एक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी से विशेष बातचीत करते हुए द्वारकानाथ गुरुजी ने बताया कि उन्होंने शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए 31 मई, 5 जून और 6 जून की तीन बेहद शुभ तारीखें सुझाई हैं। उन्होंने अपनी गणना के आधार पर यह भी दावा किया कि शिवकुमार आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों के बाद भी पूरे बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापसी करेंगे। ज्योतिषी ने उनकी कुंडली का विश्लेषण करते हुए जोर देकर कहा कि वे कोई एक या दो दिन के मुख्यमंत्री नहीं हैं और न ही वे केवल एक बार इस पद पर रहने वाले नेता हैं। उनकी गृह दशाएं और कुंडली अत्यंत बलवान हैं, जिसके कारण वे कर्नाटक की जनता के कल्याण के लिए बहुत लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करते रहेंगे।
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