एजेंसी, नई दिल्ली। ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ मार्ग बंद होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। इस संकट से निपटने के लिए भारत ने रूस से करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदने का फैसला किया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों ने रूसी तेल के लिए नए समझौते किए हैं।
एशियाई समुद्र में फंसे जहाजों को भारत ने किया सुरक्षित रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ गया है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने उन रूसी तेल टैंकरों को बुक कर लिया है जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें कोई खरीदार नहीं मिल रहा था। शिपिंग डेटा से पता चला है कि ‘मायलो’ और ‘सारा’ जैसे बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की ओर रुख कर लिया है। रिलायंस और इंडियन ऑयल की बड़ी बुकिंग बाजार के जानकारों का कहना है कि अकेले इंडियन ऑयल ने लगभग 1 करोड़ बैरल और रिलायंस ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल बुक किया है। शेष तेल अन्य भारतीय कंपनियों द्वारा खरीदा गया है। इस बार रूस ने यूराल्स, ईएसपीओ और वरान्डे जैसे तेल ग्रेड की पेशकश की है। हाल ही में अमेरिका ने भी समुद्र में फंसे रूसी तेल शिपमेंट खरीदने के लिए भारत को 3 अप्रैल तक की छूट देने की बात कही थी, हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर नहीं है।
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खाड़ी देशों से निर्भरता घटाकर फिर रूस पर भरोसा पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से आयात कम करके सऊदी अरब और इराक से खरीदारी बढ़ा दी थी। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में रूस से तेल आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो पिछले साल के मध्य में 20 लाख बैरल से अधिक था। अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने एक बार फिर रूस का रुख किया है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो। विवादित समुद्री रास्तों से बनाई दूरी ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को ब्लॉक किए जाने के बाद भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भारत पहले अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता था। अब भारत ने उन वैकल्पिक रास्तों से आयात में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है जो इस विवादित क्षेत्र के दायरे में नहीं आते। पहले भारत 60 प्रतिशत तेल अन्य मार्गों से मंगाता था, जिसे अब बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे खाड़ी देशों की जंग का असर भारत की सप्लाई चेन पर कम पड़ेगा।


