एजेंसी, पटना। Patna Boat Accident : बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले उमानाथ गंगा घाट पर गुरुवार की सुबह-सुबह एक बेहद दर्दनाक और बड़ा नाव हादसा सामने आया है। चौदह लोगों को लेकर जा रही एक छोटी नाव गंगा नदी की तेज लहरों और तेज हवा के थपेड़ों को बर्दाश्त नहीं कर सकी और बीच धारा में असंतुलित होकर पूरी तरह पलट गई। इस भयावह हादसे के बाद नदी के घाट पर चीख-पुकार और भारी अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत दल की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। अब तक की मिली जानकारी के मुताबिक, इस दुखद हादसे में तीन लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, जिनके शवों को नदी से बाहर निकाल लिया गया है। वहीं, मुस्तैदी दिखाते हुए सात लोगों को पानी से सुरक्षित बाहर बचा लिया गया है, जबकि चार लोग अभी भी गहरे पानी में लापता हैं जिनकी खोजबीन लगातार की जा रही है।
एनडीआरएफ और प्रशासनिक अमला राहत कार्य में जुटा
इस बड़े हादसे की भनक लगते ही बाढ़ के थाना प्रभारी ब्रजकिशोर सिंह, सीडीपीओ रामकृष्ण, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) गरिमा लोहिया और अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह तुरंत अपने दलबल के साथ प्रशासनिक तौर पर मौके पर पहुंचे। घटना की गंभीरता को देखते हुए फौरन एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम को नदी में उतारा गया, जो लापता लोगों की तलाश में युद्धस्तर पर खोजी अभियान चला रही है। हादसे के वक्त नदी के आसपास मौजूद अन्य नाविकों ने भी अपनी जान की परवाह न करते हुए तत्परता दिखाई और डूब रहे सात लोगों को सुरक्षित तैरकर बाहर निकालने में मदद की। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान प्रशासन को एक महिला और एक युवक का शव बरामद हुआ है। बाकी के लापता चार लोगों के लिए नदी में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके के ग्रामीणों में मातम पसरा हुआ है।
व्यापार की अंधी होड़ और ओवरलोडिंग बनी हादसे की वजह
बाढ़ का उमानाथ गंगा घाट जिले के सबसे व्यस्त और व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण घाटों में गिना जाता है। इस घाट से हर दिन लगभग बीस नावें नदी के उस पार दियारा क्षेत्र के लिए रवाना होती हैं। इस इलाके से रोजाना सैकड़ों किसान और छोटे व्यापारी दियारा जाते हैं और वहां खेतों से ताजी सब्जियों की祹कर वापस लौटते हैं, जिससे प्रतिदिन यहां लाखों रुपये का बड़ा कारोबार होता है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, व्यापारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच मंडियों में सबसे पहले अपनी सब्जी पहुंचाने की एक अंधी होड़ लगी रहती है। इसी होड़ और जल्दबाजी के चक्कर में अक्सर छोटी नावों पर उनकी तय क्षमता से बहुत अधिक लोग और सामान लाद दिया जाता है। जिस नाव की क्षमता महज दस लोगों को बैठाने की होती है, उस पर नियमों को ताक पर रखकर बीस-बीस लोग सवार हो जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन की ओर से इस ओवरलोडिंग पर कोई ठोस नियंत्रण या सख्ती नहीं बरती जाती, जिसके कारण आज इतना बड़ा हादसा घटित हो गया।
जिलाधिकारी और ग्रामीण एसपी ने लिया जायजा, दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
हादसे की सूचना मिलने के बाद पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुंदन कुमार ने खुद बाढ़ पहुंचकर उमानाथ गंगा घाट की जमीनी स्थिति का बारीकी से मुआयना किया। आला अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीमों को निर्देश दिया कि वे बिना रुके अपने खोज अभियान को और तेज करें ताकि लापता लोगों का जल्द पता लगाया जा सके। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी त्यागराजन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नदी में बिना किसी वैध अनुमति, बिना लाइफ जैकेट और तय सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर चलाई जा रही सभी अवैध नावों के खिलाफ अब एक बड़ा अभियान चलाकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस प्रशासन घाट पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और बचे हुए लोगों से पूछताछ कर हादसे के असली कारणों की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।
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