एजेंसी, मुजफ्फराबाद। Terrorist Killed PoK : भारत के जम्मू-कश्मीर में साल 2019 में हुए भीषण पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक और खूंखार आतंकवादी हमजा बुरहान की पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। आतंकी संगठन अल-बद्र के इस बड़े कमांडर को आतंकी गलियारों में ‘डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता था। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पीओके के मुजफ्फराबाद के पास एक बेहद घने जंगली इलाके में कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उस पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। हमलावरों द्वारा की गई इस भीषण गोलीबारी में उसका पूरा शरीर गोलियों से छलनी हो गया और घटनास्थल पर ही तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई।
STORY | Pulwama attack mastermind Burhan Hamza shot dead by unknown men in PoK
Arjumand Gulzar, alias Burhan Hamza, a designated terrorist and the key mastermind behind the 2019 Pulwama terror attack on a CRPF convoy, has been shot dead by unidentified gunmen in… pic.twitter.com/Wk7zWl0Z0x
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
फर्जी पहचान की आड़ में चला रहा था आतंकी ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ का नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, मारा गया आतंकी हमजा बुरहान पिछले कई सालों से पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था। वह वहां एक स्थानीय स्कूल में शिक्षक (टीचर) के रूप में काम करने का ढोंग कर रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो। इस फर्जी शिक्षक की आड़ लेकर वह वास्तव में सीमा पार से भारत में घुसपैठ कराने के बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था। इसके साथ ही वह पीओके में युवाओं को गुमराह कर उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग देने वाले आतंकी कैंपों को भी संभाल रहा था। इस मारे गए आतंकी का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था, जो मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था।
भारत सरकार ने घोषित किया था आतंकी, एनआईए की चार्जशीट में भी दर्ज था नाम
लगभग 27 साल के इस आतंकी का जन्म वर्ष 1999 में पुलवामा में हुआ था। वह वैध दस्तावेजों का सहारा लेकर पहले पाकिस्तान गया था और वहां जाने के बाद वह पूरी तरह से आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हो गया। धीरे-धीरे वह इस संगठन का एक सक्रिय और सबसे क्रूर कमांडर बन गया जो जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी नेटवर्क के साथ मिलकर भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ काम करता था। भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए साल 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत इसे आधिकारिक रूप से ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पुलवामा हमले को लेकर दाखिल की गई चार्जशीट में भी इसका नाम प्रमुखता से शामिल था। इसके अलावा, वह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक अन्य बड़े आतंकी हमले का भी मुख्य सूत्रधार था।
पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आत्मघाती हमले का काला इतिहास
गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भारतीय इतिहास का एक बहुत ही दुखद और बड़ा आतंकी हमला हुआ था। उस दिन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक बहुत बड़ा काफिला, जिसमें करीब 78 गाड़ियां शामिल थीं, 2500 से भी ज्यादा जवानों को लेकर जम्मू से श्रीनगर की तरफ जा रहा था। जब यह काफिला दोपहर के समय पुलवामा जिले के लेथपोरा के पास पहुंचा, तभी विपरीत दिशा से आ रही एक संदिग्ध मारुति ईको कार ने जवानों से भरी एक बस में जोरदार टक्कर मार दी। उस आत्मघाती कार में 200 से 300 किलोग्राम से भी ज्यादा आरडीएक्स और अन्य घातक विस्फोटक भरे हुए थे। टक्कर होते ही इतना भयानक और जोरदार धमाका हुआ कि बस के परखच्चे उड़ गए और भारत मां के 40 वीर जवान मौके पर ही शहीद हो गए थे।
घाटी में युवाओं को उकसाने और टेरर फंडिंग का था मुख्य आरोपी
इस वीभत्स आत्मघाती हमले को पुलवामा के ही एक स्थानीय कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था, जिसकी पूरी कमान और साजिश हमजा बुरहान जैसे आकाओं के हाथ में थी। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। एनआईए ने इस मामले में जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसके भाई अब्दुल राउफ असगर सहित 19 लोगों के खिलाफ 13,500 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जाने के बाद से ही हमजा बुरहान लगातार कश्मीर के स्थानीय युवाओं को आतंकवाद के दलदल में धकेलने के लिए उकसाता था। वह घाटी में मौजूद अपने ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ को ग्रेनेड हमलों के लिए बारूद और हथियार सप्लाई करने के साथ-साथ अल-बद्र के आतंकी नेटवर्क को चलाने के लिए भारी मात्रा में टेरर फंडिंग (पैसा) भी मुहैया करा रहा था।
ये भी पढ़े : एमपी में तबादलों का रास्ता साफ : 1 से 15 जून तक होंगे ट्रांसफर, पति-पत्नी और गंभीर बीमार कर्मचारियों को बड़ी राहत
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


