Rajya Sabha

राज्यसभा का चुनावी गणित : 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को पड़ेंगे वोट

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Rajya Sabha Election 2026 : देश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारत के निर्वाचन आयोग यानी चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए देश के 12 राज्यों की कुल 26 राज्यसभा सीटों पर आगामी 18 जून को चुनाव कराने का बड़ा ऐलान कर दिया है। इस बार जिन सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें से 24 सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल आगामी 21 जून से 19 जुलाई के बीच समाप्त होने जा रहा है, जिसके कारण ये सीटें खाली हो रही हैं। रिटायर होने वाले इन प्रमुख सदस्यों की सूची में देश के कई बड़े और दिग्गज राजनेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा जैसे कद्दावर चेहरे शामिल हैं।

देश के दो राज्यों की खाली सीटों पर उपचुनाव का भी ऐलान

निर्वाचन आयोग से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इन 24 नियमित सीटों पर होने वाले चुनावों के साथ-साथ दो अन्य रिक्त सीटों पर उपचुनाव भी कराए जाएंगे। ये दोनों सीटें हाल ही में कुछ बड़े सियासी बदलावों और इस्तीफों के चलते खाली हुई थीं। इनमें से पहली सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। वहीं दूसरी सीट अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एआईएडीएमके के प्रमुख नेता सीवी षणमुगम द्वारा अपना पद छोड़ने के कारण खाली हुई थी। इन दोनों ही सीटों पर भी 18 जून को ही वोट डाले जाएंगे।

मार्च में हुए चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन को मिली थी बड़ी बढ़त

इससे पहले इसी साल 16 मार्च को देश के तीन प्रमुख राज्यों हरियाणा, बिहार और ओडिशा की कुल 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव संपन्न हुए थे। उन चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो 11 में से 9 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के उम्मीदवारों या फिर उनके द्वारा समर्थित प्रत्याशियों ने एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की थी। वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और ओडिशा के क्षेत्रीय दल बीजू जनता दल यानी बीजद के खाते में केवल एक-एक सीट ही आ सकी थी। राज्यों के हिसाब से देखें तो बिहार की सभी पांचों सीटों पर सत्ताधारी गठबंधन के प्रत्याशी विजयी रहे थे, जबकि ओडिशा की 4 में से 3 सीटों पर एनडीए और 1 सीट पर बीजद ने कब्जा जमाया था। इसके अलावा हरियाणा की दो सीटों में से एक भाजपा और एक कांग्रेस के पाले में गई थी, जिसके बाद ऊपरी सदन में एनडीए बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल चुका है।

जानिए कैसे होता है देश के उच्च सदन का यह विशेष चुनाव

भारत में राज्यसभा सांसदों के चुने जाने की पूरी प्रक्रिया आम चुनावों या विधानसभा चुनावों से काफी अलग और अनूठी होती है। राज्यसभा के सदस्यों को देश की आम जनता सीधे वोट डालकर नहीं चुनती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए राज्यों के विधायक (एमएलए) इन चुनावों में मतदान करते हैं, इसलिए इसे अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली कहा जाता है। राज्यसभा को भारतीय संविधान में एक स्थाई सदन का दर्जा प्राप्त है, जिसे कभी भी पूरी तरह भंग नहीं किया जा सकता। इसी वजह से इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल की अवधि के बाद बारी-बारी से रिटायर होते रहते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव किया जाता है। वर्तमान में राज्यसभा में कुल सीटों की संख्या 245 है, जिनमें से 233 सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के जरिए होता है और शेष 12 विशिष्ट सदस्यों को देश के राष्ट्रपति द्वारा खेल, कला, विज्ञान और साहित्य जैसे क्षेत्रों से सीधे मनोनीत किया जाता है।

इस गणितीय समीकरण और कोटे के आधार पर तय होती है जीत

राज्यसभा चुनाव में किसी भी प्रत्याशी की जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होगी, इसका गणित पूरी तरह से पहले से ही तय होता है। वोटों की इस संख्या की गणना राज्य के कुल विधायकों और वहां खाली हो रही राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर की जाती है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक एक विधायक के वोट की वैल्यू को 100 माना जाता है। किसी भी उम्मीदवार को सदन में पहुंचने के लिए मतों की एक निश्चित संख्या को हासिल करना अनिवार्य होता है, जिसे कानूनी भाषा में ‘जीतने का कोटा’ कहा जाता है।

महाराष्ट्र के उदाहरण से समझिए वोटों का पूरा समीकरण

इस पूरे चुनावी गणित को हम महाराष्ट्र राज्य की 7 खाली हो रही सीटों के व्यावहारिक उदाहरण से बहुत ही आसानी से समझ सकते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में वर्तमान में कुल विधायकों की संख्या 288 है और वहां इस बार कुल 7 सीटों पर चुनाव होना तय हुआ है। वोटों की गणना के नियम के अनुसार, कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है, फिर उसमें खाली हो रही सीटों की संख्या में एक जोड़कर भाग दिया जाता है। इस तरह भाग देने के बाद जो संख्या आती है, उसमें अंत में एक और जोड़ दिया जाता है। महाराष्ट्र के मामले में जब 288 विधायकों को 100 से गुणा करते हैं तो संख्या 28,800 आती है। इसमें खाली हो रही 7 सीटों में 1 जोड़कर यानी 8 से भाग देने पर हमें 3600 की संख्या मिलती है। जब इस संख्या में नियम के मुताबिक 1 और जोड़ दिया जाता है, तो अंतिम आंकड़ा 3601 का आता है। चूंकि चुनाव में एक विधायक के वोट की कुल वैल्यू 100 अंक के बराबर तय की गई है, इसलिए इस पूरे समीकरण के अनुसार महाराष्ट्र में वर्तमान परिस्थिति में किसी भी एक राज्यसभा सीट पर अपनी जीत पक्की करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 36 विधायकों के सीधे और स्पष्ट समर्थन की आवश्यकता होगी। यही तरीका देश के अन्य राज्यों में भी वहां की विधायक संख्या के आधार पर लागू किया जाता है।

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